SEBI के प्रतिबंध के खिलाफ SAT जाएगी EKI Energy, 88 लाख का लगा है जुर्माना

कार्बन क्रेडिट कंपनी ईकेआई एनर्जी सर्विसेज ने बाजार नियामक सेबी के प्रतिबंध आदेश के खिलाफ प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील करने का फैसला किया है। नियामक ने वित्तीय विवरणों में गड़बड़ी और कथित फंड दुरुपयोग के मामले में कंपनी व उसके प्रबंध निदेशक मनीष डबकारा समेत अन्य पर कुल 88 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
नयी दिल्ली, तीन नवंबर कार्बन क्रेडिट कारोबार से जुड़ी कंपनी ईकेआई एनर्जी सर्विसेज ने मंगलवार को कहा कि वह बाजार नियामक सेबी के उस आदेश को प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) में चुनौती देने की तैयारी कर रही है जिसमें कंपनी और उसके प्रबंध निदेशक मनीष कुमार डबकारा समेत अन्य लोगों को प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित किया गया है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 30 अक्टूबर के अपने आदेश में वित्तीय विवरणों में गलत जानकारी देने और धन के कथित दुरुपयोग के मामले में ईकेआई एनर्जी को दो महीने, डबकारा को 12 महीने और तीन अन्य लोगों को एक से पांच महीने तक प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया था। इसके अलावा, नियामक ने प्रतिभूति बाजार के नियमों के उल्लंघन पर कंपनी, डबकारा और अन्य लोगों पर कुल 88 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
इसमें ईकेआई एनर्जी सर्विसेज पर 12 लाख रुपये और डबकारा पर 28 लाख रुपये का जुर्माना शामिल है। सेबी ने डबकारा को कंपनी से कथित तौर पर दूसरी जगह भेजी गई राशि वापस लाने के लिए तत्काल कदम उठाने का भी निर्देश दिया था। कंपनी ने इस संबंध में जारी अपने बयान में कहा कि वह सेबी और उसकी प्रक्रियाओं का सम्मान करती है और सैट में अपील करना उसी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।
कंपनी ने यह भी कहा कि सेबी के अंतिम आदेश में खर्चों से जुड़ी आपत्तियों को कारण बताओ नोटिस में बताए गए 48 करोड़ रुपये से घटाकर 26.34 करोड़ रुपये कर दिया गया है। कंपनी के मुताबिक, नियामक ने उसके दस्तावेजों की जांच के बाद शेष राशि को वास्तविक खर्च माना है। कंपनी के मुताबिक, सेबी ने 26.34 करोड़ रुपये के खर्चों के संबंध में कहा है कि ईकेआई यह साबित नहीं कर पाई कि कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय, आयकर विभाग और स्वतंत्र विशेषज्ञों को दिए गए दस्तावेज ही उसने सेबी के समक्ष भी पेश किए थे।
कंपनी ने कहा कि वह इस संबंध में साक्ष्य न्यायाधिकरण के सामने रखेगी। डबकारा ने कहा कि कंपनी न्यायाधिकरण के समक्ष सभी दस्तावेज रखेगी और उसे विश्वास है कि पूरा रिकॉर्ड उसके पक्ष का समर्थन करेगा। कंपनी ने कहा कि संबंधित अवधि में प्रवर्तकों ने अपनी हिस्सेदारी नहीं बेची और उनकी हिस्सेदारी 73.4 से 73.5 प्रतिशत के बीच बनी रही।
कंपनी के मुताबिक, सेबी के आदेश में यह भी नहीं कहा गया है कि कथित तौर पर दूसरी जगह भेजी गई कोई राशि प्रबंध निदेशक, प्रवर्तकों या उनके रिश्तेदारों तक पहुंची थी।
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