सार्वभौमिक बाल दिवसः बचपन की उपेक्षा आखिर कब तक?

  •  ललित गर्ग
  •  नवंबर 20, 2020   12:25
  • Like
सार्वभौमिक बाल दिवसः बचपन की उपेक्षा आखिर कब तक?
Image Source: Google

सरकारों को कानूनों और नीतियों को बदलने और बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल करने के लिए व्यापक प्रयत्नों की अपेक्षा है। बच्चों को जीवित रहने और विकसित करने के लिए आवश्यक पोषण भी जरूरी है। साथ ही, बच्चों को हिंसा और शोषण से बचाना आवश्यक है।

संपूर्ण विश्व में ‘सार्वभौमिक बाल दिवस’ 20 नवंबर, को मनाया जाता है। इस दिवस की स्थापना वर्ष 1954 में हुई थी। इस दिवस को “अंतर्राष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस” भी कहा जाता है। बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता, अंतर्राष्ट्रीय बाल संवेदना तथा बच्चों के कल्याण, शिक्षा एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। बच्चों का मौलिक अधिकार उन्हें प्रदान करना इस दिवस का प्रमुख उद्देश्य है। इसमें शिक्षा, सुरक्षा, चिकित्सा मुख्य रूप से हैं। विश्वस्तर पर बालकों के उन्नत जीवन के ऐसे आयोजनों के बावजूद आज भी बचपन उपेक्षित, प्रताड़ित एवं नारकीय बना हुआ है, आज बच्चों की इन बदहाल स्थिति की जो प्रमुख वजहें देखने में आ रही है वे हैं-सरकारी योजनाओं का कागज तक ही सीमित रहना, बुद्धिजीवी वर्ग व जनप्रतिनिधियों की उदासीनता, माता-पिता की आर्थिक विवशताएं, समाज का संवेदनहीन होना एवं गरीबी, शिक्षा व जागरुकता का अभाव है।

सार्वभौमिक बाल दिवस पर बच्चों के अधिकार, कल्याण, सम्पूर्ण सुधार, देखभाल और शिक्षा के बारे में लोगों को जागरूक किया जाता है। दुनिया में सभी जगहों पर बच्चों को देश के भविष्य की तरह देखते थे। लेकिन उनका यह बचपन रूपी भविष्य आज अभाव एवं उपेक्षा, नशे एवं अपराध की दुनिया में धंसता चला जा रहा है। बचपन इतना डरावना एवं भयावह हो जायेगा, किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। आखिर क्या कारण है कि बचपन बदहाल होता जा रहा है? बचपन इतना उपेक्षित क्यों हो रहा है? बचपन के प्रति न केवल अभिभावक, बल्कि समाज और सरकार इतनी बेपरवाह कैसे हो गयी है? यह प्रश्न सार्वभौमिक बाल दिवस मनाते हुए हमें झकझोर रहे हैं।

इसे भी पढ़ें: इस बाल दिवस पर लें यह संकल्प और बच्चों की सेहत को बनाएं बेहतर

सरकारों को कानूनों और नीतियों को बदलने और बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल करने के लिए व्यापक प्रयत्नों की अपेक्षा है। बच्चों को जीवित रहने और विकसित करने के लिए आवश्यक पोषण भी जरूरी है। साथ ही, बच्चों को हिंसा और शोषण से बचाना आवश्यक है। इसने बच्चों को अपनी आवाजें सुनने और अपने समाजों में भाग लेने में सक्षम बनाया जाना आदि जरूरतों को देखते हुए इस दिवस की प्रासंगिकता है। जब हम किसी गली, चैराहे, बाजार, सड़क और हाईवे से गुजरते हैं और किसी दुकान, कारखाने, रेस्टोरेंट या ढाबे पर 4-5 से लेकर 12-14 साल के बच्चे को टायर में हवा भरते, पंक्चर लगाते, चिमनी में मुंह से या नली में हवा फूंकते, जूठे बर्तन साफ करते या खाना परोसते देखते हैं और हम निष्ठुर बन रहते हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों व गरीबी के मार से बेहाल होकर इस नारकीय कार्य करने को विवश है। कूड़ों के ढेर से शीशी, लोहा, प्लास्टिक, कागज आदि इकट्ठा करके कबाड़ की दुकानों पर बेचते हैं। इससे प्राप्त पैसों से वह अपने व परिवार का जीविकोपार्जन करते हैं। लेकिन सार्वभौमिक बाल दिवस जैसे आयोजनों के बावजूद कब तक हम बचपन को इस तरह बदहाल, प्रताड़ित एवं उपेक्षा का शिकार होने देंगे। 

आज का बालक ही कल के समाज का सृजनहार बनेगा। लेकिन कमजोर नींवों पर हम कैसे एक सशक्त राष्ट्र की कल्पना कर सकते हैं? हमारे देश में भी कैसा विरोधाभास है कि हमारा समाज, सरकार और राजनीतिज्ञ बच्चों को देश का भविष्य मानते नहीं थकते लेकिन क्या इस उम्र के लगभग 25 से 30 करोड़ बच्चों से बाल मजदूरी के जरिए उनका बचपन और उनसे पढने का अधिकार छीनने का यह सुनियोजित षड्यंत्र नहीं लगता? यह कैसी विडम्बना है कि जब इस उम्र के बच्चों को स्कूल में होना चाहिए, खानदानी व्यवसाय के नाम पर एक पूरी पीढ़ी को शिक्षा, खेलकूद और सामान्य बाल सुलभ व्यवहार से वंचित किया जा रहा है और हम अपनी पीठ थपथपाए जा रहे हैं। बच्चों को बचपन से ही आत्मनिर्भर बनाने के नाम पर हकीकत में हम उन्हें पैसा कमाकर लाने की मशीन बनाकर अंधकार में धकेल रहे हैं।

पारिवारिक काम एवं आर्थिक बदहाली के नाम पर अब बचपन की जरूरतों को दरकिनार कर खुलेआम बच्चों से काम कराया जा सकता है, नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने इन स्थितियों पर कड़ा विरोध व्यक्त किया है। कुछ बच्चें अपनी मजबूरी से काम करते हैं तो कुछ बच्चों से जबरन काम कराया जाता है। यदि गौर करें तो हम पाएंगे कि किसी भी माता-पिता का सपना अपने बच्चों से काम कराना नहीं होता। हालात और परिस्थितियां उन्हें अपने बच्चों से काम कराने को मजबूर कर देती हैं। पर क्या इसी आधार पर उनसे उनका बचपन छीनना और पढने-लिखने की उम्र को काम की भट्टी में झोंक देना उचित है? ऐसे बच्चे अपनी उम्र और समझ से कहीं अधिक जोखिम भरे काम करने लगते हैं। वहीं कुछ बच्चे ऐसी जगह काम करते हैं जो उनके लिए असुरक्षित और खतरनाक होती है जैसे कि माचिस और पटाखे की फैक्टरियां जहां इन बच्चों से जबरन काम कराया जाता है। इतना ही नहीं, लगभग 1.2 लाख बच्चों की तस्करी कर उन्हें काम करने के लिए दूसरे शहरों में भेजा जाता है। इतना ही नहीं, हम अपने स्वार्थ एवं आर्थिक प्रलोभन में इन बच्चों से या तो भीख मंगवाते हैं या वेश्यावृत्ति में लगा देते हैं। 

देश में सबसे ज्यादा खराब स्थिति है बंधुआ मजदूरों की जो आज भी परिवार की समस्याओं की भेंट चढ़ रहे हैं। चंद रुपयों की उधारी और जीवनभर की गुलामी बच्चों के नसीब में आ जाती है। महज लिंग भेद के कारण कम पढ़े-लिखे और यहां तक कि शहरों में भी लड़कियों से कम उम्र में ही काम कराना शुरू कर दिया जाता है या घरों में काम करने वाली महिलाएं अपनी बेटियों को अपनी मदद के लिए साथ ले जाना शुरू कर देती हैं।  कम उम्र में काम करने वाले बच्चे शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक रूप से कमजोर होते हैं। साथ ही उनकी सेहत पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। इतना ही नहीं, कभी-कभी उनका शारीरिक विकास समय से पहले होने लगता है जिससे उन्हें कई बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इन बच्चों को न पारिवारिक सुरक्षा दी जाती है और न ही सामाजिक सुरक्षा। बाल मजदूरी से बच्चों का भविष्य अंधकार में जाता ही है, देश भी इससे अछूता नहीं रहता क्योंकि जो बच्चे काम करते हैं वे पढ़ाई-लिखाई से कोसों दूर हो जाते हैं और जब ये बच्चे शिक्षा ही नहीं लेंगे तो देश की बागडोर क्या खाक संभालेंगे? इस तरह एक स्वस्थ बाल मस्तिष्क विकृति की अंधेरी और संकरी गली में पहुँच जाता है और अपराधी की श्रेणी में उसकी गिनती शुरू हो जाती हैं। वर्तमान संदर्भ में आधुनिक पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन शैली पर यह एक ऐसी टिप्पणी है जिसमें बचपन की उपेक्षा को एक अभिशाप के रूप में चित्रित किया गया है। सच्चाई यह है कि देश में बाल अपराधियों की संख्या बढ़ती जा रही है। बच्चे अपराधी न बने इसके लिए आवश्यक है कि अभिभावकों और बच्चों के बीच बर्फ-सी जमी संवादहीनता एवं संवेदनशीलता को फिर से पिघलाया जाये। फिर से उनके बीच स्नेह, आत्मीयता और विश्वास का भरा-पूरा वातावरण पैदा किया जाए। श्रेष्ठ संस्कार बच्चों के व्यक्तित्व को नई पहचान देने में सक्षम होते हैं। अतः शिक्षा पद्धति भी ऐसी ही होनी चाहिए। सरकार को बच्चों से जुड़े कानूनों पर पुनर्विचार करना चाहिए एवं बच्चों के समुचित विकास के लिये योजनाएं बनानी चाहिए। ताकि इस बिगड़ते बचपन और भटकते राष्ट्र के नव पीढ़ी के कर्णधारों का भाग्य और भविष्य उज्ज्वल हो सकता है। ऐसा करके ही हम सार्वभौम बाल दिवस को मनाने की सार्थकता हासिल कर सकेंगे। 

- ललित गर्ग







Unlock 5 के 61वें दिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, स्वस्थ मरीजों और सक्रिय मामलों के बीच बढ़ रहा है अंतर

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 30, 2020   21:50
  • Like
Unlock 5 के 61वें दिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, स्वस्थ मरीजों और सक्रिय मामलों के बीच बढ़ रहा है अंतर
Image Source: Google

मंत्रालय के मुताबिक भारत उन देशों में शामिल है जहां प्रति दस लाख आबादी पर कम मौतें हुई। मंत्रालय ने कहा कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश में पिछले एक महीने में उपचाराधीन मामलों की संख्या घटी है, जबकि मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़ी है।

नयी दिल्ली। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि देश में कोविड-19 के 38,772 नए मामले आए तथा 45,333 और मरीज स्वस्थ हो गए। देश में अब तक 88,47,600 लोग संक्रमण से उबर चुके हैं। मंत्रालय ने कहा , ‘‘स्वस्थ होने वाले मरीजों और उपचाराधीन मरीजों की संख्या के बीच अंतर बढ़ रहा है।’’देश में 4,46,952 मरीजों का उपचार चल रहा है जो कि संक्रमण के कुल मामलों का महज 4.74 प्रतिशत है। मंत्रालय ने कहा, ‘‘नए मामलों की तुलना में ज्यादा मरीज ठीक हो रहे हैं। इससे ठीक होने की दर भी सुधरकर 93.81 प्रतिशत हो गयी है।’’ मंत्रालय के मुताबिक भारत उन देशों में शामिल है जहां प्रति दस लाख आबादी पर कम मौतें हुई। मंत्रालय ने कहा कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश में पिछले एक महीने में उपचाराधीन मामलों की संख्या घटी है, जबकि मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़ी है। जांच की संख्या भी बढ़ी है। एक दिन में 8,76,173 जांच के साथ अब तक 14 करोड़ से ज्यादा नमूनों की जांच हो चुकी है। पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 78.31 प्रतिशत नए मामले केरल, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, गुजरात, मध्यप्रदेश और तमिलनाडु से आए। संक्रमण से ठीक होने के 76.94 प्रतिशत मामले दिल्ली, केरल, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक से आए। सबसे ज्यादा दिल्ली में 6325 लोगों ने संक्रमण को मात दी। मंत्रालय ने कहा कि 443 और मरीजों की मौत हो गयी। इनमें से 78.56 प्रतिशत मामले 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश के थे। इनमें महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, केरल, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और पंजाब शामिल हैं। देश में कोविड-19 के 38,772 नए मामलों के साथ संक्रमितों की कुल संख्या 94,31,691 हो गयी। संक्रमण के कारण 443 और मरीजों की मौत हो जाने से मृतकों की संख्या 1,37,139 हो गयी।

इसे भी पढ़ें: दिल्ली में कोरोना का RT-PCR टेस्ट होगा सस्ता, CM केजरीवाल ने दिये निर्देश

राजस्थान में कोरोना वायरस से संक्रमित 20 और लोगों की मौत,2677 नये संक्रमित सामने आए

राजस्थान में कोरोना वायरस से संक्रमण के राजधानी जयपुर में अब तक के सबसे अधिक 745 मरीजों सहित सोमवार को 2,677 नये मामले सामने आये है। इसके साथ ही अब तक राज्य में सामने आएसंक्रमितों की कुल संख्या 2,68,063 हो गई है। वहीं, राज्य में संक्रमण से 20 और लोगों की मौत हो गई जिससे राज्य में कोविड-19 से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 2,312 तक पहुंच गई है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान की पूर्व मंत्री व भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ विधायक किरण महेश्वरी का रविवार देर रात निधन हो गया। वह कोरोना वायरस से संक्रमित पाई गयीं थीं और गुरुग्राम के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। अधिकारियों ने बताया,‘‘ सोमवार शाम छह बजे तक के बीते 24 घंटों में राज्य में कोरोना वायरस के संक्रमण से 20 और लोगों की मौत हुई हैं, जिससे महामारी में मरने वालों की संख्या अब बढ़कर 2,312 हो गयी।’’ उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण से जयपुर और जोधपुर में सोमवार को पांच-पांच, अजमेर में तीन और संक्रमित मरीजों की मौत होने से अब तक जयपुर में 435, जोधपुर में 239, अजमेर में 187, बीकानेर में 161, कोटा में 135, भरतपुर में 105, उदयपुर में 95, और पाली में 90 लोगों की कोविड-19 की वजह से जान जा चुकी है। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक कुल 2,37,098 लोग कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक हो चुके हैं। 

इसे भी पढ़ें: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Covid-19 वैक्सीन तैयार कर रहीं तीन टीमों के साथ की वर्चुअल बैठक

महाराष्ट्र में कोविड-19 के 3837 नए मामले, केरल में 3382 नए मरीज मिले

महाराष्ट्र में सोमवार को कोविड-19 के 3,837 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद कुल संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 18,23,896 हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि संक्रमण से 80 लोगों की मौत हुई, जिसके बाद कुल मृतकों की संख्या बढ़कर 47,151 हो गई। वहीं, स्वस्थ हुए लोगों की संख्या 16,85,122 है जबकि 90,557 लोगों का उपचार चल रहा है। केरल में पिछले 24 घंटे में संक्रमण के 3,382 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की संख्या बढ़कर छह लाख के पार हो गई। वहीं 21 लोगों की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 2,244 हो गई। मुख्यमंत्री पी विजयन ने बताया कि अब तक 5,38,713 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में अक्टूबर के दौरान मामले बढ़े थे, जो अब घटने लगे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में फिलहाल 61,894 लोगों का उपचार चल रहा है। जम्मू-कश्मीर में संक्रमण के 370 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,10,224 हो गई। वहीं पिछले 24 घंटे में नौ लोगों की मौत हुई और मृतकों की संख्या 1,694 हो गई। राज्य में फिलहाल 4,965 लोगों का उपचार चल रहा है और अब तक 1,03,562 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।

इसे भी पढ़ें: जानना चाहते है साल 2020 का सबसे प्रचलित शब्द कौन सा रहा?

गुजरात में कोविड-19 के 1502 नए मामले, 20 मरीजों की मौत

गुजरात में सोमवार को कोविड-19 के 1502 नए मामले आने से संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2,09,780 हो गयी। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि संक्रमण से 20 और मरीजों की मौत से मृतकों की संख्या बढ़कर 3989 पर पहुंच गयी। विभाग ने बताया कि स्वस्थ होने के बाद 1401 और मरीजों को अस्पतालों से छुट्टी दे दी गयी। राज्य में अब तक 1,90,820 लोग ठीक हो चुके हैं। विज्ञप्ति में बताया गया कि राज्य में कोविड-19 के ठीक होने की दर 90.96 प्रतिशत है।पिछले 24 घंटे में 69,875 नमूनों की जांच के साथ अब तक 78,25,615 जांच हो चुकी है।

इसे भी पढ़ें: कोरोना नियम का उल्लंघन करने वालों को BMC देगी मुफ्त में मास्क, वसूलेगी जुर्माना

उत्तराखंड में 455 नए कोविड मामले

उत्तराखंड में सोमवार को 455 नए मरीजों में कोविड-19की पुष्टि हुई है जबकि प्रदेश में नौ अन्य मरीजों ने संक्रमण के कारण दम तोड दिया। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी जानकारी दी। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, 455 नए मरीजों के मिलने के साथ ही प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या बढ़कर 74795 हो गयी है। ताजा मामलों में से सर्वाधिक 185 देहरादून जिले में मिले जबकि नैनीताल में57,पिथौरागढ में 49, हरिद्वार में 23 और पौड़ी में 19 मरीज सामने आए। बुलेटिन के अनुसार सोमवार को प्रदेश में नौ और कोविड मरीजों ने दम तोड़ दिया। महामारी से अब तक प्रदेश में 1231 मरीज जान गंवा चुके हैं। प्रदेश में सोमवार को 352 और मरीज उपचार के बाद स्वस्थ हो गए। अब तक कुल 67827 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं और उपचाराधीन मामलों की संख्या 5059 है। प्रदेश में कोविड 19 के 678 मरीज प्रदेश से बाहर चले गए हैं।

इसे भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश में कोरोना से 19 और मरीजों की मौत, 2,044 नए मामले


त्रिपुरा में कोविड-19 के 21 नए मामले, संक्रमितों की संख्या 32,695 हुई

त्रिपुरा में पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के कम से कम 21 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 32,695 हो गई। एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि इस दौरान संक्रमण से किसी व्यक्ति की मौत नहीं हुई? जिससे मृतकों की संख्या 367 बनी हुई है। इनमें से 185 लोगों की मौत पश्चिमी त्रिपुरा जिले में हुई है और अगरतला इसी का हिस्सा है। त्रिपुरा में अभी 598 लोगों का उपचार चल रहा है और बीमारी से अब तक 31,707 लोग स्वस्थ हो चुके हैं।

इसे भी पढ़ें: राजस्थान की भाजपा नेत्री किरण माहेश्वरी के निधन पर रतलाम में भी शोक व्याप्त

केंद्र ने राज्यों से कोविड-19 टीकाकरण अभियान के लिए स्वास्थ्यकर्मियों की पहचान करने को कहा

केंद्र ने राज्यों से कहा है कि वे एक बार टीका उपलब्ध हो जाने की स्थिति में कोविड-19 टीकाकरण अभियान को अंजाम देने के लिए डॉक्टरों, दवा विक्रेताओं, एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न सहित स्वास्थ्यकर्मियों की पहचान करें। केंद्र ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को लिखे पत्र में कहा है कि एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न सहित नर्सों, सहायक नर्सों और दवा विक्रेताओं की टीकाकरण अभियान को अंजाम देने के लिए पहचान की जाए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव वंदना गुरनानी ने कहा कि राज्य उपरोक्त श्रेणियों से सेवानिवृत्त कर्मियों की भी पहचान कर सकते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार कोरोना वायरस रोधी टीका उपलब्ध होने जाने की स्थिति में, इसे विशेष कोविड-19 टीकाकरण अभियान के तहत वितरित किया जाएगा। इस काम में मौजूदा सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) से संबंधित प्रक्रिया, प्रौद्योगिकी और नेटवर्क का पालन किया जाएगा। यह यूआईपी के समानांतर चलेगा। सूत्रों के अनुसार टीकाकरण अभियान में स्वास्थ्यकर्मियों को प्राथमिकता दी जाएगी। डॉक्टरों, एमबीबीएस छात्रों, नर्सों और आशा वर्करों सहित अग्रिम पंक्ति के लगभग एक करोड़ स्वास्थ्यकर्मियों की पहचान की गई है जिन्हें उपलब्ध होते ही यह टीका लगाया जाएगा।

इसे भी पढ़ें: इंदौर में मिले कोरोना के 523 नये मामले, चार लोगों की हुई मौत

कोविड-19: दिल्ली सरकार ने आरटी-पीसीआर जांच का शुल्क घटाकर 800 रुपये किया

दिल्ली सरकार ने कोविड-19 की आरटी-पीसीआर जांच की कीमत 2400 रुपये से घटाकर 800 रुपये करने के लिए सोमवार को आदेश जारी कर दिया। इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरटी-पीसीआर जांच की कीमत घटाने का निर्देश दिया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि निजी प्रयोगशालाओं से कहा गया है कि वे सरकारी टीमों द्वारा लिए गए नमूनों और जिलों एवं अस्पतालों के कहने पर नमूने वाले स्थल पर निजी प्रयोगशालाओं की ओर से लिए गए नमूनों की जांच करने के लिए 800 रुपये का शुल्क लें। बहरहाल, घर पर जाकर लिए गए नमूने की कोविड-19 जांच का शुल्क 1200 रुपये रहेगा। सभी प्रयोगशालाओं एवं अस्पतालों से जांच की संशोधित कीमत 24 घंटे के भीतर उचित स्थान पर प्रदर्शित करने को कहा गया है। निजी प्रयोगशालाओं से यह भी कहा गया है कि वे नमूनों की जांच कर रिपोर्ट को ग्राहक (सरकार या व्यक्ति) के साथ साझा करें और नमूने लेने के 24 घंटे के भीतर सभी रिपोर्टों को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के पोर्टल पर अपडेट करें। स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने पहले कहा था कि प्रयोगशालाओं को सभी जांचों की रिपोर्ट एक दिन में जारी करने में मुश्किल हो रही है।







Unlock 5 के 59वें दिन कोरोना वैक्‍सीन पर पीएम ने लिया तीन कंपनियों की तैयारियों का जायजा

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 28, 2020   22:35
  • Like
Unlock 5 के 59वें दिन कोरोना वैक्‍सीन पर पीएम ने लिया तीन कंपनियों की तैयारियों का जायजा
Image Source: Google

गहलोत ने शनिवार को राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरयूएचएस) अस्पताल, जयपुर में 70 बिस्तर वाले नए कोविड आईसीयू, छह जिलों में आरटी-पीसीआर जांच प्रयोगशाला तथा जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में अत्याधुनिक कैंसर उपचार वार्ड तथा अन्य चिकित्सा सुविधाओं का लोकार्पण भी किया।

अहमदाबाद/हैदराबाद/पुणे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के टीके के विकास कार्य की समीक्षा के लिए शनिवार को अहमदाबाद, हैदराबाद और पुणे का दौरा किया। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने कहा कि दिन भर के दौरे का उद्देश्य नागरिकों के टीकाकरण में भारत के प्रयासों में आने वाली चुनौतियों, तैयारियों और रोडमैप जैसे पहलुओं की जानकारी हासिल करना था। मोदी ने अपने दौरे की शुरुआत अहमदाबाद के नजदीक दवा कंपनी जाइडस कैडिला के संयंत्र के दौरे के साथ की। मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘अहमदाबाद में जाइडस बायोटेक पार्क का दौरा किया और जाइडस कैडिला द्वारा विकसित किये जा रहे डीएनए आधारित स्वदेशी टीके के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त की। मैंने इस कार्य में लगी टीम के प्रयासों के लिए उसकी सराहना की। भारत सरकार इस यात्रा में उनका सहयोग करने के लिए उनके साथ सक्रियता से काम कर रही है।’’ प्रधानमंत्री ने अहमदाबाद से करीब 20 किमी दूर स्थित जाइडस कैडिला के चांगोदर औद्योगिक क्षेत्र स्थित अनुसंधान केंद्र में टीके के विकास की प्रक्रिया की समीक्षा की। इस दौरान मोदी ने पीपीई किट पहन रखी थी। एक अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री दिल्ली से करीब नौ बजे अहमदाबाद हवाई अड्डे पहुंचे, जहां से वह जाइडस कैडिला के संयंत्र गए। उन्होंने वहां कंपनी के प्रमोटरों और अधिकारियों से बात की। उल्लेखनीय है कि जाइडस कैडिला ने कोविड-19 के खिलाफ जाइकोव-डी नामक संभावित टीके का विकास किया है जिसके पहले चरण का क्लिनिकल परीक्षण पूरा हो चुका है। कंपनी ने अगस्त में दूसरे चरण का परीक्षण शुरू किया है। एक अधिकारी के अनुसार कंपनी के अधिकारियों ने संयंत्र में टीका विकास कार्यों के बारे में मोदी को विस्तार से जानकारी दी। उन्हें टीका उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी दी गयी। प्रधानमंत्री ने वहां वैज्ञानिकों और टीका के विकास से जुड़े लोगों से बातचीत की। जाइडस कैडिला के अध्यक्ष पंकज पटेल ने हाल ही में कहा था कि कंपनी का उद्देश्य मार्च 2021 तक टीके का परीक्षण पूरा करना है और वह एक साल में 10 करोड़ तक खुराक का उत्पादन कर सकती है। मोदी करीब एक घंटे तक संयंत्र में रहे। इसके बाद वह हवाईअड्डे के लिए निकले और वहां से 11.40 बजे हैदराबाद रवाना हो गए।

मोदी हैदराबाद के नजदीक हकीमपेट वायु सेना हवाई अड्डे पर दोपहर करीब एक बजे पहुंचे। हैदराबाद के हकीमपेट वायु सेना हवाई अड्डे पर उतरने के बाद तेलंगाना के मुख्य सचिव सोमेश कुमार, पुलिस महानिदेशक और अन्य अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री वायु सेना हवाई अड्डे से करीब 20 किलोमीटर दूर जीनोम वैली स्थित भारत बायोटेक की इकाई गए। भारत बायोटेक कोविड-19 की रोकथाम के लिए संभावित टीके कोवैक्सिन का विकास भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय विषाणुविज्ञान संस्थान के साथ मिलकर कर रहा है, जिसके तीसरे चरण का परीक्षण चल रहा है। हैदराबाद में जीनोम वैली स्थित भारत बायोटेक की बीएसएल-3 (जैव-सुरक्षा स्तर 3) इकाई में टीके का विकास किया जा रहा है और यहीं इसका उत्पादन किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से कोवैक्सिन के बारे में जानकारी प्राप्त की। घंटे भर के दौरे के बाद मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘हैदराबाद में भारत बायोटेक कंपनी में कोविड-19 के स्वदेशी टीके के बारे में जानकारी मिली। वैज्ञानिकों को अभी तक किए गए परीक्षण में प्रगति के लिए बधाई। उनकी टीम आईसीएमआर के साथ निकटता से काम कर रही है।’’ कंपनी से बाहर निकलने के बाद मोदी मुख्य द्वार पर अपने वाहन से उतर गए और मीडियाकर्मियों तथा पास खड़े लोगों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। मोदी तीन बजकर 30 मिनट पर पुणे के लिए रवाना हो गए और वहां वह साढ़े चार बजे पहुंचे। हैदराबाद से पुणे हवाई अड्डे पर शाम करीब साढ़े चार बजे पहुंचने के बाद मोदी हेलीकॉप्टर से सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के लिए रवाना हुए। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में मोदी ने वैज्ञानिकों से बातचीत की और वहां टीका विकास पर चल रहे कामकाज का जायजा लिया। वह दिल्ली जाने के लिए शाम छह बजे पुणे हवाई अड्डे रवाना हो गए। एक अधिकारी ने बताया कि मोदी के एसआईआई दौरे का उद्देश्य कोरोना वायरस के लिए टीके की प्रगति की समीक्षा करना है और इसके लांच के समय, उत्पादन और वितरण व्यवस्था का जायजा लेना है। टीके के विकास के लिए सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने वैश्विक दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ भागीदारी की है।

इसे भी पढ़ें: राजस्थान में कोरोना वायरस से संक्रमित 19 और लोगों की मौत, 2765 नये मामले

मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के 1634 नए मामले, 13 लोगों की मौत

मध्यप्रदेश में शनिवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 1634 नए मामले सामने आए और इसके साथ ही प्रदेश में इस वायरस से अब तक संक्रमित हुए लोगों की कुल संख्या 2,03,231 तक पहुंच गयी। वहीं, राज्य में पिछले 24 घंटों में इस बीमारी से 13 और व्यक्तियों की मौत की पुष्टि हुई है, जिससे मरने वालों की संख्या 3,237 हो गयी है। प्रदेश के एक स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, ‘‘पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश में कोरोना वायरस के संक्रमण से इंदौर में तीन, भोपाल, विदिशा व रतलाम में दो-दो, और जबलपुर, सागर, सतना एवं झाबुआ में एक-एक मरीज की मौत की पुष्टि हुई है।’’ उन्होंने बताया, ‘‘राज्य में अब तक कोरोना वायरस से सबसे अधिक 752 मौत इंदौर में हुई हैं, जबकि भोपाल में 515, उज्जैन में 100, सागर में 139, जबलपुर में 222 एवं ग्वालियर में 180 लोगों की मौत हुई हैं। बाकी मौतें अन्य जिलों में हुई हैं।’’ अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में शनिवार को कोविड-19 के 568 नये मामले इंदौर जिले में सामने आये हैं, जबकि भोपाल में 356, ग्वालियर में 86 और जबलपुर में 48 नये मामले आये हैं।

इसे भी पढ़ें: जाइडस कैडिला के प्रमुख बोले, PM के दौरे ने हमें और बेहतर करने के लिए किया प्रोत्साहित

दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के 4,998 नये मामले, संक्रमित होने की दर 7.24 फीसदी

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के4,998नये मामले सामने आये जिसके बाद संक्रमण की दर 7.24 प्रतिशत हो गयी है जो 23 अक्टूबर के बाद सबसे कम है। इस बीच राजधानी में रिकार्ड 69051 नमूनों की जांच की गयी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन में इसकी जानकारी दी गयी है। बुलेटिन में कहा गया है कि संक्रमण से 89 और लोगों की मौत हो गयी है जिसके बाद राजधानी में इससे मरने वालों की संख्या बढ़ कर 8,998 हो गयी है। इसमें कहा गया है कि दिल्ली में अब तक का सबसे कम संक्रमण दर 23 अक्टूबर को 6.98 फीसदी थी। शुक्रवार को यह दर 8.51 प्रतिशत जबकि बृहस्पतिवार को 8.65 प्रतिशत एवं बुधवार को 8.49 फीसदी थी। इसके अनुसार दिल्ली में कल 69,051 नमूनों की जांच की गयी है जो एक रिकॉर्ड है। इनमें 33,147 आरटी—पीसीआर जांच और 35,904 त्वरित एंटीजन जांच शामिल है। बृहस्पतिवार को 64,455 नमूनों की जांच की गयी थी।

इसे भी पढ़ें: दिल्ली में कोरोना संक्रमण के 4,998 नये मामले, संक्रमित होने की दर 7.24 फीसदी

महाराष्ट्र में कोविड-19 के 5,965 नए मामले, 75 लोगों की मौत

महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 5,965 नए मामले सामने आने के बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर शनिवार को 18,14,515 हो गई। एक स्वास्थ्य अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस दौरान कोविड-19 से 75 मरीजों की मौत हुई और कुल मृतकों की संख्या बढ़कर 46,986 हो गई। कुल 3,937 मरीज इस दौरान स्वस्थ भी हुए और कुल ठीक हुए लोगों की संख्या बढ़कर 16,76,564 हो गई। राज्य में अभी 89,905 लोगों का इलाज चल रहा है। मुंबई में 1,063 नए मामले सामने आए हैं और शहर में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2,81,881 हो गई। 

इसे भी पढ़ें: मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के 1634 नए मामले, 13 लोगों की मौत

राजस्थान में कोविड-19 की जांच 800 रुपये में होगी: गहलोत

राजस्थान में निजी प्रयोगशालाओं में कोरोना वायरस संक्रमण की जांच अब 1200 रुपये के बजाय 800 रुपये में होगी। राज्य सरकार ने शनिवार को इस बारे में आदेश जारी किया। इसमें कहा गया है कि देश में जांच किट के दाम में गिरावट व उपलब्धता को देखते हुए राज्य सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण की आरटी-पीसीआर जांच का अधिकतम शुल्क 1200 रुपये से घटाकर 800 रुपये करने का फैसला किया है। शासन सचिव सिद्धार्थ महाजन द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इससे पहले दिन में राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, किट की लागत में कमी को देखते हुए अब राज्य सरकार सभी निजी प्रयोगशालाओं को यह जांच 1200 रुपये के बजाय 800 रुपये में करने को पाबंद करेगी। गहलोत ने कहा कि राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमण की जांच केवल आरटी-पीसीआर के जरिए हो रही है, जो पूरी दुनिया में सबसे विश्वसनीय जांच प्रक्रिया है। गहलोत ने शनिवार को राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरयूएचएस) अस्पताल, जयपुर में 70 बिस्तर वाले नए कोविड आईसीयू, छह जिलों में आरटी-पीसीआर जांच प्रयोगशाला तथा जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में अत्याधुनिक कैंसर उपचार वार्ड तथा अन्य चिकित्सा सुविधाओं का लोकार्पण भी किया। 

इसे भी पढ़ें: दीपावली के बाद भोपाल में कोरोना का कहर जारी, अब तक 31,333 कोरोना संक्रमित मिले

आंध्र प्रदेश में कोविड-19 के 625 नए मामले

आंध्र प्रदेश में कोविड-19 के 625 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर शनिवार को 8,67,063 हो गई। ताजा बुलेटिन में बताया गया कि पिछले 24 घंटे में सुबह नौ बजे तक पांच और लोगों की मौत हुई, जबकि 1,186 मरीज स्वस्थ हो गए। बुलेटिन के अनुसार अब 11,571 मरीजों का इलाज चल रहा है और अब तक 8,48,511 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आंध्र प्रदेश में अभी कुल संक्रमण की पुष्टि दर 8.70 फीसदी है। राज्य में स्वस्थ होने की दर 97.86 फीसदी है जबकि मृत्यु दर 0.81 फीसदी है।

इसे भी पढ़ें: ओरछा के श्रीराम राजा का विवाह महोत्सव कोरोना गाइडलाइन के अनुसार तीन दिन चलेगा श्रीराम विवाह महोत्सव

कोविड टीके के वितरण और टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य प्रणाली तैयार कर रहा है विशेषज्ञ समूह: राघवन

देश के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर एक विशेषज्ञ समूह मौजूदा स्वास्थ्य सेवा से समझौता किए बिना कोविड-19 टीके के वितरण और टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य प्रणाली तैयार कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोविड-19 महामारी ने अनुसंधान प्रयोगशालाओं और उद्योग के बीच तथा उद्योग और समाज के बीच असाधारण सहयोग को प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कहा, ‘‘स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर एक विशेषज्ञ समूह ने टीकों के वितरण और टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य प्रणाली को तैयार करने के लिए काफी काम किया है। विजय राघवन के हवाले से एक बयान में कहा गया, यह सब मौजूदा स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं से समझौता किए बिना किया जा रहा है, जिसमें हमारे राष्ट्रीय चुनाव, टीकाकरण कार्यक्रम से जुड़े हमारे सार्वभौमिक प्रतिरक्षण कार्यक्रम के वृहद अनुभव का उपयोग किया जा रहा है। राघवन ने 26 नवंबर को ग्लोबल इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी एलायंस (जीआईटीए) के 9वें स्थापना दिवस पर आयोजित डिजिटल कार्यक्रम में यह बात की। विजयराघवन ने कहा कि विश्व स्तर पर आपूर्ति श्रृंखलाओं के संदर्भ में ‘आत्मनिर्भर भारत’ को देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘तीन स्तंभ हैं जिन्हें आत्मनिर्भरता की रूपरेखा तैयार करते समय ध्यान में रखने की आवश्यकता है, वह हैं- नीति, विनियमन, क्रियान्वयन और इसे तीव्रता और तालमेल के साथ किए जाने की आवश्यकता।







Unlock 5 के 58वें दिन SC ने कहा, राजनीति से ऊपर उठकर कोरोना पर काबू पाने के लिये करने होंगे कठोर उपाय

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 27, 2020   21:40
  • Like
Unlock 5 के 58वें दिन SC ने कहा, राजनीति से ऊपर उठकर कोरोना पर काबू पाने के लिये करने होंगे कठोर उपाय
Image Source: Google

हरियाणा में शुक्रवार को कोरोना वायरस संक्रमण से 29 और लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद इस खतरनाक संक्रमण से मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,345 हो गई। वहीं संक्रमण के 2,135 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2,28,746 हो गई।

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि कोविड-19 के मामलों में तेजी से हो रही वृद्धि पर अंकुश पाने के लिये राज्यों को राजनीति से ऊपर उठना होगा और कठोर उपाय करने होंगे क्योंकि हालात बद से बदतर हो गये हैं। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि देश में कोविड-19 के प्रबंधन के बारे में नीतियों, दिशा निर्देश और मानक हैं लेकिन प्राधिकारियों द्वारा इन पर अमल के प्रति ढिलाई है और इस मसले से निबटने के लिये कोई ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे हैं। न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने कहा, ‘‘यही समय कठोर कदम उठाने का है अन्यथा केन्द्र सरकार के सारे प्रयास व्यर्थ हो जायेंगे।’’ पीठ ने महामारी की नई लहर के पहले से कहीं ज्यादा ‘भयावह’ होने के बारे में केन्द्र द्वारा न्यायालय को अवगत कराये जाने पर यह टिप्पणी की। पीठ अस्पतालों में कोविड-19 से संक्रमित मरीजों के समुचित इलाज और शवों को गरिमामय तरीके से उठाने के बारे में स्वत: संज्ञान लिये गये मामले की सुनवाई कर रही थी। सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि दिशा निर्देशों और दूसरे मानकों पर सख्ती से अमल किया जाये क्योंकि ‘‘यह लहर पहली वाली लहरों से कहीं ज्यादा भयावह लग रही है।’’ मेहता के इनकथन को नोट करते हुये पीठ ने कहा, ‘‘फिर तो सख्त कदम उठाने की जरूरत है। चीजें बद से बदतर रही हैं लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे हैं। राज्यों को राजनीति से ऊपर उठना होगा। सभी राज्यों को इससे निबटने के लिये आगे आना होगा।’’ पीठ ने कहा, ‘‘अब कठोर कदम उठाये जाने की जरूरत है। यह सख्त उपाय करने का उचित समय है। इसके लिये नीतियों, दिशा निर्देश और मानक हैं लेकिन सख्ती से अमल नही हो रहा है। इन पर अमल करने की कोई इच्छा शक्ति ही नहीं है।’’ मेहता ने जब यह कहा कि राज्यों को स्थिति से निबटने के उपायों को सख्ती से लागू करना होगा तो पीठ ने कहा, ‘‘जी हां, अन्यथा केन्द्र सरकार के पर्याप्त व्यर्थ हो जायेंगे।’’ सालिसीटर जनरल ने कहा, ‘‘यह ‘मैं’ बनाम ‘वे’ नहीं हो सकता। इसे ‘हम’ होना पड़ेगा।’’ इस मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, ‘‘हम समारोह और जुलूस के आयोजन को देख रहे हैं जिनमें 60 प्रतिशत लोगों के पास मास्क नहीं है और 30 प्रतिशत के मास्क उनके चेहरे पर लटके हुये हैं।’’ मेहता ने पीठ से कहा कि कोविड-19 की मौजूदा लहर पहले से अधिक कठोर प्रतीत हो रही है और इस समय देश में महाराष्ट्र, केरल और दिल्ली सहित 10 राज्यों का कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में 77 प्रतिशत तक योगदान है। न्यायालय इस मामले में अब एक दिसंबर को आगे विचार करेगा। न्यायालय ने 23 नवंबर को केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों कोस्थिति रिपोर्ट पेश कर यह विस्तार से बताने का निर्देश दिया था कि वर्तमान के कोरोना वायरस संबंधी हालत से निपटने के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए हैं। शीर्ष अदालत ने कहा था कि महाराष्ट्र में कोविड-19 के मामलों में वृद्धि हुई है, ऐसे में अधिकारियों को कदम उठाने होंगे तथा दिसंबर में ‘‘और भी बदतर स्थिति’’ का सामना करने के तैयार रहना होगा।

इसे भी पढ़ें: अहमदाबाद, पुणे और हैदराबाद में कोविड-19 टीके के कार्यों की समीक्षा करेंगे PM मोदी

देश के दस राज्यों में कोविड-19 के लगभग 77 फीसदी सक्रिय मामले: केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया

केंद्र ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि दस राज्यों में कोविड-19 के लगभग 77 फीसदी सक्रिय मामले हैं जबकि कुल सक्रिय मामलों में से 33 फीसदी महाराष्ट्र और केरल के हैं। इसने कहा कि दुनिया के अधिकतर देशों में कोविड-19 के मामले फिर से बढ़ रहे हैं और भारत की घनी आबादी को देखते हुए देश ने संक्रमण के प्रसार पर अंकुस लगाने में उल्लेखनीय काम किया है। केंद्र ने कहा कि 24 नवंबर तक भारत में कोविड-19 के 92 लाख मामले थें, जिसमें 4.4 लाख से अधिक सक्रिय मामले हैं। गृह मंत्रालय ने हलफनामे में कहा, ‘‘हमारी स्वस्थ दर 93.76 फीसदी हो गई है और करीब 86 लाख लोग महामारी से उबर चुके हैं। पिछले आठ हफ्तों में प्रति दिन के औसतन मामलों में50 फीसदी की कमी आई है।वर्तमान में केवल दो राज्यों में 50 हजार से अधिक मामले हैं और वे पूरे सक्रिय मामलों का करीब 33 फीसदी हैं।’’ इसने कहा कि भारत का ‘केस फेटलिटी रेट’ (सीएफआर) 1.46 फीसदी है जबकि वैश्विक औसत 2.36 फीसदी है। केंद्र ने कहा कि सरकार सीएफआर को कम करने का प्रयास जारी रखेगी और इसे एक फीसदी से नीचे लाएगी और पॉजिटिविटी दर को कम करने के प्रयास तेज करेगी जो वर्तमान में 6.9 फीसदी है। केंद्र ने कहा, ‘‘दस राज्यों में देश में सक्रिय मामलों का 77 फीसदी है। ये राज्य हैं महाराष्ट्र (18.9 प्रतिशत), केरल (14.7 प्रतिशत), दिल्ली (8.5 प्रतिशत), पश्चिम बंगाल (5.7 फीसदी), कर्नाटक (5.6 फीसदी), उत्तरप्रदेश (5.4 फीसदी), राजस्थान (5.5 फीसदी), छत्तीसगढ़ (पांच फीसदी), हरियाणा (4.7 फीसदी) और आंध्रप्रदेश (3.1 फीसदी)।’’ इसने कहा कि भारत अब प्रतिदिन औसतन 11 लाख नमूनों की जांच कर रहा है और अप्रैल में छह हजार नमूनों की जांच से बढ़कर यहां तक पहुंचना एक उल्लेखनीय बढ़ोतरी है। केंद्र ने 170 पन्नों का हलफनामा उच्चतम न्यायालय में दाखिल किया और कहा कि महामारी जिस भयावता से बढ़ी उससे बाध्य होकर विभिन्न देशों ने कड़े कदम उठाए। इसने जीवनके लगभग हर पहलू को प्रभावित किया है और भारत इसका अपवाद नहीं है।

इसे भी पढ़ें: कोरोना से उत्तर प्रदेश में और 23 लोगों की मौत, 2366 नये मामले मिले


मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के 1645 नए मामले, 15 लोगों की मौत

मध्यप्रदेश में शुक्रवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 1645 नए मामले सामने आए और इसके साथ ही प्रदेश में इस वायरस से अब तक संक्रमित हुए लोगों की कुल संख्या2,01,597तक पहुंच गयी। राज्य में पिछले 24 घंटों में इस बीमारी से और 15 व्यक्तियों की मौत की पुष्टि हुई है जिससे मरने वालों की संख्या 3,224 हो गयी है। मध्यप्रदेश के एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया, ‘‘पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश में कोरोना वायरस के संक्रमण से इंदौर में तीन,भोपाल और सागर में दो-दो, ग्वालियर, खरगोन, रतलाम, होशंगाबाद, विदिशा, खंडवा, छतरपुर और सीधी में एक-एक मरीज की मौत की पुष्टि हुई है।’’ उन्होंने बताया, ‘‘राज्य में अब तक कोरोना वायरस से सबसे अधिक 749 मौत इंदौर में हुई हैं, जबकि भोपाल में 513, उज्जैन में 100, सागर में 138, जबलपुर में 221 एवं ग्वालियर में 180 लोगों की मौत हुई हैं। बाकी मौतें अन्य जिलों में हुई हैं।’’ अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में शुक्रवार को कोविड-19 के 556 नये मामले इंदौर जिले में आये हैं, जबकि भोपाल में 313, ग्वालियर में 95 और जबलपुर में 85 नये मामले आये। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कुल 2,01,597 संक्रमितों में से अब तक 1,83,696 मरीज स्वस्थ होकर घर चले गये हैं और 14,677 मरीज़ों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को 1,152 रोगियों को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। 

इसे भी पढ़ें: झारखंड में कोरोना संक्रमण से मरने वालों की संख्या बढ़कर 961 हो गयी

कोविड-19 के बढ़ते मामलों के लिये केंद्र ने SC में दिल्ली सरकार को बताया जिम्मेदार 

केंद्र ने राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 के बढ़ते मामलों के लिये शुक्रवार को दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि “बार-बार कहने” के बावजूद उसने जांच क्षमता, विशेष तौर पर आरटी-पीसीआर जांच, बढ़ाने के लिये कदम नहीं उठाए औरकाफी समय से प्रतिदिन 20,000 के करीब आरटी-पीसीआर जांच ही हो रही थी। केंद्र ने कहा कि दिल्ली सरकार को ठंड, त्योहारी सीजन और प्रदूषण के दौरान मामलों में बढ़ोतरी की पूरी जानकारी थी और इसके बावजूद लोगों को पर्याप्त रूप से जागरूक करने के लिए उपायों को समय से अमल में नही लाया गया। शीर्ष अदालत के समक्ष दायर अपने हलफनामे में गृह मंत्रालय ने कहा, “ डेंगू की रोकथाम और नियंत्रण समेत दिल्ली सरकार की उपलब्धियों पर जहां नियमित विज्ञापन थे वहीं कोविड-19 अनुकूल व्यवहार पर कोई विज्ञापन नहीं देखा गया। व्यापक रूप से लोगों को भी नियमित संपर्क उपायों के जरिये इसकी जानकारी नहीं थी।” उसने कहा, “कोविड-19 के बढ़ते मामलों के संदर्भ में बार-बार कहे जाने के बावजूद दिल्ली सरकार ने जांच क्षमता बढ़ाने के लिये कदम नहीं उठाए, खास तौर पर आरटी-पीसीआर के लिये, जो करीब 20,000 जांच के स्तर पर काफी समय से स्थिर थी।” न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर एस रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह ने केंद्र के हलफनामे को संज्ञान में लिया और कहा, “चीजें बद् से बद्तर होती जा रही हैं लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।” पीठ ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख एक दिसंबर तय करते हुए कहा, “राज्यों को राजनीति से ऊपर उठना होगा। सभी राज्यों को इस अवसर पर आगे आना होगा।” 

इसे भी पढ़ें: कोरोना वारियर्स की मेरी लिस्ट में पत्रकारों का स्थान बेहद खास: डॉ हर्षवर्धन

न्यायालय ने राजकोट में कोविड-19 के लिये नामित अस्पताल में अग्निकांड की घटना का लिया संज्ञान

उच्चतम न्यायालय ने राजकोट में कोविड-19 अस्पताल में बृहस्पतिवार को आग लगने की घटना पर संज्ञान लिया और इस मामले में गुजरात सरकार से रिपोर्ट मांगी। इस घटना में पांच मरीजों की मौत हो गई है। न्यायालय ने बार बारइस तरह की घटनायें होने के बावजूद इन्हें कम करने के लिये कोई ठोस कदम नहीं उठाने पर राज्यों की तीखी आलोचना की। न्यायमूर्ति अशोक भूषण,न्यायमूर्ति आर एस रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने इस घटना को हतप्रभ करने वाला बताते हुये कहा कि यह बहुत ही गंभीर मामला है और यह नामित सरकारी अस्पतालों की स्थिति को दर्शाता है क्योंकि इसी तरह की घटनायें दूसरे स्थानों पर भी हो चुकी हैं। पीठ ने कहा कि यह घटना इस बात का प्रतीक है कि ऐसी स्थिति से निबटने के लिये अग्नि सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त नहीं है। पीठ ने कहा, ‘‘हम इसका स्वत: संज्ञान ले रहे हैं। यह बहुत ही गंभीर बात है।’’ इसके साथ ही पीठ ने गुजरात सरकार को इस घटना के बारे में एक दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। पीठ ने कहा, ‘‘ये हतप्रभ करने वाली है और यह पहली घटना नहीं है। आपके पास इसकी निगरानी के लिये कितने अग्निशमन अधिकारी हैं? आपके यहां सुरक्षा प्रबंध ही नही हैं।’’ पीठ ने कहा, ‘‘इन घटनाओं की एक राज्य से दूसरे राज्य और एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में पुनरावृत्ति हो रही है। इस संबंध में राज्यों ने कोई ठोस कार्य योजना बनायी ही नहीं है।’’ गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने बताया किराजकोट जिले में निर्दिष्ट कोविड-19 अस्पताल के आईसीयू में आग लगने से संक्रमण के इलाज के लिए भर्ती पांच मरीजों की मौत हो गई जबकि इसमें उपचार के लिए भर्ती 26 अन्य मरीजों को सुरक्षित निकाल कर अन्य जगह स्थानांतरित किया गया है। पटेल ने बताया कि आनंद बंगला चौक इलाके में स्थित चार मंजिला उदय शिवानंद अस्पताल की पहली मंजिल पर स्थित आईसीयू में रात में करीब साढ़े बारह बजे आग लगी थी। इस अग्निकांड के समय इसमें करीब 31 मरीज भर्ती थे।

इसे भी पढ़ें: महाराष्ट्र में कोरोना लॉकडाउन पाबंदियां 31 दिसंबर तक बढ़ायी गयीं

राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमण से और 18 लोगों की मौत

राजस्थान में एक और मंत्री सहित और 3093 लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की शुक्रवार को पुष्टि हुई हैं राज्य में अभी तक कुल 2,60,040 लोग संक्रमित हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में संक्रमण से और 18 लोगों की मौत हो गई जिससे राज्य में संक्रमण से कुल मरने वालों का आंकड़ा 2,255 तक पहुंच गया। शुक्रवार को वनमंत्री सुखराम विश्नोई के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है, वह अस्पताल में भर्ती हैं। अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार शाम छह बजे तक के बीते 24 घंटों में राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण से 18 और मौत हुई हैं। जिससे मरने वालों की संख्या अब बढ़कर 2,255 हो गयी। कोरोना वायरस संक्रमण से अब तक जयपुर में 426, जोधपुर में 230, अजमेर में 181, बीकानेर में 160, कोटा में 133, भरतपुर में 103, उदयपुर में 90, और पाली में 85 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक कुल 2,29,602 लोग कोरोना वायरस संक्रमण से मुक्त हुए हैं। इसके साथ ही शुक्रवार को संक्रमण के 3,093 नये मामले सामने आने से राज्य में इस घातक वायरस से संक्रमितों की अब तक की कुल संख्या 2,60,040 हो गयी जिनमें से 28,183 रोगी उपचाराधीन हैं।

इसे भी पढ़ें: महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के 6,185 नये मामले, 85 लोगों की मौत

हरियाणा में कोविड-19 से 29 और लोगों की मौत, 2,135 नए मामले

हरियाणा में शुक्रवार को कोरोना वायरस संक्रमण से 29 और लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद इस खतरनाक संक्रमण से मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,345 हो गई। वहीं संक्रमण के 2,135 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2,28,746 हो गई। राज्य स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी दैनिक बुलेटिन में बताया गया कि फरीदाबाद में पांच, गुरुग्राम और रोहतक जिले में चार-चार और हिसार तथा फतेहाबाद जिलों में तीन-तीन लोगों की मौत हुई। वहीं गुरुग्राम में 698, फरीदाबाद में 468, हिसार में 157 और रोहतक में 104 नए मामले सामने आए हैं। हरियाणा में अभी 20,400 लोगों का इलाज चल रहा है और कोविड-19 से स्वस्थ होने की दर 90.06 फीसदी है।