उमर अब्दुल्ला सरकार पूरी तरह सुरक्षित, Surinder Choudhary ने खारिज की मतभेदों की बात

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जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने मंगलवार को साफ किया कि उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार को कोई खतरा नहीं है। सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी के इस्तीफे और मतभेदों की खबरों के बीच उन्होंने कहा कि जनता के भारी जनादेश से यह सरकार बनी है। चौधरी ने यह भी भरोसा जताया कि नेशनल कांफ्रेंस में कार्यकर्ताओं की शिकायतें सुनने और उनका समाधान करने की मजबूत परंपरा मौजूद है।

(फोटो के साथ) जम्मू, तीन नवंबर जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने हालिया मंत्रिमंडल विस्तार और सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी के असंतोष के बाद सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के भीतर मतभेदों की खबरों के बीच उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार की स्थिरता को लेकर जताई जा रही चिंताओं को मंगलवार को खारिज कर दिया। श्रीनगर से लोकसभा सदस्य सैयद आगा रुहुल्ला मेहदी ने मंगलवार को यहां अपने पिता आगा सैयद मेहदी की 26वीं पुण्यतिथि पर एक रैली में नेकां नेतृत्व पर अनुच्छेद 370 की बहाली समेत चुनाव के दौरान किए गए प्रमुख वादों से पीछे हटने का आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा की। जब चौधरी से पूछा गया कि क्या कुछ विधायकों के विरोध और रुहुल्ला की बगावत को देखते हुए नेकां सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा कर पाएगी तो उन्होंने कहा कि जनादेश ने ही पार्टी को सत्ता में पहुंचाया है।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘आप पत्रकार हैं, जो इस देश का चौथा स्तंभ हैं। हमसे हर बात पूछने के बजाय, आपको खुद भी क्षेत्र में जाना चाहिए, गांवों और कस्बों में जाकर लोगों से बात करनी चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वे लोग खुद ही आपको बता देंगे कि कौन सही काम कर रहा है और कौन गलत; कौन अच्छा काम कर रहा है और कौन नहीं।’’ उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उमर अब्दुल्ला की सरकार इसलिए बनी क्योंकि लोगों ने नेकां को वोट देकर सत्ता में पहुंचाया। उन्होंने कहा, ‘‘ (सरकार को) कोई खतरा नहीं है।’’ उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए याद दिलाया कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के कुछ नेताओं ने दावा किया था कि पार्टी 50 से ज़्यादा सीट जीतेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा के जो नेता इस तरह के दावे कर रहे थे कि पार्टी 50 सीट का आंकड़ा पार कर लेगी, आज वे खुद ही हार गए हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘महत्वपूर्ण यह नहीं है कि मैं यहां क्या कहता हूं या चीजों को कितने सकारात्मक ढंग से पेश करता हूं। मायने यह रखता है कि लोग मुझे किस नजरिए से देखते हैं।’’ रुहुल्ला के रुख और पार्टी के भीतर कथित मतभेदों पर चौधरी ने उन्हें जम्मू-कश्मीर का एक प्रमुख नेता बताया। उन्होंने कहा कि रुहुल्ला ने जो कदम उठाया, वह उनका अपना फैसला है, जबकि जन प्रतिक्रिया उनकी अपनी पसंद है।

उन्होंने कहा कि पार्टी में सबसे छोटे कार्यकर्ता की बात सुनने और उनकी शिकायतों एवं सुझावों पर विचार करने की परंपरा रही है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर वे किसी कमी की ओर इशारा करते हैं, तो पार्टी नेतृत्व उसे दूर करने और सुधारने की कोशिश करेगा।’’ मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मतभेदों को सुलझाने की प्रक्रिया पर चौधरी ने कहा कि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व पर निर्भर करेगा, जिसमें नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (जो पार्टी के उपाध्यक्ष भी हैं) और अंत में पार्टी की कार्य समिति के सदस्य शामिल होंगे।

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