RJD में 'गिद्ध' कौन? Rohini Acharya के X पोस्ट से भूचाल, Tejashwi पर सीधा वार?

राजनीतिक दांव-पेच के बीच, आरजेडी और लालू प्रसाद परिवार से खुद को अलग कर चुकी रोहिणी आचार्य ने किसी का नाम लिए बिना, एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पार्टी नेतृत्व की तीखी आलोचना की। उन्होंने विपक्षी नेताओं की बैठक को दिखावा बताया और नेताओं से आत्मचिंतन और जवाबदेही पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।
शुक्रवार को बिहार की राजनीति में विरोधाभासी गतिविधियां देखने को मिलीं, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी 'समृद्धि यात्रा' शुरू की, वहीं विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने अपने आधिकारिक आवास पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की कोर कमेटी की बैठक बुलाई। राजनीतिक दांव-पेच के बीच, आरजेडी और लालू प्रसाद परिवार से खुद को अलग कर चुकी रोहिणी आचार्य ने किसी का नाम लिए बिना, एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पार्टी नेतृत्व की तीखी आलोचना की। उन्होंने विपक्षी नेताओं की बैठक को दिखावा बताया और नेताओं से आत्मचिंतन और जवाबदेही पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।
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रोहिणी आचार्य ने लिखा कि समीक्षा का दिखावा करने से ज्यादा जरूरी 'खुद' आत्म - मंथन ' करने और जिम्मेदारी लेने की है , 'अपने' इर्द - गिर्द कब्ज़ा जमाए बैठे चिन्हित 'गिद्धों' को ठिकाने लगाने का साहस दिखाने के बाद ही किसी भी प्रकार की समीक्षा की सार्थकता साबित होगी... बाकी तो ये जो पब्लिक है न , वो सब जानती - समझती ही है ..। इससे पहले सोशल मीडिया पर एक कड़े शब्दों वाले पोस्ट में उन्होंने लिखा कि किसी "महान विरासत" को नष्ट करने के लिए बाहरी लोगों की ज़रूरत नहीं है, अपने ही लोग काफी हैं। उनके शब्दों से संकेत मिलता है कि अहंकार और गलत सलाह परिवार के कुछ सदस्यों को उस पहचान को मिटाने के लिए प्रेरित कर रही है जिसने उन्हें पहचान दिलाई।
रोहिणी आचार्य ने एक्स पर लिखा कि बड़ी शिद्दत से बनायी और खड़ी की गयी "बड़ी विरासत" को तहस - नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती, अपने और अपनों के चंद षड्यंत्रकारी "नए बने अपने" ही काफी होते हैं। हैरानी तो तब होती है , जब "जिसकी" वजह से पहचान होती है , जिसकी वजह से वजूद होता है , उस पहचान, उस वजूद के निशान को बहकावे में आ कर मिटाने और हटाने पर "अपने" ही आमादा हो जाते हैं।
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आचार्य ने कहा कि जब विवेक पर पर्दा पड़ जाता है, अहंकार सिर पर चढ़ जाता है। तब "विनाशक" ही आँख - नाक और कान बन बुद्धि - विवेक हर लेता है। आरजेडी को चुनावी क्षेत्र में मिली करारी हार के बाद यह विवाद सामने आया है। बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने भारी बहुमत से जीत हासिल की, जबकि आरजेडी 140 से अधिक सीटों में से केवल 25 सीटें ही जीत पाई। भाजपा और जेडीयू को क्रमशः 89 और 85 सीटें मिलीं, वहीं एनडीए गठबंधन ने 243 सदस्यीय विधानसभा में 200 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया।
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