विशेष गहन पुनरीक्षण पर Election Commission के जवाब पर याचिकाकर्ताओं को 10 दिन की मोहलत

विशेष गहन पुनरीक्षण पर Election Commission के जवाब पर याचिकाकर्ताओं को 10 दिन की मोहलत
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उच्चतम न्यायालय ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के समर्थन में निर्वाचन आयोग द्वारा दिए गए हलफनामे पर याचिकाकर्ताओं को जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। आयोग ने अपने 248 पन्नों के हलफनामे में एसआईआर प्रक्रिया को पूरी तरह कानूनी और तीनों सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत बताया है। वहीं शीर्ष अदालत ने बिहार एसआईआर में फॉर्म 6 में बदलाव के आरोपों को लेकर तृणमूल सांसद डोला सेन की याचिका पर भी आयोग को नोटिस जारी किया।

उच्चतम न्यायालय ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बचाव में निर्वाचन आयोग के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने के लिए मंगलवार को याचिकाकर्ताओं को 10 दिन का समय दिया। आयोग ने अपने हलफनामे में कहा है कि यह प्रक्रिया कानून के अनुरूप थी और इस लागू करने से संबंधित आदेशों को आयोग के तीनों सदस्यों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने राज्यसभा सदस्य डोला सेन की एक नयी याचिका पर निर्वाचन आयोग और अन्य को नोटिस भी जारी किया।

याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि शीर्ष अदालत की मंजूरी के बिना बिहार एसआईआर के दौरान ‘फॉर्म 6’ में बदलाव किए गए। सांसद सेन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सांसद मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने गलत तरीके से यह दावा किया है कि ‘फॉर्म 6’ में किए गए बदलावों को शीर्ष अदालत द्वारा अनुमोदित किया गया था। प्रधान न्यायाधीश ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि सभी मुद्दों की समीक्षा की जाएगी।

उन्होंने प्रथम याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह से कहा कि वे सोमवार देर शाम दाखिल किए गए निर्वाचन आयोग के जवाब पर 10 दिन के भीतर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करें। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और आयोग द्वारा लिए गए निर्णयों के खिलाफ दायर याचिका पर अपने 248 पन्नों के जवाब में आयोग ने एसआईआर का पुरजोर बचाव किया। आयोग ने ‘फॉर्म 6’ में संशोधन के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वैधानिक ‘फॉर्म 6’ में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

निर्वाचन आयोग की ओर से उप निर्वाचन आयुक्त भानु प्रकाश येतुरु द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया, ‘‘निर्वाचन आयोग पर आक्षेप लगाने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है।’’ आयोग ने कहा कि इस हलफनामे को भी चुनाव निकाय के तीनों सदस्यों के सर्वसम्मत से फैसले लेने के बाद ही दाखिल करने की मंजूरी दी गई थी। ये याचिकाएं अंग्रेजी दैनिक ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की 25 सितंबर की उस खबर के बाद दायर की गईं, जिसमें कहा गया था कि निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 माह में एसआईआर से संबंधित फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आधिकारिक तौर पर यह कहते हुए आपत्ति जताई थी कि ये आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए थे। इस दावे के बाद विपक्षी दलों और कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने प्रदर्शन शुरू कर दिए और मुख्य निर्वाचन आयुक्त कुमार को हटाने की मांग की।

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