UP Election 2027 में Seat Sharing पर रार, Akhilesh Yadav की शर्तों पर क्या झुकेगी Congress?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान तेज हो गई है। कांग्रेस 150 सीटों की मांग कर रही है, जबकि अखिलेश यादव ने जिताऊ उम्मीदवारों के आधार पर 85 से 90 सीटें देने के संकेत दिए हैं। रायबरेली और अमेठी समेत पांच जिलों की सीटों पर पेंच फंसा है।
आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच तनाव बढ़ गया है। कांग्रेस गठबंधन में बराबर हिस्सेदारी की मांग करते हुए कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। हालांकि, खबर है कि समाजवादी पार्टी सिर्फ़ 85 से 90 सीटें देने को तैयार है और उसने कांग्रेस से उम्मीदवारों की लिस्ट और ज़मीनी रिपोर्ट मांगी है। इस विवाद में रायबरेली और अमेठी जैसे पारंपरिक गढ़ों की सीटें भी शामिल हैं। दूसरी ओर सपा भी कांग्रेस पर दबाव बनाने की कोशिश में है। खबर है कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने 'इंडिया' गठबंधन की एक अहम बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस पर ज्यादा दबाव बन सकता है।
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कांग्रेस का दावा
कांग्रेस के राज्य प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के अनुसार, 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के बीच सीट-शेयरिंग का समझौता अक्टूबर में तय होने की उम्मीद है। गौतम ने बताया कि कांग्रेस के पास उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवार मौजूद हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि गठबंधन के तहत कांग्रेस कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। गौतम ने कहा कि कांग्रेस के पास सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार मौजूद हैं। गठबंधन के तहत, कांग्रेस पार्टी को 50 प्रतिशत सीटें मिलनी हैं। कांग्रेस 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी।
अखिलेश यादव का रुख
अखिलेश यादव ने कहा है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस के साथ पार्टी का गठबंधन जारी रहेगा, लेकिन उन्होंने यह भी साफ़ किया कि सीटों के बंटवारे का फ़ैसला पहले से तय बंटवारे के आधार पर नहीं, बल्कि अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में जीत की क्षमता के आधार पर किया जाएगा। यादव ने रायबरेली से SP के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अभियान की शुरुआत करते हुए ये बातें कहीं। रायबरेली, कांग्रेस नेता और गठबंधन सहयोगी राहुल गांधी का लोकसभा क्षेत्र है। अपनी PDA रथ यात्रा के दौरान समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गठबंधन जारी रहेगा, लेकिन पार्टियों को सीटें जीतने की संभावना के आधार पर सीटों के बंटवारे पर बातचीत करनी होगी। समाजवादी पार्टी अपनी तैयारियों को लेकर साफ़ है। अगर गठबंधन में कोई दिक्कत आती है, तो वह सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। समाजवादी पार्टी चाहती है कि कांग्रेस पहले उन उम्मीदवारों की पहचान करे जिनके जीतने की संभावना है और उन सीटों को भी चिह्नित करे जहां उसका संगठन मजबूत है और वह अकेले चुनाव लड़ सकती है। इसके बाद ही वह सीटों के बंटवारे पर आगे बातचीत करना चाहती है।
दोनों की अपनी-अपनी शर्ते
कांग्रेस में जल्दबाजी का माहौल है। पार्टी गठबंधन तो चाहती है, लेकिन वह इसे जल्द से जल्द पक्का करना चाहती है ताकि उसे पता चल सके कि वह कितने उम्मीदवार उतारेगी और किन सीटों पर चुनाव लड़ेगी। वहीं दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी सीट-बंटवारे को अंतिम रूप देने की कोई जल्दी नहीं दिखा रही है। समाजवादी पार्टी अपनी तैयारियां पूरी करने के बाद ही सीट-बंटवारे पर चर्चा करना चाहती है, जबकि कांग्रेस का मानना है कि सीटों को तय करने में किसी भी तरह की देरी से उसकी मोल-भाव करने की ताकत कमजोर हो जाएगी। पार्टी को डर है कि अगर सीट-बंटवारे की प्रक्रिया में देरी हुई, तो आखिरकार उसे अखिलेश यादव की शर्तों पर गठबंधन में शामिल होना पड़ सकता है।
गठबंधन जरूरू और मजबूरी दोनों
दोनों पार्टियां उत्तर प्रदेश में सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी का दावा कर रही हैं। हालांकि, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस, दोनों ही यह बात जानती हैं कि उनमें से किसी में भी अकेले सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की क्षमता नहीं है। समाजवादी पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कमज़ोर है, जबकि राज्य के बाकी हिस्सों में कांग्रेस की संगठनात्मक मौजूदगी न के बराबर है। नतीजतन, दोनों पक्ष दावे और जवाबी दावे कर रहे हैं, लेकिन वे यह भी जानते हैं कि साथ आए बिना किसी भी पक्ष के लिए ज़्यादा प्रगति करना मुश्किल है। गठबंधन की बातचीत शुरू करने से पहले दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी सौदेबाजी की स्थिति को मज़बूत करना चाहते हैं।
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कहां फंस रहा पेंच
कांग्रेस और सपा के बीच सहारनपुर, रायबरेली, अमेठी, बाराबंकी और सीतापुर समेत पांच जिलों को लेकर असली झगड़ा है। रायबरेली और अमेठी गांधी परिवार से जुड़ा रहा है। रायबरेली में 6 विधानसभा सीटें हैं। अमेठी में 4 विधानसभा सीटें हैं। समाजवादी पार्टी हर हाल में ऊंचाहार, हरचंदपुर और सरेनी जैसी सीटों पर अपनी दावेदारी बनाए रखना चाहती है। 2022 के चुनाव में अमेठी की अमेठी सदर और गौरीगंज में सपा के उम्मीदवार जीते थे। रायबरेली में ऊंचाहार, हरचंदपुर, सरेनी और बछरावां में सपा के उम्मीदवार जीते थे। 2027 में भी सपा यहां खुद लड़ना चाहती है। वहीं, कांग्रेस का अपना अलग दावा है।
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