भारत पर भड़के अमेरिकी सांसद, बोले- जब चीन ने हमला किया था तब पुतिन ने नहीं, हमने साथ दिया

भारत पर भड़के अमेरिकी सांसद, बोले- जब चीन ने हमला किया था तब पुतिन ने नहीं, हमने साथ दिया
प्रतिरूप फोटो

अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने कहा कि यूक्रेन मामले को लेकर भारत को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की निंदा करनी चाहिए और नयी दिल्ली को रूस या चीन से तेल नहीं खरीदना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि नयी दिल्ली यह सुनिश्चित करे कि वो किसके साथ है।

नयी दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लेकर अमेरिका भारत पर लगातार दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका चाहता है कि भारत रूस की आलोचना करे। इसके साथ ही अमेरिका को उम्मीद थी कि यूक्रेन मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत अपने सबसे बेहतरीन मित्र रूस का साथ नहीं देगा। लेकिन भारत का रुख़ अमेरिका की उम्मीदों से अलग रहा। इसी बीच भारतीय मूल की एक अमेरिकी सांसद का बयान सामने आया है जो भारत के रुख से भड़के हुए नजर आ रहे हैं। 

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अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने कहा कि यूक्रेन मामले को लेकर भारत को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की निंदा करनी चाहिए और नयी दिल्ली को रूस या चीन से तेल नहीं खरीदना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि नयी दिल्ली यह सुनिश्चित करे कि वो किसके साथ है।

अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि मैं वास्तव में नयी दिल्ली के बारे में स्पष्ट हूं और मुझे लगता है कि भारत को व्लादिमीर पुतिन की निंदा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को रूस या चीन से तेल नहीं खरीदना चाहिए। हमें व्लादिमीर पुतिन को अलग-थलग करने के लिए दुनिया को एकजुट करना चाहिए।

रो खन्ना भारत-अमेरिका कॉकस के उपाध्यक्ष भी हैं। इसके अलावा रो खन्ना अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में सिलिकन वैली का प्रतिनिधित्व करते हैं और रूस को लेकर भारत की वर्तमान नीति की आलोचना करते रहे हैं। 

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रो खन्ना ने कहा कि भारत को पहले संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए व्लादिमीर पुतिन की निंदा करनी चाहिए। इसके अलावा उन्हें अब एक पक्ष चुनना होगा। रो खन्ना ने कहा कि भारत पर जब चीन ने आक्रमण किया था उस वक्त अमेरिका उनके साथ था, व्लादिमीर पुतिन नहीं। यह वक्त उनके लिए अमेरिका से हथियार खरीदने का है ना की रूस से। हमें यह देखना होगा कि हम इसे कैसे आसान बनाएं। हमें अंततः चीन को नियंत्रित करने के लिए एक सहयोगी के रूप में भारत की आवश्यकता है।

आपको बता दें कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रूस से जुड़े प्रस्तावों पर दूरियां बनाई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस और यूक्रेन के राष्ट्रपतियों से कई बार बात कर चुके हैं। जिसमें उन्होंने दोनों नेतृत्व से तत्कार युद्धविराम और कूटनीतिक रास्ते पर लौटने की बात दोहराई है।





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