Omar Abdullah जल्द PM Modi को सौंपेंगे Rajouri और पुंछ का बाढ़ राहत प्रस्ताव

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राजौरी में राहत और पुनर्वास समीक्षा बैठक के बाद कहा कि वह बाढ़ प्रभावित जिलों के लिए विशेष केंद्रीय पैकेज का प्रस्ताव लेकर प्रधानमंत्री से मिलेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र शासित प्रदेश के पास पुनर्निर्माण का पूरा खर्च खुद उठाने की आर्थिक क्षमता नहीं है। राजौरी जिले में 19 जुलाई को अचानक आई बाढ़ में चार लोगों की मौत हुई थी और अब सरकार पुनर्वास चरण पर काम कर रही है।
राजौरी/जम्मू, छह अगस्त जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह बाढ़ से प्रभावित राजौरी और पुंछ जिलों के लिए एक विशेष केंद्रीय पैकेज की मांग करने वाले प्रस्ताव के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से व्यक्तिगत रूप से मिलेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र-शासित प्रदेश के पास पुनर्निर्माण का पूरा खर्च खुद उठाने की आर्थिक क्षमता नहीं है। राजौरी में बाढ़ राहत और पुनर्वास पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करने के बाद मुख्यमंत्री ने पत्रकारों को बताया, “कुछ काम हम खुद संभाल सकते हैं, लेकिन असलियत यह है कि जम्मू-कश्मीर के पास पुनर्वास का पूरा खर्च उठाने की आर्थिक क्षमता नहीं है।” उन्होंने कहा, “पिछले साल आई बाढ़ के बाद, केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के लिए लगभग 1,400 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी थी।
इस बार भी हम एक विस्तृत पैकेज तैयार करेंगे और केंद्र से मदद मांगेंगे।” उन्होंने कहा कि बाढ़, अचानक आई बाढ़ और बादल फटने की घटनाओं को अपने आप ही प्राकृतिक आपदा माना जाता है और केंद्रीय मदद मांगने के लिए इनके बारे में अलग से कोई घोषणा करने की जरूरत नहीं होती। अब्दुल्ला ने कहा, “जैसे ही प्रस्ताव तैयार हो जाएगा, मैं खुद इसे प्रधानमंत्री को सौंपूंगा।” राजौरी जिले में 19 जुलाई को अचानक आई बाढ़ में चार लोगों की मौत के बाद हालात का जायजा लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने तीन चरणों में कार्रवाई की - बचाव, राहत-पुनर्प्राप्ति और पुनर्वास। उन्होंने कहा, “हमारी पहली प्राथमिकता जनहानि को कम से कम करना था।
हमें इस जिले में चार कीमती जानें जाने का अफसोस है। अगर जिला प्रशासन और पुलिस ने रात में तुरंत कार्रवाई न की होती, तो मरने वालों की संख्या कहीं ज्यादा हो सकती थी।” उन्होंने कहा कि सरकार अब पुनर्वास और पुनर्निर्माण के चरण में आ गई है जिसमें क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं को बहाल करने को प्राथमिकता दी जा रही है।
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