TMC Election Symbol विवाद: निर्वाचन आयोग में जवाब दाखिल करने के लिए दोनों गुटों को 20 दिन की मोहलत

उच्चतम न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और 'जोड़ा घास फूल' चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में दोनों प्रतिद्वंद्वी पक्षों को निर्वाचन आयोग के समक्ष दलीलें पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। अदालत ने डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को आवश्यक दस्तावेज पेश करने के लिए 10 दिन और उसके बाद ममता गुट को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय निर्धारित किया। आयोग को दलीलें पूरी होने के बाद तय समयसीमा के भीतर फैसला सुनाने का निर्देश दिया गया है।
उच्चतम न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न ‘‘जोड़ा घास फूल’’ से जुड़े विवाद में निर्वाचन आयोग के समक्ष अपनी दलीलें पूरी करने के लिए 20 दिन का अतिरिक्त समय प्रदान कर दिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह आदेश, ममता तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सांसद कल्याण बनर्जी, तथा ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर की दलीलों पर गौर करने के बाद पारित किया। सुनवाई की शुरुआत में, कल्याण बनर्जी ने कहा कि ऋतब्रत गुट ने, जिसे ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम आवंटित किया गया है, निर्वाचन आयोग के समक्ष आवश्यक दस्तावेज दाखिल नहीं किए हैं।
पीठ ने 28 सितंबर को, आयोग को निर्देश दिया था कि वह पार्टी के नाम और ‘‘जोड़ा घास फूल’’ चुनाव चिह्न को लेकर दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच के विवाद पर चार महीने के भीतर फैसला ले। इन दलीलों पर जवाब देते हुए परमेश्वर ने कहा कि राज्य में दुर्गा पूजा उत्सव के कारण, उन्हें निर्वाचन आयोग के समक्ष कुछ दस्तावेज दाखिल करने के लिए गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर नहीं मिल सके। उन्होंने जरूरी काम पूरा करने के लिए कुछ और समय मांगा।
सुनवाई के अंत में, पीठ ने डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को निर्वाचन आयोग के समक्ष आवश्यक जवाबी हलफनामा और अन्य दस्तावेज दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया। साथ ही, डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस द्वारा आयोग के समक्ष अपना जवाब दाखिल किए जाने के बाद, ममता गुट को भी अपना प्रत्युत्तर और अन्य संबंधित दस्तावेज दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया गया। पीठ ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों में से किसी को भी उन दस्तावेजों की स्वीकार्यता पर सवाल उठाने की छूट होगी, जिन्हें वे अपने-अपने दावों के समर्थन में निर्वाचन आयोग के समक्ष पेश करेंगे।
इससे पहले, पीठ ने दोनों गुटों से कहा था कि वे निर्वाचन आयोग के समक्ष जारी कार्यवाही में अपनी दलीलें पूरी कर लें। पीठ ने आयोग को निर्देश दिया था कि दोनों पक्षों द्वारा अपनी दलीलें पूरी कर लेने के बाद, वह तीन महीने के भीतर इस मामले पर फैसला ले। शीर्ष अदालत ने यह आदेश पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया था।
यह याचिका तृणमूल कांग्रेस का नाम और पार्टी का चुनाव चिह्न जब्त करने संबंधी आयोग के फैसले के खिलाफ दायर की गई थी।
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