राहुल गांधी का कड़ा बयान: CJP नेताओं की गिरफ्तारी को बताया 'कायरतापूर्ण हरकत', जंतर-मंतर वापस हासिल करने का संकल्प

इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि जंतर-मंतर को हर हाल में वापस हासिल किया जाएगा। CJP के विरोध प्रदर्शन पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में राहुल ने कहा, "शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना कोई अपराध नहीं है। इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरतापूर्ण हरकत है।"
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को जेल भेजे जाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इस कार्रवाई को "कायरतापूर्ण हरकत" करार देते हुए कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना कोई अपराध नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि जंतर-मंतर को हर हाल में वापस हासिल किया जाएगा। CJP के विरोध प्रदर्शन पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में राहुल ने कहा, "शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना कोई अपराध नहीं है। इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरतापूर्ण हरकत है।"
उन्होंने आगे कहा, "छात्र। युवा। पत्रकार। INDIA गठबंधन। अलग-अलग बैनर, एक मकसद। सभी विरोध प्रदर्शन एक ही हैं: नागरिक अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं।" कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और "हम इसे वापस हासिल करेंगे"।
जंतर-मंतर में घुसपैठ के आरोप में दास और रंका जेल भेजे गए
सौरव दास और आशुतोष रंका को दिल्ली की एक अदालत ने पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर में कथित तौर पर घुसपैठ करने के आरोप में हिरासत में लिए जाने के एक दिन बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया था।
दोनों को मंदिर मार्ग स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जिसके बाद अदालत ने उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया।
घटना के समय मौजूद अजिंक्य शिंदे को ₹5,000 का बॉन्ड भरने के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया। उनकी रिहाई इस शर्त पर हुई कि वे एक साल तक ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे जिनसे सार्वजनिक व्यवस्था में खलल पड़ सकता है।
दास, रंका और शिंदे को 13 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि वे जंतर-मंतर के बंद गेट फांदकर परिसर में घुसे और प्रदर्शन किया। यह घटना उस जगह का 'निर्धारित विरोध स्थल' का दर्जा खत्म होने के एक दिन बाद हुई थी।
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने तर्क दिया कि आरोपियों ने सार्वजनिक व्यवस्था में खलल डाला और अपने बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया। पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने लोगों से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की औपचारिक अपील की थी। इन आरोपों का हवाला देते हुए पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सुनवाई के बाद, अदालत ने दास और रंका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि शिंदे को तय शर्तों के साथ जमानत पर रिहा कर दिया गया।
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