मार्च खत्म करने के बाद अचानक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे राहुल और प्रियंका, अखिलेश-तेजस्वी भी रहे मौजूद

rahul
ANI
अंकित सिंह । Oct 12 2026 7:08PM

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों को पक्षकार बनाया गया है। इससे पहले सीजेआई ने राहुल गांधी से मिलने के अनुरोध को ठुकराते हुए कानूनी प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी थी।

सुप्रीम कोर्ट में INDIA ब्लॉक के नेता, जिनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव शामिल हैं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने INDIA ब्लॉक के अन्य नेताओं के साथ मिलकर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। अपनी याचिका में, विपक्षी गठबंधन ने ECI के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्तों - सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी - को भी पक्षकार बनाया है।

इसे भी पढ़ें: देश में अस्थिरता और अराजकता फैला रहे हैं Rahul Gandhi, Anurag Thakur का तीखा हमला

इससे पहले पुलिस द्वारा मार्च रोके जाने के बाद, कांग्रेस नेता और 10 अन्य लोगों की ओर से वकीलों ने एक याचिका दायर की। इसके साथ ही, कथित वोट चोरी और वोटर लिस्ट में बदलाव को लेकर विपक्ष की लड़ाई अब अदालत तक पहुँच गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाज़े सभी के लिए खुले हैं, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष के नेताओं को लंबित मुद्दे पर मुलाक़ात करने के बजाय सही कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए अदालत का रुख करना चाहिए।

यह कानूनी कदम तब उठाया गया जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से ज्ञापन सौंपने के लिए सीधी मुलाकात के अनुरोध को ठुकरा दिया। CJI ने मामले के विचाराधीन होने (sub-judice) का हवाला देते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज से जुड़ी याचिकाओं पर पहले से ही मंगलवार, 13 अक्टूबर को सुनवाई होनी है।

इसे भी पढ़ें: अपनी ही पार्टी की मध्य प्रदेश सरकार के खिलाफ Shivraj Singh Chouhan ने क्यों खोला मोर्चा? Madhya Pradesh BJP में सब ठीक है?

गांधी को भेजे गए एक औपचारिक संदेश में, CJI ने इस बात पर ज़ोर दिया कि हालांकि अदालत निजी अभ्यावेदनों के ज़रिए सरकारी अधिकारियों के प्रशासनिक कामकाज में सीधे दखल नहीं दे सकती, लेकिन नेता न्यायिक पक्ष के तहत अदालत का दरवाज़ा खटखटाने के लिए स्वतंत्र थे। CJI ने संकेत दिया कि विपक्षी नेताओं द्वारा दायर की गई किसी भी नई याचिका को लंबित मामलों के साथ जोड़कर सुना जा सकता है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़