Thane Court ने 2011 के नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को सुनाई 10 साल की सजा

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महाराष्ट्र के ठाणे जिले में कल्याण की विशेष त्वरित अदालत ने 15 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म के मामले में आरोपी अजहर उर्फ बदू मुस्ताक कुरैशी को दोषी ठहराया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी. पी. मुले ने स्पष्ट किया कि घटना के समय पीड़िता के नाबालिग होने के कारण उसके धर्म परिवर्तन को स्वेच्छा से लिया गया फैसला नहीं माना जा सकता। अदालत ने पीड़िता को मुआवजा दिलाने के लिए मामला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने की भी सिफारिश की है।

ठाणे, आठ सितंबर महाराष्ट्र में ठाणे जिले के कल्याण की एक विशेष त्वरित अदालत ने 2011 में 15 वर्षीय लड़की से दुष्कर्म करने के मामले में एक व्यक्ति को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी. पी. मुले ने सोमवार को सुनाए फैसले में कहा कि पीड़िता ने आरोपी के साथ अपनी मर्जी से जाने के बाद इस्लाम धर्म अपना लिया था लेकिन उस समय वह नाबालिग थी इसलिए धर्म परिवर्तन को उसकी स्वेच्छा से लिया गया फैसला नहीं माना जा सकता। ठाणे जिले के डोंबिवली की रहने वाली पीड़िता अपनी मर्जी से आरोपी अजहर उर्फ बदू मुस्ताक कुरैशी (39) के साथ लखनऊ गई थी।

अदालत ने आरोपी को इसी आधार पर अपहरण के आरोप से बरी कर दिया। हालांकि, न्यायाधीश ने कहा कि अलग नाम से टिकट खरीदना यह दर्शाता है कि आरोपी ने ‘‘गलत मंशा के साथ पहले से ही साजिश रच ली थी।’’ अदालत ने कहा कि साक्ष्यों से पता चलता है कि आरोपी ने केवल पीड़िता के साथ ‘‘शारीरिक संबंध बनाने’’ के उद्देश्य से पहले ही यह साजिश रची थी। अदालत ने यह भी कहा कि पीड़िता ने जब इस्लाम धर्म अपनाया और आरोपी के साथ गई, उस समय वह नाबालिग थी।

अदालत ने कहा, ‘‘इसलिए धर्म परिवर्तन की रस्मों में पीड़िता की भागीदारी को स्वैच्छिक कृत्य नहीं कहा जा सकता।’’ अदालत ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध बनाने वाले व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 के तहत दुष्कर्म के अपराध के लिए दंडित किया जा सकता है, भले ही 15 से 18 वर्ष आयुवर्ग की पीड़िता उसकी पत्नी हो। अदालत ने कहा कि इसलिए आरोपी आईपीसी की धारा 375 के अपवाद-2 का सहारा लेकर अभियोजन से नहीं बच सकता। इस अपवाद के अनुसार किसी व्यक्ति का अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध बनाना दुष्कर्म नहीं माना जाएगा, जबकि पत्नी की उम्र 15 वर्ष से कम न हो।

अदालत ने आरोपी को पांच फरवरी से 12 सितंबर 2012 तक मुकदमे से पहले हिरासत में बिताई गई अवधि का लाभ देने का भी आदेश दिया। अदालत ने पीड़िता को मुआवजा देने के लिए मामला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पास भेजने की भी सिफारिश की। अतिरिक्त लोक अभियोजक सचिन कुलकर्णी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने पीड़िता समेत सात गवाहों से पूछताछ की।

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