उद्योग के साथ-साथ जेआरडी टाटा ने सामाजिक दायित्वों को भी बखूबी निभाया

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टाटा समूह ने जेआरडी के कुशल नेतृत्व में आठ घंटे का कार्यदिवस, निःशुल्क चिकित्सा सहायता, कर्मचारी भविष्य निधि योजना और कामगार दुर्घटना मुआवजा योजना जैसी सामाजिक दायित्व वाली कई योजनाओं को देश में पहली बार शुरू किया।

भारतीय उद्योग जगत के प्रमुख स्तंभ जेआरडी टाटा बहुमुखी प्रतिभा के धनी उद्यमी थे तथा भारतीय कंपनी जगत में उन्हें कारपोरेट गवर्नेंस और सामाजिक दायित्व की परिकल्पनाओं को पहली बार लागू करने वाले उद्योगपति के रूप में जाना जाता है। जेआरडी के नाम से मशहूर जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा ने न केवल टाटा समूह को अपने कुशल नेतृत्व में देश में अग्रणी उद्योग घराने में तब्दील कर दिया बल्कि उन्होंने कर्मचारियों के कल्याण के उद्देश्य से कई ऐसी योजनाएं शुरू कीं जिन्हें बाद में भारत सरकार ने कानूनी मान्यता देते हुए अपना लिया।

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टाटा समूह ने जेआरडी के कुशल नेतृत्व में आठ घंटे का कार्यदिवस, निःशुल्क चिकित्सा सहायता, कर्मचारी भविष्य निधि योजना और कामगार दुर्घटना मुआवजा योजना जैसी सामाजिक दायित्व वाली कई योजनाओं को देश में पहली बार शुरू किया। जेआरडी टाटा का भारतीय उद्योग जगत में महज इसलिए सम्मान नहीं किया जाता कि उन्होंने टाटा समूह जैसे बड़े उद्योग घराने का कई दशकों तक नेतृत्व किया था बल्कि उन्हें भारतीय कंपनी जगत में पहली कापरेरेट गवर्नेंस और सामाजिक विकास की योजनाएं भी पहली बार शुरू करने के लिए याद किया जाता है।

जेआरडी एक उद्यमी के रूप में भी प्रतिभा संपन्न व्यक्ति थे जिनकी सोच अपने समय से बहुत आगे की थी। उनके इस नजरिए से न केवल टाटा समूह बल्कि भारतीय उद्योग जगत को भी काफी लाभ मिला। जेआरडी का जन्म 29 जुलाई 1904 को फ्रांस में हुआ। उनके पिता पारसी और मां फ्रांसीसी थीं। जेआरडी के पिता और जमशेदजी टाटा एक ही खानदान के थे। जेआरडी ने फ्रांस, जापान और इंग्लैंड में शिक्षा ग्रहण की और फ्रांसीसी सेना में एक वर्ष का अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण लिया। वह सेना में बने रहना चाहते थे लेकिन अपने पिता की इच्छा के कारण उन्हें यह काम छोड़ना पड़ा। उन्होंने वर्ष 1925 में बिना वेतन वाले प्रशिक्षु के रूप में टाटा एंड सन में काम शुरू किया। उनके व्यक्तित्व का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू विमानन था। उन्हें देश का पहला पायलट होने का भी गौरव प्राप्त है।

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उन्होंने टाटा एयरलाइंस बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जो बाद में एयर इंडिया बनी। उन्होंने विमान उड़ाने के शौक को 1932 में टाटा एविएशन सर्विस कायम कर पूरा किया। उन्होंने 1948 में एयर इंडिया इंटरनेशनल की भारत की पहली अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन की शुरुआत की। 1953 में भारत सरकार ने जेआरडी को एयर इंडिया का अध्यक्ष बनाया तथा वह 25 साल तक इंडियन एयरलाइंस के निदेशक मंडल के सदस्य रहे। महज 34 वर्ष की उम्र में जेआरडी टाटा एंड संस के अध्यक्ष चुने गये। उनके नेतृत्व में समूह ने 14 उद्यम शुरू किए और 26 जुलाई 1988 को जब वह इस जिम्मेदारी से मुक्त हुए तो टाटा समूह 95 उद्यमों का गठजोड़ बन चुका था।

कर्मचारियों के हितों का बेहद ध्यान रखने वाले जेआरडी के नेतृत्व में टाटा स्टील ने एक नई परिकल्पना शुरू की। इसके तहत कंपनी का कर्मचारी जैसे ही काम के लिए अपने घर से निकलता है, उसे कामगार मान लिया जाता। यदि कार्यस्थल आते−जाते समय कामगार के साथ कोई दुर्घटना होती है तो कंपनी इसके लिए वित्तीय रूप से जिम्मेदार होगी। जेआरडी को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने उन्हें 1957 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया। बाद में 1992 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। भारत के इस विख्यात उद्योगपति का 29 नवंबर 1993 को जिनेवा के एक अस्पताल में निधन हो गया।

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