लेकिन शहरी माओवाद पर कैसे लगे लगाम
मोदी सरकार के बाद राष्ट्रवादी विचारधारा को उम्मीद थी कि सत्ता केंद्रों और संस्थानों से इस विचारधारा की विदाई हो जाएगी। लेकिन अब भी यह विचारधारा प्रभावी तौर पर उपस्थित है। इस विचारधारा के कतिपय क्रांतिकारियों ने तो अब चोला तक बदल लिया है और मौजूदा सत्ता तंत्र में भागीदार भी बन चुके हैं।



























































