Gautam Adani ने की जबरदस्त वापसी! Mukesh Ambani को पछाड़ कर फिर बने नंबर-1, India में अमीरों की संख्या भी बढ़ी

Gautam Adani
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भारत के सबसे अमीर परिवारों की तस्वीर भी बदल रही है। एलएन मित्तल परिवार 93 प्रतिशत की छलांग के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गया है और उसकी संपत्ति 3.39 लाख करोड़ रुपये हो गई है। अनिल अग्रवाल परिवार 87 प्रतिशत वृद्धि के साथ नौवें स्थान पर आया है।

भारत के कारोबारी जगत में एक बार फिर बड़ा उलटफेर हुआ है। एम3एम हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026 ने गौतम अडानी और उनके परिवार को देश के सबसे अमीर परिवार के रूप में फिर से नंबर एक पर पहुंचा दिया है। अडानी परिवार की कुल संपत्ति अब 9.23 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि पिछले साल शीर्ष स्थान पर रहे मुकेश अंबानी और उनका परिवार 8.63 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ दूसरे स्थान पर है। यानी अडानी परिवार ने 59,400 करोड़ रुपये की बढ़त के साथ पहला स्थान हासिल किया है।

यह वापसी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के दिनों में अडानी समूह और स्वयं गौतम अडानी को लेकर कई विवाद खड़े किये गये थे। लेकिन विवादों से सफलतापूर्वक बाहर आते हुए अडानी की कारोबारी ताकत और उनके समूह से जुड़ी संपत्ति में फिर उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। एक साल में अडानी परिवार की संपत्ति 13 प्रतिशत बढ़ी, जबकि अंबानी परिवार की संपत्ति में 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

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लेकिन इस कहानी की अहमियत सिर्फ इतनी नहीं है कि गौतम अडानी फिर से नंबर एक अमीर बन गए हैं। हुरुन की रिपोर्ट भारत में तेजी से बढ़ती संपत्ति की भी बड़ी तस्वीर दिखाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अब 391 ऐसे अरबपति हैं जिनकी संपत्ति अमेरिकी डॉलर में एक अरब डॉलर या उससे ज्यादा है। पांच साल पहले ऐसे अरबपतियों की संख्या 237 थी। वहीं, कम से कम 1,000 करोड़ रुपये की संपत्ति रखने वाले भारतीयों की संख्या बढ़कर 1,810 हो गई है। इन सभी की कुल संपत्ति 187.5 लाख करोड़ रुपये है, जो भारत की अर्थव्यवस्था के आकार के करीब आधे के बराबर है। यानी भारत में सिर्फ अरबपतियों की संख्या ही नहीं बढ़ रही, बल्कि देश में बड़े पैमाने पर नई संपत्ति भी तैयार हो रही है।

खास बात यह है कि यह संपत्ति वृद्धि ऐसे समय हुई जब शेयर बाजार में कमजोरी रही। इस अवधि में सूची में शामिल कुल संपत्ति 12.8 प्रतिशत बढ़ी, जबकि निफ्टी 50 में 3.9 प्रतिशत और सेंसेक्स में 5.8 प्रतिशत की गिरावट आई। इसका अर्थ यह है कि अमीरी की इस तस्वीर को केवल शेयर बाजार की तेजी से समझना गलत होगा। कारोबार में हिस्सेदारी, कंपनियों का मूल्यांकन, ऑर्डर बुक, उत्पादन क्षमता, बुनियादी ढांचे में निवेश और निर्यात मांग जैसे कारक इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

उधर, अडानी की वापसी इसी बदलते आर्थिक परिदृश्य से जुड़ी दिखाई देती है। हुरुन के मुताबिक एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र की संपत्ति में 69 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हरित ऊर्जा और औद्योगिक उत्पादों में 31-31 प्रतिशत, धातु एवं खनन में 30 प्रतिशत, औषधि क्षेत्र में 25 प्रतिशत और वित्तीय सेवाओं में 23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हुरुन के संस्थापक और मुख्य शोधकर्ता अनस रहमान जुनैद ने ऑर्डर बुक, बुनियादी ढांचे में निवेश, विनिर्माण क्षमता और निर्यात मांग को संपत्ति निर्माण के महत्वपूर्ण इंजन बताया है। बुनियादी ढांचा, ऊर्जा, औद्योगिक गतिविधियां, हरित ऊर्जा और अन्य बड़े पूंजीगत क्षेत्रों में निवेश उस व्यापक आर्थिक बदलाव से जुड़े हैं जिसे हुरुन ने इस सूची में दर्ज किया है। देखा जाये तो विकसित भारत के निर्माण की चर्चा में बुनियादी ढांचा, ऊर्जा सुरक्षा, विनिर्माण क्षमता, रक्षा उत्पादन और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्र केंद्रीय भूमिका रखते हैं।

इस बीच भारत के सबसे अमीर परिवारों की तस्वीर भी बदल रही है। एलएन मित्तल परिवार 93 प्रतिशत की छलांग के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गया है और उसकी संपत्ति 3.39 लाख करोड़ रुपये हो गई है। अनिल अग्रवाल परिवार 87 प्रतिशत वृद्धि के साथ नौवें स्थान पर आया है, जबकि टॉरेंट फार्मास्यूटिकल्स से जुड़े समीर मेहता परिवार ने 52 प्रतिशत वृद्धि के बाद शीर्ष दस में जगह बनाई है।

एक और बड़ा बदलाव यह है कि भारत की नई संपत्ति तेजी से तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रक्षा, सेमीकंडक्टर और हरित ऊर्जा से पैदा हो रही है। पहली बार कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अलग संपत्ति-सृजन क्षेत्र के रूप में दर्ज किया गया है। इस क्षेत्र से जुड़े 19 लोग सूची में हैं, जिनकी संयुक्त संपत्ति 3.07 लाख करोड़ रुपये है। एआई, एयरोस्पेस एवं रक्षा और सेमीकंडक्टर क्षेत्र मिलकर 48 लोगों की 4.26 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं।

साथ ही भारत में औद्योगिक उत्पाद क्षेत्र सबसे बड़ा क्षेत्र बना हुआ है, जिसमें 166 नाम हैं। इसी क्षेत्र से 44 नए लोग सूची में आए। यह संकेत है कि भारत में संपत्ति निर्माण की कहानी केवल उपभोक्ता बाजार की नहीं, बल्कि कारखानों, उत्पादन, बुनियादी ढांचे, रक्षा, ऊर्जा और तकनीक की भी बन रही है। दूसरी तरफ उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं, खाद्य एवं पेय, उपभोक्ता वस्तुओं और खुदरा जैसे क्षेत्रों में संपत्ति में गिरावट दर्ज हुई।

सबसे खास बात यह है कि भारत में नई संपत्ति का बड़ा हिस्सा अब लोग अपनी मेहनत और कारोबार के दम पर खड़ा कर रहे हैं। हुरुन की सूची में शामिल 1,266 उद्यमी यानी करीब 70 प्रतिशत लोग स्वनिर्मित हैं। पांच साल पहले यह आंकड़ा 55 प्रतिशत था। यानी अब पहले से कहीं ज्यादा भारतीय अपने दम पर कारोबार खड़ा कर रहे हैं और बड़ी संपत्ति बना रहे हैं।

वहीं गौतम अडानी का फिर नंबर एक बनना इसी बड़ी आर्थिक कहानी का एक प्रमुख अध्याय है। 2022 में अडानी और अंबानी परिवारों की संयुक्त संपत्ति बाकी शीर्ष आठ परिवारों से 5.84 लाख करोड़ रुपये अधिक थी। 2026 में तस्वीर उलट गई है। दोनों की संयुक्त संपत्ति 17.86 लाख करोड़ रुपये है, जबकि बाकी आठ की कुल संपत्ति 21.15 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। यानी भारत की संपत्ति अब धीरे-धीरे शीर्ष दो परिवारों से आगे भी फैल रही है।

फिर भी अडानी की नंबर एक पर वापसी का संदेश साफ है। आलोचनाओं, बाजार के उतार-चढ़ाव और कारोबारी चुनौतियों के बीच उनकी संपत्ति में 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई और वह फिर भारत के सबसे अमीर परिवार के शीर्ष स्थान पर पहुंच गए।

बहरहाल, भारत की अर्थव्यवस्था जिस दिशा में बढ़ रही है, उसमें बुनियादी ढांचा, विनिर्माण, ऊर्जा, रक्षा, हरित ऊर्जा और नई तकनीक निर्णायक होते जा रहे हैं। अडानी की कारोबारी उपस्थिति इन क्षेत्रों के बड़े हिस्से में है। इसलिए उनकी वापसी सिर्फ अमीरी की सूची में नंबर बदलने की घटना नहीं, बल्कि भारत में पूंजी और संपत्ति निर्माण के बदलते केंद्रों की एक तस्वीर भी है। विकसित भारत की महत्वाकांक्षा को जमीन पर उतारने के लिए जिन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत है, उनमें निजी क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है और अडानी समूह की गतिविधियां इसी व्यापक निवेश चक्र का एक हिस्सा हैं।

-नीरज कुमार दुबे

(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
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