एशियाई पैरा खेलों के स्वर्ण पदक विजेता Neeraj Yadav ने की आत्महत्या, पुलिस जांच में जुटी

एशियाई पैरा खेलों के स्वर्ण पदक विजेता Neeraj Yadav ने की आत्महत्या, पुलिस जांच में जुटी
प्रतिरूप फोटो
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एशियाई पैरा खेलों के पूर्व चैंपियन नीरज यादव का शव दिल्ली में उनकी कार के पास संदिग्ध हालत में मिलने के बाद अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया। डोपिंग मामले में निलंबन और पदकों के छिन जाने के बाद वह लंबे समय से भारी मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। पुलिस इस मामले में जाफराबाद थाने में जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।

एशियाई पैरा खेलों के स्वर्ण पदक विजेता नीरज यादव ने कथित तौर पर अपने घर पर जहर खाकर आत्महत्या कर ली है। बताया जा रहा है कि डोपिंग के लिए निलंबित किए जाने के कारण आइची-नागोया एशियाई पैरा खेलों में भाग नहीं ले पाने और एक महिला के साथ उनकी दोस्ती टूटने के बाद वह भावनात्मक तनाव में थे। बुधवार को उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए दिल्ली के जीटीबी अस्पताल ले जाया गया।

उनके आत्महत्या करने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। भारतीय पैरा-एथलेटिक्स टीम के मुख्य कोच एस सत्यनारायण ने कहा कि 2023 के हांगझोउ एशियाई पैरा खेलों के बाद डोपिंग मामला सामने आने के बाद से वह यादव के संपर्क में थे। सत्यनारायण ने पीटीआई से कहा, ‘‘नीरज ने आत्महत्या कर ली है।

यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मेरे उनसे घनिष्ठ संबंध थे। डोपिंग मामले में उनका नाम आने के बाद से मैं लगातार उनके संपर्क में था।’’ जाफराबाद पुलिस स्टेशन इस मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 194 के तहत जांच कर रहा है।

यादव को अस्पताल ले जाने वाली महिला ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि दिसंबर 2025 से उसकी यादव के साथ ‘दोस्ती’ थी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि महिला मंगलवार को यादव से मिलने के लिए हरियाणा के सोनीपत गई थी और उसने यादव से कहा था कि वह ‘अब उसके संपर्क में नहीं रह सकती है।’ उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद यादव ने महिला को अपनी स्कॉर्पियो में बिठाकर दिल्ली के मौजपुर में छोड़ दिया। रात करीब नौ बजे महिला को शक हुआ और वह मौजपुर मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर एक के पास पहुंची, जहां उसने यादव को अपनी कार की बगल में सड़क पर पड़ा पाया।

वह उन्हें अस्पताल ले गई, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।’’ यादव सोनीपत में अंशनीर स्पोर्ट्स अकादमी के नाम से एक ऑनलाइन खेल अकादमी चला रहे थे। वह विवाहित थे और उनके परिवार में उनकी पत्नी और तीन साल की बेटी हैं। नीरज को सात साल की उम्र में पोलियो हो गया था।

उन्होंने पहले व्हीलचेयर टेनिस खेलना शुरू किया और फिर पैरा एथलेटिक्स में हाथ आजमाए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। एफ55 वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने वाले 42 वर्षीय यादव प्रतिबंधित पदार्थ के सेवन के लिए दोषी पाए जाने के बाद चार साल का निलंबन झेल रहे थे। यादव ने एशियाई पैरा खेलों में तीन स्वर्ण पदक जीते।

उन्होंने 2018 में जकार्ता में भाला फेंक में खिताब तथा 2023 में हांगझोउ में भाला फेंक और चक्का फेंक में स्वर्ण पदक जीता था। बाद में 2023 में जीते गए उनके दोनों स्वर्ण पदक छीन लिए गए थे। इस कारण उन्हें सरकार से मिलने वाली पुरस्कार राशि और सरकारी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा था।

सत्यनारायण ने कहा, ‘‘डोपिंग मामले के बाद वह काफी तनाव में थे। उन्हें चार साल के लिए निलंबित किया गया था। कुछ महीने पहले उन्होंने मुझसे पूछा था कि क्या वह आइची-नागोया एशियाई पैरा खेलों के चयन ट्रायल्स में भाग ले सकते हैं।

मैंने उनसे कहा कि यह संभव नहीं है क्योंकि उनके निलंबन की अवधि अभी पूरी नहीं हुई है।’’ कोच ने कहा कि डोपिंग मामले ने यादव के करियर को करारा झटका लगा और इससे उनकी आर्थिक स्थिति भी कमजोर हो गई। उन्होंने कहा, ‘‘जब उन्होंने हांगझोउ एशियाई पैरा खेलों में दो स्वर्ण पदक जीते तो उन्हें उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी मिलने वाली थी, जिससे उनका जीवन बेहतर हो सकता था। उन्हें तीन करोड़ रुपये से अधिक की पुरस्कार राशि भी मिलने वाली थी।

उनके सभी साथियों को नौकरी मिल चुकी है।’’ सत्यनारायण ने बताया कि निलंबन की प्रक्रिया राष्ट्रीय डोपिंगरोधी एजेंसी (नाडा) से शुरू हुई। इसके बाद रिपोर्ट को विश्व डोपिंगरोधी एजेंसी (वाडा) को भेजा गया और फिर एशियाई पैरालंपिक समिति ने उनके पदक छीन लिए। सत्यनारायण ने यादव की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उनके आत्महत्या करने के सटीक कारणों की जानकारी नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं सटीक कारण नहीं बता सकता, लेकिन वह कई कारणों से अवसाद में थे। वह दो स्वर्ण पदक खोने से सदमे में थे। पुरस्कार राशि और नौकरी नहीं मिलना दो अन्य कारण थे।’’ सत्यनारायण ने कहा, ‘‘उन्होंने निश्चित रूप से जहर खाया है, लेकिन उन्होंने कौन सा पदार्थ लिया है, यह पोस्टमार्टम के बाद ही पता चलेगा।

लेकिन यह पक्का है कि उन्होंने जहर खाया। उनके शरीर का रंग भी कुछ बदल गया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे समझ नहीं आता कि उन्होंने यह कड़ा कदम क्यों उठाया, जबकि पैरा-एथलीटों के लिए आजीविका कमाने के इतने सारे विकल्प हैं। वह कोच बन सकते थे।

40 साल पहले की तुलना में अब पैरा खिलाड़ियों के लिए हालात काफी बदल गए हैं। उन्हें 2018 में जकार्ता में हुए एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के लिए अच्छी खासी पुरस्कार राशि भी मिली थी।’’ एफ55 वर्ग में शॉट पुट, चक्का फेंक और भाला फेंक सहित बैठकर की जाने वाली खेल स्पर्धाएं शामिल हैं।

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