पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार के आभूषण 1978 की सूची से खा रहे मेल, गणना जारी

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ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की मूल्यवान वस्तुओं की 48 साल बाद नए सिरे से सूची बनाई जा रही है। मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी के अनुसार, अब तक खजाने में मिली वस्तुएं 1978 के रिकॉर्ड से मेल खाती हैं। पूरी प्रक्रिया उच्च सुरक्षा, 3डी मैपिंग और सीसीटीवी की निगरानी में पूरी की जा रही है।

पुरी, एक सितंबर वार्षिक रथ यात्रा के बाद पुरी जगन्नाथ मंदिर के ‘रत्न भंडार’ की सूची तैयार करने की फिर से शुरू हुई प्रक्रिया के बीच एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अब तक खजाने में रखे आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुएं 1978 में तैयार की गई सूची से मेल खाती हैं। मंदिर में 48 साल के अंतराल के बाद रत्न भंडार की सूची तैयार की जा रही है। यह प्रक्रिया राज्य सरकार द्वारा मंजूर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत सीसीटीवी निगरानी में और मजिस्ट्रेट तथा अधिकृत व्यक्तियों की मौजूदगी में सख्ती से की जा रही है।

इससे पहले 19 जुलाई को सूची तैयार की गई थी, जब रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा श्री गुंडिचा मंदिर में थे। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने सोमवार को कहा, ‘‘आज हम सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर खजाने के भीतरी कक्ष में दाखिल हुए और सूची तैयार करने का काम शाम छह बजकर 55 मिनट तक जारी रहा।’’ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी पाढ़ी 25 मार्च को सूची तैयार करने का काम शुरू होने के बाद से पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। मंदिर में 48 साल के अंतराल के बाद रत्न भंडार की सूची तैयार की जा रही है।

पाढ़ी ने कहा कि खजाने के भीतरी कक्ष में रखे तीन संदूकों की सूची तैयार करने के लिए राज्य सरकार से एक अतिरिक्त एसओपी को मंजूरी दिलाने की जरूरत है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘आकार बड़ा होने के कारण इनकी गिनती भीतरी रत्न भंडार में नहीं की जा सकी। इसलिए हम ‘खाता सेज घर’ (खजाने के पास स्थित एक बड़े कक्ष) में इनकी सूची तैयार करने की योजना बना रहे हैं।’’ पाढ़ी ने कहा कि उनके सहित सभी अधिकृत व्यक्तियों की रत्न भंडार में प्रवेश करने और बाहर आने से पहले पूरी तरह सुरक्षा जांच की जाती है।

उन्होंने कहा कि कड़ी सुरक्षा और एसओपी का पालन करते हुए सूची तैयार करने का काम जारी है। उन्होंने कहा, ‘‘पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी मूल्यवान वस्तुओं का डिजिटल दस्तावेजीकरण उन्नत 3डी मैपिंग के साथ उच्च-रिजॉल्यूशन फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के जरिए किया जा रहा है।’’ यह पूछे जाने पर कि यह प्रक्रिया कब तक पूरी होने की संभावना है, पाढ़ी ने कहा, ‘‘हम इसे जल्द पूरा करने की जल्दी में नहीं हैं, बल्कि सटीकता और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर है। 1978 में इसे पूरा करने में 72 दिन लगे थे।

इस बार रत्न विशेषज्ञों को शामिल करके और प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए सूची बहुत सटीक तरीके से तैयार की जा रही है।’’ उन्होंने कहा कि मूल्यवान वस्तुओं में कई तरह के रत्न जड़े हुए हैं और उनकी भी जांच की जा रही है। एसजेटीए के अधिकारी ने कहा कि सूची तैयार करने में रत्न विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि कुछ वस्तुओं में हीरे समेत कई कीमती रत्न जड़े हुए हैं। पाढ़ी ने कहा कि रत्न भंडार के भीतर सूची तैयार करने के काम के दौरान देवताओं की पूजा-अर्चना और ‘बाहर कथा’ (बाहरी कक्ष) से श्रद्धालुओं के सुचारू दर्शन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

उन्होंने कहा कि रत्न भंडार की सूची तैयार करने का काम एक सितंबर को भी जारी रहेगा। इस बीच, एसजेटीए के अधिकारियों ने बताया कि मंदिर के ‘नाटा मंडप’ (नृत्य कक्ष) में वातानुकूलन की सुविधा स्थापित की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को मंदिर के भीतर गर्म और उमस भरे मौसम से राहत मिल सके और उन्हें सुविधा हो।

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