Tamil Nadu सरकार का बड़ा फैसला: दीपावली पर आतिशबाजी के लिए केवल 2 घंटे की अनुमति, सुबह 6-7 और शाम 7-8 बजे का समय तय

Tamil Nadu Diwali firecracker rules
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रेनू तिवारी । Nov 4 2026 12:07PM

चेन्नई, चार नवंबर तमिलनाडु सरकार ने आम लोगों को इस साल दीपावली के अवसर पर केवल सुबह छह से सात बजे तक और शाम सात से आठ बजे तक ही आतिशबाजी करने की अनुमति दी है। मंगलवार को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य प्रशासन ने गंभीर वायु एवं ध्वनि प्रदूषण को रोक

तमिलनाडु सरकार ने आगामी दीपावली के त्योहार को ध्यान में रखते हुए आम नागरिकों के लिए पटाखों और आतिशबाजी को लेकर महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं। राज्य प्रशासन द्वारा मंगलवार को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस साल दीपावली के अवसर पर केवल सुबह 6:00 बजे से 7:00 बजे तक और शाम 7:00 बजे से 8:00 बजे तक ही आतिशबाजी करने की अनुमति दी गई है। कुल मिलाकर नागरिकों को पटाखों के इस्तेमाल के लिए केवल दो घंटे की समयसीमा प्रदान की गई है। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य राज्य में वायु प्रदूषण तथा ध्वनि प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित रखना और एक सुरक्षित तथा सामूहिक उत्सव को बढ़ावा देना है।

विज्ञप्ति में पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सामूहिक जिम्मेदारी पर भी जोर दिया गया। विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘दीपावली रोशनी और पारिवारिक खुशियों का त्योहार है, जिसे प्रकृति के अनुकूल मनाया जाना चाहिए। हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि वे ध्वनि और वायु प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों के बजाय पर्यावरण के अनुकूल तरीके चुनकर इस दिन को मनाएं।’’ यह कदम भूमि, जल और वायु प्रदूषण को रोकने के साथ-साथ तेज ध्वनि से सुनने की क्षमता को पहुंचने वाले नुकसान जैसी गंभीर पर्यावरणीय और जन-स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने के प्रयासों के तहत उठाया गया है।

हाल के वर्षों में त्योहारों के दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में आने वाली भारी गिरावट को देखते हुए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था। सर्दियों के आगमन के साथ ही धुएं की परत जमने से सांस की तकलीफें बढ़ जाती हैं। सरकार के इस नियंत्रित कदम से न केवल पटाखों से होने वाले संभावित हादसों में कमी आएगी, बल्कि अस्पतालों पर आपातकालीन मामलों का दबाव भी कम होगा।

तमिलनाडु सरकार का यह फैसला परंपरा और आधुनिक पर्यावरणीय आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रोशनी के इस महापर्व को प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना मनाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है। नागरिकों का सहयोग ही इस नीति को सफल बनाएगा, जिससे पर्यावरण को संरक्षित रखते हुए दीपावली का उत्सव पूरी उमंग और सुरक्षा के साथ मनाया जा सके।

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