India-EU FTA पर बोले गोयल- European ऑटो कंपनियां भारत में लगाएंगी प्लांट, बढ़ेंगे रोजगार

FTA
ANI
अभिनय आकाश । Jan 30 2026 4:15PM

भारत का विकसित देश बनने का सपना साकार होने के करीब आ रहा है। भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र पर भारत-यूरोपीय संघ टैरिफ के प्रभाव के बारे में बोलते हुए मंत्री ने कहा भारतीय ऑटो उद्योग असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। हमने 25-30 लाख रुपये तक की कीमत वाली कारों के लिए बाजार नहीं खोला है। हमने ऑटो उद्योग को पूरी तरह से संरक्षित किया है।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) को लेकर कांग्रेस पार्टी के रवैये पर जमकर निशाना साधा। भारत-यूरोपीय संघ के एफटीए पर जयराम रमेश के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए गोयल ने उनकी प्रतिक्रिया को "अंगूर खट्टे हैं" कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पार्टी 2006 में चर्चा शुरू करने और 2007 में इसे आगे बढ़ाने के बावजूद समझौते को अंतिम रूप देने में विफल रही। गोयल ने रमेश की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें "विकास-विरोधी" माना जाता है और पर्यावरण मंत्री के रूप में उन्होंने देश के विकास पथ को अवरुद्ध किया है। मंत्री गोयल ने कांग्रेस पार्टी से अपने कार्यों का हिसाब मांगा और पूछा कि चीन के साथ एफटीए पर विचार करके उन्होंने भारत के हितों को कैसे खतरे में डाला। उन्होंने सवाल उठाया कि पार्टी ने भारत को क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) में शामिल होने की अनुमति कैसे दी, जो वास्तव में चीन और भारत के बीच एक एफटीए ही था।

एएनआई से बात करते हुए गोयल ने कहा, "ये तो अंगूर खाते हैं वाली कहानी है। 2006 में बातचीत शुरू हुई, 2007 में आगे बढ़ी और 2013 में छोड़ दी गई। उनमें समझौते को अंतिम रूप देने का साहस या इच्छाशक्ति तक नहीं थी। डर के मारे यूपीए और कांग्रेस सरकारें कभी भी निर्णायक कदम नहीं उठा सकीं। और जयराम रमेश को तो विकास विरोधी माना जाता है, आप देख चुके हैं। पर्यावरण मंत्री रहते हुए उन्होंने देश के विकास की राह रोक दी। कांग्रेस पार्टी का रिकॉर्ड इतना खराब है। जयराम रमेश जैसे दोस्त और कांग्रेस जैसी पार्टियां भारत को चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में शामिल होने के लिए उकसा रही थीं। मैं उनसे सीधे पूछना चाहता हूं: आपने भारत को आरसीईपी में शामिल होने देने के बारे में सोचा भी कैसे, जो असल में चीन और भारत के बीच एक एफटीए था? आपने भारत को खतरे में डालने का साहस कैसे किया? यह कांग्रेस की एक गंभीर गलती थी। कांग्रेस को जनता को जवाब देना होगा कि वे चीन के साथ एफटीए के जरिए भारत के हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए कैसे तैयार हो गए। यही है कांग्रेस का रिकॉर्ड।"

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का सबसे अधिक प्रभाव प्रीमियम ऑटोमोबाइल सेगमेंट पर पड़ने की उम्मीद है, साथ ही इससे अन्य क्षेत्रों के लिए भी विकास के नए रास्ते खुलेंगे। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि यूरोपीय ऑटोमोबाइल निर्माता यह अच्छी तरह समझते हैं कि भारत में विनिर्माण अधिक लाभदायक है, और इससे अंततः भारत में अधिक रोजगार सृजित होंगे। एएनआई से बातचीत में गोयल ने कहा, जैसे-जैसे हम विकसित देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय समझौते कर रहे हैं, भारत का विकसित देश बनने का सपना साकार होने के करीब आ रहा है। भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र पर भारत-यूरोपीय संघ टैरिफ के प्रभाव के बारे में बोलते हुए मंत्री ने कहा भारतीय ऑटो उद्योग असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। हमने 25-30 लाख रुपये तक की कीमत वाली कारों के लिए बाजार नहीं खोला है। हमने ऑटो उद्योग को पूरी तरह से संरक्षित किया है।

इसे भी पढ़ें: 'अंगूर खट्टे हैं', Jairam Ramesh पर Piyush Goyal का तंज, पूछा- China को क्यों पहुंचा रहे थे फायदा?

गोयल ने यूपीए सरकार के कार्यकाल में हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और हाल ही में हस्ताक्षरित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के बीच अंतरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के रिकॉर्ड की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी द्वारा जापान और कोरिया के साथ किए गए पिछले एफटीए से भारत को कोई लाभ नहीं हुआ है। गोयल ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने जापान और कोरिया के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) किया था। वह एफटीए इतना खराब था कि उन देशों को हमारा निर्यात बिल्कुल भी नहीं बढ़ा। जिन उत्पादों पर उन्होंने हमें शुल्क में छूट दी थी, वे उन बाजारों तक पहुंच ही नहीं रहे हैं, जबकि भारत में उनका आयात दोगुना हो गया है... यहां, भारत से निर्यात होने वाली 99% वस्तुओं पर शून्य शुल्क लगेगा। हमने संतुलित एफटीए पर बातचीत की है। हमने विकसित देशों के साथ अपनी शर्तों पर भी एफटीए पर हस्ताक्षर किए हैं... लेकिन कांग्रेस सरकार के विपरीत, हम उन देशों के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर नहीं करते जो हमसे प्रतिस्पर्धा करते हैं या जिनकी श्रम लागत कम है और जो हमारे निर्माताओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

All the updates here:

अन्य न्यूज़