Middle East संकट का असर: Crude Oil में उबाल से Stock Market धराशायी, Sensex और Nifty के प्रमुख सेक्टर्स में भारी गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारत के व्यापार घाटे और मुद्रास्फीति पर पड़ने वाला संभावित असर बाजार की धारणा को कमजोर कर रहा है। सभी 16 प्रमुख क्षेत्रों में बिकवाली का दबाव यह दर्शाता है कि निवेशक वर्तमान वैश्विक अनिश्चितता के बीच अत्यंत सतर्क रुख अपना रहे हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था, स्टॉक मार्केट न्यूज, क्रूड ऑयल इम्पैक्ट, बिजनेस एनालिसिस।
घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही और शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों को बड़ी गिरावट का सामना करना पड़ा हैं। मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने का सीधा असर घरेलू बाजार पर देखने को मिला है। बता दें कि भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल आयात करने वाले देशों में शामिल है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों पर पड़ता है।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 512.07 अंक की गिरावट के साथ 75,869.38 अंक पर खुला। वहीं निफ्टी भी 153 अंक टूटकर 23,713.60 अंक पर पहुंच गया। मौजूद जानकारी के अनुसार सुबह करीब 9 बजकर 15 मिनट तक सेंसेक्स 0.89 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,708.19 अंक पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 0.85 प्रतिशत फिसलकर 23,666.35 अंक पर पहुंच गया है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इस गिरावट की बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद ईरान और हूती समूह के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी हैं। इसके बाद वैश्विक बाजारों में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो भारत के लिए कई आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। इससे महंगाई बढ़ने, व्यापार घाटा बढ़ने और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव आने की आशंका रहती हैं। यही वजह है कि विदेशी और घरेलू निवेशकों सतर्क दिख रहे हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार बाजार के सभी 16 प्रमुख क्षेत्रों में गिरावट दर्ज की गई हैं। छोटे और मझोले आकार की कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे और दोनों प्रमुख सूचकांक करीब 0.6 प्रतिशत तक नीचे कारोबार करते दिखाई दिए। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इन्फोसिस के शेयर में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि विमानन क्षेत्र की कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के शेयर भी करीब 1.5 प्रतिशत टूट गए। इन कंपनियों के हालिया तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों की प्रतिक्रिया कमजोर रही है।
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