चौबट्टाखाल से आसान नहीं सतपाल महाराज की राह, नाराज वोटर बढ़ा सकते हैं मुश्किलें

2016 में मुख्यमंत्री बनने की ख्वाहिश के लिए सतपाल महाराज कांग्रेस से भाजपा में आ गए। हालांकि यहां भी उन्हें मुख्यमंत्री का पद नहीं मिल सका। 2017 के चुनाव में सतपाल महाराज ने यहां से जीत तो हासिल की लेकिन मुख्यमंत्री नहीं बन पाए।
देश के पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं। इसी में एक राज्य उत्तराखंड भी है। उत्तराखंड के पौड़ी जिले में एक सीट है चौबट्टाखाल। उत्तराखंड 2022 के चुनाव में यह सीट काफी हॉट सीट बन रही है। इसका सबसे बड़ा कारण सतपाल महाराज का यहां से चुनावी मैदान में होना है। इस सीट के समीकरण में बदलाव हुए हैं। 2002 से लेकर 2012 तक इस सीट का ज्यादातर हिस्सा बीरोंखाल विधानसभा में शामिल था। बीरोंखाल सीट से 2002 और 2007 में सतपाल महाराज की पत्नी अमृता रावत लगातार विधायक रहीं। 2012 के परिसीमन के बाद चौबट्टाखाल पहली बार अस्तित्व में आया। यहां से भाजपा के तीरथ सिंह रावत पहले विधायक बने।
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2016 में मुख्यमंत्री बनने की ख्वाहिश के लिए सतपाल महाराज कांग्रेस से भाजपा में आ गए। हालांकि यहां भी उन्हें मुख्यमंत्री का पद नहीं मिल सका। 2017 के चुनाव में सतपाल महाराज ने यहां से जीत तो हासिल की लेकिन मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। इस सीट की बात करें तो यहां पूर्व सैनिकों की संख्या ज्यादा है। इसका मतलब साफ है कि यहां पूर्व सैनिक ज्यादा संख्या में मतदाता हैं। एक खबर के मुताबिक इस सीट पर लगभग 90885 मतदाता हैं। कांग्रेस ने पिछली बार नंबर दो पर रहे प्रत्याशी को बदलकर नए चेहरे पर दांव लगाया है और केसर सिंह नेगी को चुनावी मैदान में उतारा है।
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केसर सिंह को सतपाल महाराज के खिलाफ मजबूत प्रत्याशी माना जा रहा है। सतपाल महाराज एक राजनीतिक व्यक्ति होने के साथ-साथ धार्मिक संत की भी हैसियत रखते हैं। उनके कई भक्त तो उन्हें भगवान मानते हैं। उत्तराखंड की राजनीति में सतपाल महाराज भारी-भरकम माने जाते हैं। हालांकि इस बार उनके लिए कहीं ना कहीं चुनौतियां ज्यादा है। माना जा रहा है कि उनके क्षेत्र के लोग उनसे काफी नाराज हैं। लोगों का कहना है कि सतपाल महाराज भारी-भरकम मंत्रालयों में मंत्री रहे बावजूद इसके क्षेत्र की समस्याओं को अपने कद के अनुसार सुलझाने में कामयाब नहीं रहे।
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लोगों में सड़कों को लेकर भी नाराजगी है। इतना ही नहीं, कुछ जगह तो सतपाल महाराज के खिलाफ लोगों ने विरोध तक कर दिया था। आम आदमी पार्टी ने इस सीट पर दिग्मोहन सिंह नेगी को मैदान में उतारा है। दिग्मोहन सिंह नेगी सतपाल महाराज के छोटे भाई और हंस फाउंडेशन चलाने वाले भोले जी महाराज और मंगला भाई के भक्तों में शुमार माने जाते हैं। इससे क्षेत्र में हंस फाउंडेशन का भी दखल है। यही कारण है कि आम आदमी पार्टी ने एक बड़ा गांव इस सीट पर खेला है। लोगों की शिकायतें यह भी है कि इस क्षेत्र से तीरथ सिंह रावत और सतपाल महाराज दोनों आते हैं परंतु जहां अब भी पेयजल की समस्या है। रोजगार को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। क्षेत्र को चार धाम यात्रा सर्किट सेना जुर्माने का भी मलाल है।
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