Teenager Parenting Tips: बच्चे के पलटकर जवाब देने से हैं परेशान? डांटने से पहले जान लें ये बात

Teenager parenting tips
CANVA PRO
एकता । Oct 23 2026 4:39PM

टीनएज में बच्चों का चिड़चिड़ाना या पलटकर जवाब देना आम बात है, इसलिए उन पर तुरंत गुस्सा करने के बजाय शांत रहें। माता-पिता को बच्चे की बात ध्यान से सुनकर उसके व्यवहार की वजह समझनी चाहिए। साथ ही, सम्मानजनक बातचीत के स्पष्ट नियम तय करके और अच्छे व्यवहार की तारीफ करके उनकी आदत सुधारी जा सकती है।

टीनएज ऐसा दौर होता है, जब बच्चों के शरीर और दिमाग में तेजी से कई बदलाव होते हैं। इन बदलावों का असर उनके व्यवहार पर भी पड़ सकता है। इस उम्र में चिड़चिड़ापन, बात-बात पर पलटकर जवाब देना या बहस करना आम बात हो सकती है। कई बार माता-पिता बच्चे के इस व्यवहार से परेशान होकर उन्हें डांटने या सजा देने लगते हैं। हालांकि, गुस्से में प्रतिक्रिया देने से स्थिति और बिगड़ सकती है। ऐसे में जरूरत है कि बच्चे के व्यवहार को समझने की कोशिश की जाए। आइए जानते हैं कि बिना गुस्सा किए आप अपने टीनएज बच्चे की इस आदत को कैसे सुधार सकते हैं।

पहले बच्चे के व्यवहार की वजह समझें

जब टीनएज बच्चा पलटकर जवाब देता है, तो हर बार इसके पीछे माता-पिता का अनादर करने की मंशा नहीं होती। इस उम्र में बच्चे अपनी अलग पहचान बनाना, अपनी बात रखना और खुद फैसले लेना चाहते हैं। इसलिए उनके व्यवहार के पीछे की वजह समझने की कोशिश करें। इससे आपको गुस्सा कम आएगा और बच्चे के साथ आपका रिश्ता भी बेहतर हो सकता है।

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बच्चे के जवाब पर तुरंत गुस्सा न करें

जब बच्चा उल्टा जवाब देता है, तो तुरंत गुस्सा करना या उसे डांटना स्वाभाविक प्रतिक्रिया हो सकती है। लेकिन इससे बात और बढ़ सकती है। माता-पिता के गुस्सा करने पर बच्चा भी गुस्से में और ज्यादा पलटकर जवाब दे सकता है। इसलिए ऐसी स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ देर रुकें और खुद को शांत करें। इसके बाद बच्चे से शांति से बात करें और अपनी बात समझाएं।
बच्चे की बात भी ध्यान से सुनें

अक्सर माता-पिता बच्चे की पूरी बात सुने बिना ही उसे गलत ठहरा देते हैं। बच्चे को अपनी बात रखने का पूरा मौका दें। कई बार बच्चे इसलिए बहस करते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी बात कोई सुन ही नहीं रहा है। जब बच्चा अपनी बात बता रहा हो, तो बीच में रोकने के बजाय पहले उसकी बात समझने की कोशिश करें। इसके बाद अपनी बात रखें। इससे बच्चे को यह महसूस होगा कि उसकी बात को भी महत्व दिया जा रहा है।

बच्चे के साथ कुछ साफ नियम तय करें

बच्चे को यह समझाना जरूरी है कि अपनी बात रखना गलत नहीं है, लेकिन बदतमीजी करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। जब माहौल शांत हो, तब बच्चे के साथ बैठकर कुछ साफ नियम तय करें।

उसे समझाएं कि किसी बात से असहमत होना बिल्कुल गलत नहीं है, लेकिन अपनी बात कहते समय सही शब्दों और सम्मानजनक लहजे का इस्तेमाल करना जरूरी है। इससे बच्चे को अपनी बात रखने और दूसरों का सम्मान करने के बीच का फर्क समझने में मदद मिलेगी।

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अच्छे व्यवहार की भी तारीफ करें

जब आपका बच्चा बिना बहस किए आपकी बात मानता है या अपनी असहमति भी ठीक तरीके से रखता है, तो उसके इस व्यवहार की तारीफ जरूर करें। माता-पिता अक्सर बच्चों की गलतियां और कमियां तो तुरंत पकड़ लेते हैं, लेकिन उनके अच्छे व्यवहार की सराहना करना भूल जाते हैं। बच्चे के अच्छे व्यवहार को पहचानकर उसकी तारीफ करने से उसे सकारात्मक तरीके से अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है।

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