जब तुफान में उड़ गई थी टिन की छत, आज हैं आलीशान घर के मालिक पंकज त्रिपाठी

By रेनू तिवारी | Publish Date: Apr 15 2019 2:33PM
जब तुफान में उड़ गई थी टिन की छत, आज हैं आलीशान घर के मालिक पंकज त्रिपाठी
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पंकज त्रिपाठी का जन्म बिहार के गोपालगंज में बेलसंद के एक छोटे से गांव में हुआ था। पंकज त्रिपाठी के पिता एक छोटे से किसान और धार्मिक स्वभाव वाले व्यक्ति हैं।

कहते हैं कि जिसके पास काबिलियत होती है उसे किसी सिफारिस की जरूरत नहीं होती, बस मन में आत्मविश्वात और लगन होनी चाहिए, किसी भी चीज को पाने की। फिर देखना वो आपको कैसे मिलती हैं। कुछ ऐसा ही है फिल्म इंडस्ट्री का एक चेहरा.... जिसकी कहानी टीवी टीआरपी के लिए नहीं हैं। न की घडियाल के आंसू बहाकर सहानुभूति पाने के लिए है। ये कहानी हैं उस लोगों के लिए, जो मुश्किल भरे दौर से निराश हो गये है। ये कहानी हैं जबरदस्त कलाकार और डिजीटल दुनिया में 'कालीन भैया' के नाम से पहचाने जाने वाले पंकज त्रिपाठी की।

पंकज त्रिपाठी का जन्म बिहार के गोपालगंज में बेलसंद के एक छोटे से गांव में हुआ था। पंकज त्रिपाठी के पिता एक छोटे से किसान और धार्मिक स्वभाव वाले व्यक्ति हैं। 42 साल के पंकज त्रिपाठी एक्टिंग के प्रति रुझान बचपन से ही था। वो दोस्तों के साथ खेल- खेल में अभिनय करते थे। पंकज त्रिपाठी अपने गांव में होने वाले छठ महोत्सव के कार्यक्रम में वह एक लड़की की भूमिका निभाया करते थे। एक्टिंग का दयरा पंकज त्रिपाठी के लिए केवल गांव तक ही सीमित क्योंकि पंकज त्रिपाठी 10 वीं क्लास तक फिल्मों से बिलकुल परिचित नहीं थे क्योंकि उनके पास टीवी नहीं था और नजदीकी रंगमंच उनके गांव से 20 किलोमीटर दूर था।

दसवी के बाद प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद, उनके पिता ने उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए पटना भेज दिया था।  पंकज त्रिपाठी जब पटना में थे तब वह कला की ओर काफी आकर्षित हुए, जिसके चलते उन्होंने कई नाटक कार्यक्रमों और सिनेमाघरों का दौरा करना शुरू किया, जिसके कारण वह धीरे-धीरे अभिनय के प्रति मोहित हो गए। वह राह चलते साईकिल वालों, ऑटो वालों और छोटे-मोटे कलाकारों से मित्रता कर लेते थे और उनसे अपने अभिनय के बारे में राय मांगते थे। साल 1995 में, उन्हें पहली बार भीष्म साहनी की कहानी पर आधारित नाटक “लीला नंदलाल” में देखा गया, जिसे विजय कुमार द्वारा निर्देशित किया गया था। जहाँ नाटक में उन्हें एक स्थानीय चोर की बहुत छोटी भूमिका दी गई थी। जिसे श्रोताओं और मीडिया द्वारा काफी सराहा गया था। इसके बाद  पंकज त्रिपाठी के कदम रूके नहीं वो लगातार संघर्ष करते रहे.. पकंज को कई फिल्मों से रिजेक्ट किया गया लेकिन वो लगातार ट्राई करते रहे। रूके नहीं धीरे- धीरे उन्हें बड़ी फिल्मों में छोटे छोटे रोल मिलने लगे... इस किरदारों को पकंज ने इस कदर निभाया की किरदारों में जान डाल दी। जिसके बाद गुलाल नाटक की शूटिंग के दौरान, उन्हें कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबरा ने अनुराग कश्यप की फिल्म “गैंग्स ऑफ़ वासेपुर” के ऑडिशन के लिए बुलाया। फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर में “सुल्तान” की भूमिका में उन्हें दर्शकों व आलोचकों की काफी सराहना मिली। पंकज त्रिपाठी ने फुकरे, मांझी : द माऊंटेन मैन और मसान जैसी फिल्मों में बेहतरीन अदाकारी से आलोचकों और दर्शकों से काफी सराहना प्राप्त की। 

बिहार के छोटे से गांव से निकले पकज को आज हर इंसान जानता हैं वो पकंज आज अपने एक्टिंग के दम पर फिल्में हिट करवा लेते है पंकज त्रिपाठी की ये जर्नी वकई प्रेरणादायक है। पंकज त्रिपाठी  ने हाल हीं में मुंबई के मड आइलैंड में एक घर खरीदा है नए घर को लेकर इमोशनल पंकज त्रिपाठी काफी इमोशनल हो गये। पकज ने कहा नये धर लेने के बाद मुझे अपने पुराने दिन याद आ गये।  उन्होंने कहा, 'आज मेरी पत्नी मृदुला और मैं अपने सपनों के घर में हैं, लेकिन मैं पटना में अपनी टिन की छत वाले एक कमरे को भूल नहीं पाया हूं। एक रात बारिश और हवा इतनी तेज थी कि टिन की एक चादर उड़ गई और मैं नंगे आसमान की तरफ देख रहा था।'


 
बिना छट के घर में रहे पंकज त्रिपाठी आज बॉलीवुड के दमदार कलाकारों में से एक है। पकंज त्रिपाठी की एक बात ये खास है कि पकंज को चाहने वाली ऑडियंस अलग है, जो उनके हुनर की दीवानी हैं।
 

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