राजस्थान में नदियों के प्रदूषण पर Supreme Court सख्त, CBI जांच की दी चेतावनी

उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान में जोजरी, बांडी और लूनी नदी क्षेत्र में अवैध खनन तथा प्रदूषण पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। पीठ ने कहा कि यदि सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो मामले की सीबीआई जांच कराई जा सकती है। अदालत ने नदी प्रणाली बहाल करने की योजना पेश करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 27 नवंबर तय की है।
उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान में जोजरी-बांडी-लूनी नदी क्षेत्र में कथित अवैध खनन को लेकर सोमवार को राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा है कि वह इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश दे सकता है। यह कड़ी टिप्पणी न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने की, जो जोजरी नदी में प्रदूषण से जुड़े एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी। शीर्ष अदालत ने बांडी और लूनी नदियों में प्रदूषण के मुद्दे को भी रेखांकित किया।
जोजरी नदी जोधपुर से होकर गुजरती है, बांडी नदी पाली से होकर बहती है और लूनी नदी बालोतरा से होकर गुजरती है। बांडी और जोजरी नदियां बालोतरा शहर के पास लूनी नदी में मिल जाती हैं। न्यायालय ने सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान कथित अवैध खनन, खनन पट्टों के नियमितीकरण और बिना आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) के चल रहे उद्योगों से जुड़े मुद्दों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।
पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘अगर हम इसकी जांच-पड़ताल शुरू करते हैं, तो इसमें सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) जांच की जरूरत पड़ सकती है।’’ न्यायालय ने कहा, ‘‘राज्य के अधिकारियों की आंखों के सामने पूरी नदी प्रणाली नष्ट हो गई है।’’ उसने टिप्पणी की कि राज्य के अधिकारी अपनी जिम्मेदारियां निभाने में विफल रहे हैं। पीठ ने टिप्पणी की कि यदि राज्य प्रभावी सुधारात्मक कदम नहीं उठाता है, तो संबंधित पदाधिकारियों को इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। न्यायालय ने कहा कि राजस्थान के सांगानेर जैसे इलाकों में कई उद्योग बिना जरूरी अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) के चल रहे हैं।
पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘बीस लाख लोगों को नरक में रहने के लिए मजबूर करने की तुलना कुछ लोगों की आर्थिक व्यवहार्यता और आर्थिक जीविका से नहीं की जा सकती।’’ पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 नवंबर की तारीख तय करते हुए राजस्थान सरकार को निर्देश दिया कि वह नदी प्रणाली को बहाल करने और न्यायालय द्वारा उठाए गए अन्य मुद्दों पर एक प्रस्ताव पेश करे। शीर्ष अदालत ने अगस्त में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक ‘एकीकृत समन्वय समूह’ (आईसीजी) गठित करे, जो जोजरी, बांडी और लूनी नदियों में प्रदूषण की समस्या से निपट सके।
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