मुक्केबाज पूजा रानी तोक्यो ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में, इचरक चाएब को 5-0 से हराया

दो बार की एशियाई चैम्पियन दाहिने हाथ के सीधे दमदार मुक्कों से नियंत्रण बनाये हुए थीं और उन्हें चाएब के रिंग में संतुलन की कमी का भी काफी फायदा मिला।
तीनों राउंड में रानी का दबदबा रहा जबकि चाएब भी अपना पहला ओलंपिक खेल रही थीं लेकिन वह मुक्के सही जगह नहीं जड़ पा रही थीं। रानी ने विपक्षी से दूरी बनाकर चतुराई भरा प्रदर्शन किया। रानी ने पूरी बाउट के दौरान जवाबी हमले किये जबकि चाएब भी दमदार मुक्के लगाने का प्रयास कर रही थीं लेकिन वे अपने लक्ष्य से चूकते रहे। रानी का ओलंपिक का सफर काफी मुश्किलों से भरा रहा है। वह कंधे की चोट से जूझती रहीं जिससे उनका करियर खत्म होने का भी डर बना हुआ था, उनका हाथ भी जल गया था।#TokyoOlympics: Indian boxer Pooja Rani defeats Ichrak Chaib of Algeria 5-0 in women's middleweight (69-75kg) Round of 16 clash pic.twitter.com/88b7NVfJlZ
— ANI (@ANI) July 28, 2021
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वित्तीय सहयोग की कमी के बावजूद वह यहां तक पहुंची हैं। उनके पिता पुलिस अधिकारी हैं जो उन्हें इस खेल में नहीं आने देना चाहते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि मुक्केबाजी आक्रामक लोगों के लिये ही है। उन्होंने साक्षात्कार में कहा था, ‘‘मार लग जायेगी। मेरे पिता ने यही कहा था। उन्होंने कहा था कि यह खेल मेरे लिये नहीं है क्योंकि उन्हें लगता था कि मुक्केबाजी केवल आक्रामक (गुस्सैल) लोग ही करते हैं।
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