Supreme Court का Delhi Government को निर्देश, Pellet Gun से घायल छात्रों को मिले तुरंत बेहतर इलाज

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ANI
अभिनय आकाश । Jul 30 2026 3:55PM

शीर्ष अदालत जंतर-मंतर और दिल्ली के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर धातु की पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान, बेंच ने कहा कि पुलिस नियम असाधारण परिस्थितियों में पैलेट गन के इस्तेमाल की इजाज़त देते हैं और कहा कि जब तक नियमों को ही चुनौती नहीं दी जाती, तब तक ऐसे हथियारों के इस्तेमाल को गैर-कानूनी नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह राष्ट्रीय राजधानी में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल से घायल हुए लोगों को उचित इलाज मुहैया कराए। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहन की बेंच ने आदेश दिया, दिल्ली सरकार घायल याचिकाकर्ता या इसी तरह की स्थिति वाले अन्य व्यक्तियों को इलाज मुहैया कराएगी। शीर्ष अदालत जंतर-मंतर और दिल्ली के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर धातु की पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान, बेंच ने कहा कि पुलिस नियम असाधारण परिस्थितियों में पैलेट गन के इस्तेमाल की इजाज़त देते हैं और कहा कि जब तक नियमों को ही चुनौती नहीं दी जाती, तब तक ऐसे हथियारों के इस्तेमाल को गैर-कानूनी नहीं माना जा सकता।

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जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि अगर कानून पुलिस को उन गंभीर स्थितियों में गोलियां चलाने की इजाज़त देता है जहां लाठीचार्ज या आंसू गैस से हिंसा को नियंत्रित नहीं किया जा सकता, तो अदालत को यह देखना होगा कि पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक कैसे लगाई जा सकती है, खासकर तब जब कोई शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन उपद्रवियों द्वारा हाईजैक कर लिया जाए और हिंसक हो जाए। जस्टिस बागची ने कहा पुलिस के नियम खास हालात में इनके इस्तेमाल की इजाज़त देते हैं, जब तक कि आप खुद उन नियमों को ही चुनौती न दें। हालात के हिसाब से कदम उठाने के तरीकों में से एक तरीका पेलेट गन का इस्तेमाल भी है। चीफ जस्टिस ने आगे कहा, इनके बहुत ज़्यादा इस्तेमाल के आरोपों को देखते हुए, आपकी मांग यह होनी चाहिए कि कोर्ट इनके इस्तेमाल के लिए कोई प्रोटोकॉल तय करे।

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जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि अधिकारियों को पुलिस फ़ोर्स को इस तरह तैयार करना चाहिए कि उन्हें ऐसे कड़े कदम न उठाने पड़ें। उन्होंने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा जब छात्र विरोध-प्रदर्शन करते हैं, तो हम शांतिपूर्ण तरीके से निपटने के पक्ष में हैं। लेकिन साथ ही, अपने फ़ायदे के लिए असली विरोध-प्रदर्शनों को हाईजैक करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। अपनी पुलिस को इस तरह तैयार करें कि उन्हें ऐसे कदम न उठाने पड़ें। सॉलिसिटर जनरल ने जवाब दिया कि पुलिसकर्मियों को सुरक्षा उपकरण दिए गए हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि इस्तेमाल किए गए प्रोजेक्टाइल धातु के पेलेट थे, जो घायल प्रदर्शनकारियों के शरीर से निकाले गए थे। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे गोला-बारूद का इस्तेमाल पूरी तरह से ज़रूरत से ज़्यादा था, क्योंकि भीड़ हिंसक नहीं थी।

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