गलवान घाटी पर ऋचा चड्ढा ने किया ट्वीट, जमकर मचा हंगामा, मांगनी पड़ी माफी

Richa Chadha
ANI
रेनू तिवारी । Nov 24, 2022 3:23PM
एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा ने माफी मांगते हुए गलवान घाटी पर किए अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया है। भारतीय सेना और गालवान घाटी की घटना के दौरान शहीद हुए जवानों का कथित रूप से 'मजाक' उड़ाने के बाद अभिनेत्री ने ट्विटर पर काफी हलचल मचाई और उन्हें कड़ी प्रतिक्रिया मिली।

एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा ने माफी मांगते हुए गलवान घाटी पर किए अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया है। भारतीय सेना और गालवान घाटी की घटना के दौरान शहीद हुए जवानों का कथित रूप से 'मजाक' उड़ाने के बाद अभिनेत्री ने ट्विटर पर काफी हलचल मचाई और उन्हें कड़ी प्रतिक्रिया मिली। अब घंटों बाद अभिनेत्री ने पोस्ट को हटा दिया और अपने ट्विट के लिए माफी मांगते हुए अपना बयान साझा किया।

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इसकी शुरुआत तब हुई जब ऋचा ने अपने ट्विटर टाइमलाइन पर नॉर्दर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी के बयान को फिर से शेयर किया और लिखा, "गलवान सेज हाय।" अभिनेत्री को कड़ी प्रतिक्रिया मिली और सोशल मीडिया उसको उनके शब्दों के लिए क्रूरता से ट्रोल किया गया। एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा के खिलाफ सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और ऑनलाइन कड़ी प्रतिक्रिया जारी रही, ट्विट करने के तुरंत बाद उन्होंने अपना अकाउंट प्राइवेट कर दिया और उसके बाद अपना माफी नामा साझा करते हुए उन्होंने सार्वजनिक रूप से एक नोट शेयर किया। 

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ऋचा ने इसको लेकर माफी मांगते हुए कहा कि ट्वीट से मेरा उद्देश्य सेना का अपमान करने का नहीं था। मेरे तीन शब्दों को विवाद में घसीटा गया। अगर किसी को भी बुरा लगा हो तो माफी चाहती हूं। उन्होंने कहा कि मेरे नानाजी खुद फौज में थे और लेफ्टिनेंट कर्नल की पोस्ट पर थे। भारत-चीन युद्ध में उनके पैर में गोली लगी थी। मेरे मामाजी भी पैराट्रूपर थे। ये मेरे खून में है। अगर सेना में कोई शहीद होता है तो उससे पूरा परिवार प्रभावित होता है। यहां तक कि अगर कोई सेना में घायल होता है तो भी दर्दनाक होता है। ये मेरे लिए एक भावनात्मक मुद्दा है।

बयान में लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा था, 'हम पाकिस्तान से पीओके वापस लेने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। हम सरकार के आदेशों का इंतजार कर रहे हैं। हम ऑपरेशन जल्दी पूरा करेंगे। इससे पहले अगर पाकिस्तान सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है, तो जवाब अलग होगा।' वे कल्पना भी नहीं कर सकते।"

सिनेमा इंसानी मनोरंजन का मात्र एक साधन हैं। व्यक्ति जब अपने काम से फ्री होता हैं और कुछ समय के लिए अपने दिमाग को रिलेक्स करना चाहता है तो वह फिल्में या ओटीटी देख लेता हैं। सिमेना हमारे समाज का ही कुछ हद तक आइना होता हैं। हमारे देश के असल हीरो जो देश के लिए अपनी जान का बलिदान करते हैं। सरहद पर जमी बर्फ में अपनी जिंदगी बिता देते हैं। रेगिस्तान की गर्मी में खड़े होकर हमें दुश्मन से बचा रहे हैं, जो देश की आजादी के लिए एक लंबी लड़ाई करते हैं, खौफनाक से खौफनाक बम-बारूद और गोलियों का सामना करते हैं। घर के अंदर बैठा आम इंसान को ऐसी के मजे ले रहा है और उन महान लोगों पर कमेंट कर रहा हैं... क्या आप उसकी बात को सीरीयस लेंगे? असल जिंदगी के महान लोगों के किरदार पर्दे पर निभा कर लाइमलाइट आने वाले क्या आपको लगता है कि असल संघर्ष की सच्चाई को समझ सकते हैं?

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