Bageshwar Sarkar के मंच से सुलताना ने की हिंदू धर्म की तारीफ, जानिये इस्लाम के बारे में उसने क्या कहा?

pandit dhirendra krishna shastri
Twitter @bageshwardham
मंच से सुलताना ने बताया कि वह क्यों हिंदू धर्म में आना चाहती है और उसे इस्लाम धर्म की कौन-सी बातें खराब लगती हैं। इसके बाद बाबा ने उसका हिंदू धर्म में स्वागत किया। बाबा ने बाद में सुलताना को शुभी दासी नामक हिंदू नाम दिया और उसको बहन मानते हुए उससे राखी भी बंधवाई।

बागेश्वर सरकार के नाम से मशहूर हो चुके पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का कथा कार्यक्रम इन दिनों छत्तीसगढ़ में चल रहा है। इस कार्यक्रम के दौरान बागेश्वर सरकार के चमत्कारों को मीडिया में सुर्खियां भी खूब मिल रही हैं। बागेश्वर सरकार पर आरोप लगा कि वह अंधविश्वास को बढ़ावा दे रहे हैं, जवाब में बागेश्वर सरकार ने मीडिया के कैमरों के समक्ष चुनौतियों पर खरा उतर कर दिखाया। बागेश्वर सरकार के दरबार में लोग तमाम तरह की फरियादें लेकर आते हैं। छत्तीसगढ़ की ही रहने वाली महिला सुलताना जब बाबा के दरबार में पहुँची तो उसने हिंदू धर्म अपनाने की अनुमति मांगी और हिंदू धर्म की तारीफ करते हुए कई बातें भी कहीं। बाबा के मंच से सुलताना ने बताया कि वह क्यों हिंदू धर्म में आना चाहती है और उसे इस्लाम धर्म की कौन-सी बातें खराब लगती हैं। इसके बाद बाबा ने उसका हिंदू धर्म में स्वागत किया। बाबा ने बाद में सुलताना को शुभी दासी नामक हिंदू नाम दिया और उसको बहन मानते हुए उससे राखी भी बंधवाई। शुभी दासी ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को मिठाई और नारियल भेंट किया जिसके बाद बाबा ने शुभी को बागेश्वर धाम का गमछा पहनाया।

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हम आपको बता दें कि पिछले सप्ताह बाबा के मंच से सुलताना ने कहा था कि मेरा मन बोलता है कि हिंदू धर्म से अच्छा कोई धर्म हो ही नहीं सकता है। वायरल हो रहे वीडियो के मुताबिक उसने कहा था कि हिंदू धर्म सभ्यता और संस्कार वाला धर्म है क्योंकि इसमें भाई बहनों में शादियां नहीं होतीं। साथ ही हिंदू धर्म में महिलाओं की जिंदगी तलाक तलाक तलाक बोल कर बर्बाद नहीं होती। उसने कहा था कि हिंदू धर्म में एक बार शादी होती है वो भी सात फेरों के साथ, सिंदूर का मांग भरा जाता है और मंगलसूत्र पहनाया जाता है और सोलह श्रृंगार होता है। इसके बाद बाबा ने उसका हिंदू धर्म में स्वागत किया और उसको बहन मानते हुए उससे राखी बंधवाई। सुलताना से शुभी बनी महिला ने विधिवत तरीके से भाई की आरती कर उन्हें राखी बांधी।

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