NDRF की नई टीमें तैनात करने का लंबित प्रस्ताव जल्द मंजूर करे सरकार: संसदीय समिति

एक संसदीय समिति ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश के जंगलों में आग की समस्याओं से निपटने के लिए आपदा राहत बल की अतिरिक्त टीमों की तैनाती से जुड़े प्रस्ताव को शीघ्र स्वीकृति देने का आग्रह किया है। राज्यसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार गृह मंत्रालय में यह प्रस्ताव जनवरी से अटका पड़ा है, जिसे जल्द मंजूरी देकर संवेदनशील क्षेत्रों में तैयारियों को मजबूत किया जाना चाहिए। समिति ने हिमालयी इलाकों में जलवायु परिवर्तन और वनाग्नि के बीच संबंध पर शोध कराने का भी सुझाव दिया।
नयी दिल्ली, सात अगस्त एक संसदीय समिति ने सरकार से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश में जंगलों की आग से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमों को तैनात करने के संबंध में लंबित प्रस्ताव को शीघ्र मंजूरी देने की सिफारिश की है। राज्यसभा में शुक्रवार को पेश की गई एक रिपोर्ट में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन संबंधी स्थायी संसदीय समिति ने गौर किया कि यह प्रस्ताव जनवरी 2025 से गृह मंत्रालय के पास लंबित है। वर्तमान में, एनडीआरएफ के पास असम, आंध्र प्रदेश और उत्तराखंड के लिए औपचारिक रूप से स्वीकृत और समर्पित तीन वन अग्नि प्रतिक्रिया टीमें हैं, जिनमें कुल 150 कर्मी हैं।
इस प्रस्ताव में उत्तराखंड में एक अतिरिक्त टीम और हिमाचल प्रदेश तथा मध्य प्रदेश में दो अलग-अलग टीमों को तैनात करना शामिल है। गौरतलब है कि जुलाई 2022 में एनडीआरएफ को जंगलों की आग से निपटने की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी। समिति ने कहा, “तदनुसार, एनडीआरएफ की पहली, 10वीं और 15वीं बटालियन से 50-50 कर्मियों वाली एक-एक टीम ने सेंट्रल एकेडमी फॉर स्टेट फॉरेस्ट सर्विस में वन अग्नि रोकथाम के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया।” हालांकि, उत्तराखंड में 2024 के दौरान जंगलों की आग के मौसम में, राज्य की एकमात्र एनडीआरएफ टीम बड़े पैमाने पर हुई आग की घटनाओं से निपटने में संघर्ष करती नजर आई।
समिति के अनुसार, इसके परिणामस्वरूप यह प्रस्ताव आया कि एनडीआरएफ को सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में तैयारियों को मजबूत करने के लिए तीन और टीमों को तैनात करना चाहिए। समिति की रिपोर्ट में देखा गया कि 2019-20 से 2023-24 के बीच भारतीय हिमालयी क्षेत्र में जंगल की आग की घटनाओं की वार्षिक प्रवृत्ति में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। आग की कुल घटनाएं 2019-20 में 3,566 थीं जो 2020-21 में बढ़कर 30,672 हो गईं।
अगले वर्षों में इनकी संख्या कम होने लगीं और 2021-22 में 25,995 तथा 2022-23 में 8,682 घटनाएं हुईं। लेकिन 2023-24 में इनकी संख्या फिर बढ़ गई और मूल्यांकन अवधि के दौरान 37,152 आग की घटनाओं के साथ उच्चतम मूल्य पर पहुंच गईं। समिति ने यह भी सिफारिश की कि सरकार को भारतीय हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और जंगल की आग की आवृत्ति, तीव्रता तथा मौसमी स्थिति के बीच जुड़ाव स्थापित करने के लिए शोध अध्ययन शुरू करना चाहिए।
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