India China LAC Tension | अरुणाचल सीमा पर चीन के साथ टकराव जारी: ITBP प्रमुख के खुलासे के बाद कांग्रेस ने PM मोदी पर बोला हमला

ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने बताया कि यह टकराव जुलाई से चल रहा है। उस समय ऐसी खबरें आई थीं कि तक्सिंग इलाके में चीनी सैनिक भारतीय बलों को LAC (वास्तविक नियंत्रण रेखा) के पास अहम पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक जाने से रोक रहे हैं।
भारत-चीन सीमा (LAC) के पूर्वी सेक्टर से एक बेहद संवेदनशील और गंभीर राजनीतिक-सैन्य मामला सामने आया है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक (DG) शत्रुजीत कपूर ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि अरुणाचल प्रदेश सीमा पर कई स्थानों पर चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिकों के साथ भारतीय बलों का आमना-सामना और टकराव (Face-off) जारी है। इस खुलासे के बाद देश की सियासत गरमा गई है और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने बताया कि यह टकराव जुलाई से चल रहा है। उस समय ऐसी खबरें आई थीं कि तक्सिंग इलाके में चीनी सैनिक भारतीय बलों को LAC (वास्तविक नियंत्रण रेखा) के पास अहम पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक जाने से रोक रहे हैं। ITBP कर्मियों के लिए आयोजित एक वार्षिक सम्मान समारोह में कपूर ने कहा, "पिछले कुछ दिनों में ऐसी स्थिति बनी है जहां अरुणाचल में कई जगहों पर टकराव हुआ है, और यह अभी भी जारी है।"
इससे पता चलता है कि यह सैन्य तनाव नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान भी बना रहा, जिसमें सितंबर में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शामिल हुए थे।
अरुणाचल सीमा पर टकराव को लेकर ITBP के DG ने क्या कहा?
ITBP प्रमुख ने बताया कि इस टकराव के दौरान बल के 'शौर्य कमांडो' ने "बेहद शानदार" प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा, "हमारे हाल ही में तैयार किए गए शौर्य कमांडो ने इसमें बेहतरीन भूमिका निभाई है।" शौर्य कमांडो ऊंचे पहाड़ी इलाकों में युद्ध लड़ने में माहिर होते हैं।
1962 में गठित ITBP, चीन के साथ लगती 3,488 किलोमीटर लंबी 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) की सुरक्षा करती है।
कपूर ने कहा, "ITBP का गठन एक पहाड़ी गुरिल्ला बल के रूप में हुआ था, और 2004 में हमें चीन के साथ लगती सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई।" उन्होंने जोर देकर कहा, "हमें अपने मूल काम को नहीं छोड़ना चाहिए।"
यह मानते हुए कि चीन के साथ वाला मोर्चा "सबसे कठिन" है, ITBP के DG ने बताया कि बल ने अपनी सभी सीमा इकाइयों में ड्रोन प्लाटून तैयार किए हैं। साथ ही, गलवान जैसी स्थितियों से बेहतर तरीके से निपटने के लिए एक विशेष कॉम्बैट ट्रेनिंग प्रोग्राम बनाया गया है और जमीन के नीचे बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) तैयार किया जा रहा है।
हाल के महीनों में अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर तनाव काफी बढ़ गया है। जुलाई में, पीपल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) की एक जांच टीम ने बताया कि PLA के सैनिक तक्सिंग में भारत के गश्ती बिंदुओं (patrolling points) तक पहुँचने के रास्ते को रोक रहे हैं। उन्होंने ऊपरी सुबनसिरी जिले में चीन की बढ़ती गतिविधियों की ओर भी इशारा किया।
PPA एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल है, जिसके अरुणाचल विधानसभा में दो विधायक हैं। हालांकि, सरकार ने इन दावों को खारिज कर दिया और जोर देकर कहा कि अरुणाचल भारत का एक "अटूट" और "अभिन्न अंग" है।
कांग्रेस ने PM मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए
कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और PM मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 'इंडिया टुडे' को बताया कि अरुणाचल प्रदेश में चीन ने कोई नया इलाका कब्ज़े में नहीं लिया है। हालांकि, उन्होंने सीमा के पास कुछ चरागाहों तक पहुँच को लेकर स्थानीय लोगों की चिंताओं को स्वीकार किया।
ITBP के महानिदेशक (DG) के हालिया बयानों ने कांग्रेस को BJP सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है। 'X' (ट्विटर) पर एक तीखी पोस्ट में, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने अरुणाचल में तनाव को लेकर PM मोदी की "गहरी चुप्पी" पर सवाल उठाए।
रमेश ने ट्वीट किया, "एक तरफ 'विश्वगुरु' बनने का दावा करने वाले PM चीन के सामने लगातार झुक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ITBP के DG ने अरुणाचल प्रदेश में PLA के साथ हालिया टकरावों में अपने जवानों के प्रदर्शन की तारीफ की है - जो कि सही भी है। लेकिन इस पर PM और उनकी सरकार पूरी तरह से खामोश है।"
उन्होंने LAC पर शांति बनाए रखने के लिए सितंबर में हुई 'कोर कमांडर' स्तर की बातचीत के नतीजों पर भी सवाल उठाए। अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में यह पहली बार था जब इतने उच्च सैन्य कमांडर स्तर की 'फ्लैग मीटिंग' हुई।
रमेश ने कहा, "स्थानीय लोगों ने बताया है कि लद्दाख की तरह यहाँ भी भारत ने अपने गश्ती बिंदुओं (patrolling points) पर पहुँच खो दी है। चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश में हमारे कस्बों के नाम बदल रहा है और 60,000 मेगावाट का एक बांध बना रहा है, जो हमारी पारिस्थितिक (ecological) और जल सुरक्षा के लिए खतरा है।"
कुल मिलाकर, इससे पता चलता है कि डोकलाम और पूर्वी लद्दाख के बाद, भारत और चीन एक और सीमा विवाद में उलझ गए हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत-चीन संबंधों में हालिया सुधार के बीच, दोनों पक्ष इस मुद्दे को कैसे सुलझाते हैं।
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