Harmanpreet Kaur ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तानी छोड़ी, तीनों प्रारूपों से इस्तीफा

अनुभवी क्रिकेटर हरमनप्रीत कौर ने बीसीसीआई समीक्षा बैठक के बाद भारतीय महिला टीम के तीनों प्रारूपों की कप्तानी छोड़ दी है। उन्होंने साफ किया कि वह देश के लिए एक खिलाड़ी के तौर पर तीनों फॉर्मेट में खेलती रहेंगी। उनकी जगह उपकप्तान स्मृति मंधाना को नई कमान मिलने की संभावना जताई जा रही है।
(फाइल तस्वीरों के साथ) नयी दिल्ली, छह अक्टूबर भारत की एकमात्र विश्व कप विजेता महिला क्रिकेट कप्तान हरमनप्रीत कौर ने मंगलवार को तीनों प्रारूपों की कप्तानी से इस्तीफा देते हुए कहा कि बतौर कप्तान उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह निभाई है और अब वह “एक बार फिर सिर्फ खेल के प्यार और जुनून के लिए खेलने को तैयार हैं।” सैतीस वर्षीय हरमनप्रीत का यह फैसला गुवाहाटी में हुई बीसीसीआई की समीक्षा बैठक के बाद आया, जिसमें पिछले कुछ महीनों में टीम के प्रदर्शन और उसकी आगे की दिशा का आकलन किया गया। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में हरमनप्रीत के अलावा उपकप्तान स्मृति मंधाना और मुख्य कोच अमोल मजूमदार भी शामिल हुए। हाल के दिनों में भारतीय महिला टीम की कप्तानी करने की अपनी इच्छा खुलकर जाहिर करने वाली स्मृति मंधाना अगली कप्तान बनने की दौड़ में सबसे आगे मानी जा रही हैं।
कुछ समय से खराब फॉर्म से जूझ रहीं हरमनप्रीत ने इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘‘ मैं आज भारतीय महिला क्रिकेट टीम के तीनों प्रारूपों की कप्तानी से हट रही हूं।’’ उन्होंने कहा, “यह फैसला आसान नहीं है। इसके साथ वर्षों की यादें, भावनाएं, त्याग और ऐसे अनगिनत पल जुड़े हैं, जो जीवन भर मेरे साथ रहेंगे।” हरमनप्रीत ने यह भावुक संदेश इंस्टाग्राम पर साझा किया। इसके साथ उन्होंने ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान की ओर मुंह करके खड़े अपनी तस्वीर भी पोस्ट की।
इससे पहले हरमनप्रीत ने कम से कम 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक तक टीम की कप्तानी करने की इच्छा जताई थी। भारत इन खेलों के लिए पहले ही क्वालीफाई कर चुका है। हरमनप्रीत ने 2016 में भारतीय टी20 टीम की कप्तानी संभाली थी और करीब एक दशक तक इस जिम्मेदारी को निभाया।
2022 में उन्हें वनडे टीम की कप्तानी सौंपी गई और 2023 में वह तीनों प्रारूपों की कप्तान बन गईं। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि मैंने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी है। मैंने इस टीम को अपना सब कुछ दिया।
मैंने इस जिम्मेदारी को सम्मान के साथ निभाया और भारतीय महिला क्रिकेट का नेतृत्व करने का अवसर मिलने के लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगी।” हरमनप्रीत हालांकि तीनों प्रारूपों में भारत के लिए खेलना जारी रखेंगी। उन्होंने कहा, “अब मेरे लिए नया अध्याय शुरू करने का समय है। कप्तानी आज खत्म हो सकती है, लेकिन भारतीय क्रिकेट के लिए मेरा प्यार कभी खत्म नहीं होगा।
मैंने अपना खून, पसीना, त्याग और सम्मान सब कुछ इस टीम को दिया है। मैं अब फिर से सिर्फ खेल के प्यार के लिए खेलने को तैयार हूं। कप्तानी का अंत हुआ है, सफर जारी है।” अपने भावुक बयान में अनुभवी बल्लेबाज ने कहा कि कप्तान के रूप में उन्होंने टीम को अपना सब कुछ दिया और कई बार अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को पीछे रखकर टीम की जरूरतों को प्राथमिकता दी।
उन्होंने लिखा, ‘‘मैंने अपना खून, पसीना, समय और कई बार अपने खेल तथा व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं का एक हिस्सा भी टीम को दिया। ऐसे कई मौके आए जब मुझे अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन, अपने विकास और अपनी इच्छाओं को पीछे रखना पड़ा, क्योंकि मेरा मानना था कि टीम सबसे पहले होनी चाहिए।” हरमनप्रीत को भारत की महानतम क्रिकेटरों में शुमार किया जाता है। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने पिछले साल पहली बार वनडे विश्व कप जीता था।
हाल ही में टीम ने एशियाई खेलों के टी20 प्रारूप में लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक भी हासिल किया। इसके अलावा हरमनप्रीत की अगुआई में भारत ने 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता था। उन्होंने पांच टेस्ट, 51 वनडे और 155 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत की कप्तानी की।
उन्होंने कहा, “एक कप्तान के रूप में मुझे कई कठिन फैसले लेने पड़े। ऐसे फैसले जिन्हें हमेशा समझा नहीं गया, जो हमेशा आसान नहीं थे और कभी-कभी जिनकी व्यक्तिगत कीमत भी चुकानी पड़ी।” उन्होंने आगे कहा, “मेरा हर फैसला टीम को बेहतर बनाने के प्रेरित था। इसमें अन्य खिलाड़ियों को आगे बढ़ने, खुद पर विश्वास करने और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना शामिल है।’’ इस साल की शुरुआत में भारत के टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह नहीं बना पाने और बल्ले से खासकर टी20 प्रारूप में हरमनप्रीत के अपेक्षाकृत निराशाजनक प्रदर्शन के बाद उनकी कप्तानी को लेकर आलोचना बढ़ने लगी थी।
पूर्व खिलाड़ी डायना एडुल्जी समेत कुछ लोगों ने स्मृति मंधाना को कप्तानी सौंपे जाने की वकालत भी की थी। हरमनप्रीत ने कहा, “मैंने सब कुछ देखा है। मैंने टीम के सबसे बुरे दौर, निराशा, आलोचना, लोगों के सवाल और ऐसे दिन देखे हैं, जब लगता था कि कुछ भी हमारे पक्ष में नहीं हो रहा।
लेकिन मैंने जीत की सबसे बड़ी खुशियां भी महसूस की हैं—जीत, जश्न, देश के लिए खेलने का गर्व और वे पल, जिन्होंने हमारे हर त्याग को सार्थक बना दिया।” उन्होंने कहा कि वह कप्तानी की जिम्मेदारी “भावनाओं से भरे दिल, लेकिन मन में शांति के साथ” छोड़ रही हैं। उन्होंने कहा, “ मुझे सच में विश्वास है कि मेरी टीम एक अच्छी स्थिति में है। ऐसी टीम, जिसमें प्रतिभा, चरित्र, आत्मविश्वास और एक उज्ज्वल भविष्य है।
मैं उसके आगे के सफर को देखने और उसका हिस्सा बने रहने के लिए बेहद उत्साहित हूं।
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