Mobile Manufacturing का हब बना भारत, 99% मोबाइल अब 'Made in India', 12 साल में उत्पादन 7 गुना बढ़ा

इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में सात गुना और निर्यात में ग्यारह गुना की वृद्धि भारत की बढ़ती विनिर्माण क्षमता और नीतिगत सुधारों के विश्लेषणात्मक प्रभाव को रेखांकित करती है। वर्तमान में देश में उपयोग होने वाले शत प्रतिशत के करीब मोबाइल फोन का घरेलू निर्माण और स्मार्टफोन निर्यात का पेट्रोलियम क्षेत्र से आगे निकलना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से भारत अब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय भागीदार की भूमिका निभा रहा है।
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ा है। केंद्र सरकार का कहना है कि बीते 12 वर्षों में इस क्षेत्र ने उत्पादन, निर्यात और रोजगार के मामले में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। लोकसभा में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार अब देश में इस्तेमाल होने वाले लगभग सभी मोबाइल फोन भारत में ही बनाए जा रहे हैं।
बता दें कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि वर्तमान समय में भारत में उपयोग किए जाने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन देश के भीतर ही निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्पादन के लिहाज से भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बन चुका है।
मौजूद जानकारी के अनुसार वर्ष 2014-15 में देश का कुल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर लगभग 13.11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यानी इस अवधि में उत्पादन में लगभग सात गुना वृद्धि दर्ज की गई। इसी दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी करीब 38 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो लगभग 11 गुना बढ़ोतरी को दर्शाता है।
मोबाइल निर्माण के क्षेत्र में सबसे अधिक वृद्धि देखने को मिली है। सरकार के अनुसार वर्ष 2014-15 में मोबाइल फोन का उत्पादन करीब 18 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 6.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं मोबाइल फोन का निर्यात करीब 1,500 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.59 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह लगभग 165 गुना की वृद्धि मानी जा रही है।
गौरतलब है कि सरकार का कहना है कि अब स्मार्टफोन भारत का सबसे बड़ा एकल निर्यात उत्पाद बन चुका है। इसने पेट्रोलियम उत्पादों और रत्न एवं आभूषण जैसे पारंपरिक निर्यात क्षेत्रों को भी पीछे छोड़ दिया है। भारत से अब स्मार्टफोन के अलावा सौर ऊर्जा मॉड्यूल, व्यक्तिगत कंप्यूटर और मुद्रित परिपथ पट्टिकाओं का भी निर्यात किया जा रहा है। अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, चीन, नीदरलैंड और हांगकांग प्रमुख निर्यात बाजारों में शामिल हैं।
सरकार ने यह भी बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र से देश में करीब 25 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। केवल मोबाइल निर्माण उद्योग में ही लगभग 12 लाख लोगों को रोजगार मिला है। कई उच्च तकनीक वाले मोबाइल निर्माण संयंत्रों में महिलाओं की भागीदारी भी काफी बढ़ी है और कुछ इकाइयों में लगभग 70 प्रतिशत महिलाएं काम कर रही हैं।
बता दें कि सरकार ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण समूह योजना, इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों और अर्धचालक प्रोत्साहन योजना, अर्धचालक कार्यक्रम और शत-प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश जैसी कई नीतियां लागू की हैं। इसके साथ ही 1.27 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले सेमिकॉन 2.0 कार्यक्रम और मोबाइल फोन निर्माण योजना के जरिए देश में घरेलू मूल्य संवर्धन, अनुसंधान, डिजाइन और उन्नत विनिर्माण क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
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