IndiGo MD Rahul Bhatia ने विमानन क्षेत्र में टैक्स कटौती और शुल्क कम करने की अपील की

देश की अग्रणी एयरलाइन इंडिगो के प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया ने नयी दिल्ली में सरकार से विमानन क्षेत्र पर लागू करों में कटौती और हवाई अड्डा शुल्कों को तर्कसंगत बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हवाई किरायों में कमी होने से देश में यात्रा की भारी मांग पैदा हो सकती है। इसके साथ ही भाटिया ने कॉकपिट उत्पादकता बढ़ाने के लिए उड़ान ड्यूटी समयसीमा नियमों की समीक्षा की भी मांग रखी।
देश की अग्रणी एयरलाइन इंडिगो के प्रबंध निदेशक (एमडी) राहुल भाटिया ने सरकार से विमानन क्षेत्र में लागू करों में कटौती और हवाई अड्डा शुल्कों को तर्कसंगत बनाने की अपील करते हुए कहा है कि किराये कम होने पर देश में ‘भारी’ मांग पैदा हो सकती है। भाटिया ने पीटीआई-के साथ बातचीत में कहा कि एक तरफ हवाई यात्रा को सार्वजनिक उपयोगिता वाली चीज बताया जाता है, वहीं इस पर कर इस तरह लगाए जाते हैं मानो यह अभिजात्य वर्ग का परिवहन हो। उन्होंने कहा कि भारतीय एयरलाइन कंपनियां विभिन्न करों एवं शुल्कों की वजह से लागत बढ़ने का बोझ काफी हद तक खुद ही वहन करती हैं और आखिर में इसका बोझ यात्रियों पर डाला जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले तीन वर्षों में महंगाई 12 प्रतिशत बढ़ी है लेकिन एयरलाइंस के मूल किराये केवल एक से तीन प्रतिशत ही बढ़े हैं। इसके विपरीत, हवाई अड्डा उपयोगकर्ता विकास शुल्क (यूडीएफ) में 95 प्रतिशत और लैंडिंग एवं पार्किंग शुल्क में 34 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो गई है।’’ उन्होंने कहा कि विमानन ईंधन (एटीएफ) एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत का करीब 40 प्रतिशत होता है और हाल के समय में तेल कीमतों में तेजी एवं पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण उड़ान समय बढ़ने से लागत और बढ़ गई है। इसके बावजूद एयरलाइंस किराये के मोर्चे पर प्रतिस्पर्धी बने रहने की कोशिश कर रही हैं।
भाटिया ने कहा कि भारतीय उपभोक्ता मूल्य को लेकर बहुत संवेदनशील हैं और किराये में कमी होने की स्थिति में यात्रा मांग में बड़ा उछाल आ सकता है। इसके साथ ही भाटिया ने उड़ान ड्यूटी समयसीमा (एफडीटीएल) नियमों की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि मौजूदा नियम कॉकपिट उत्पादकता को कम करने के साथ लागत बढ़ाते हैं, जिससे भारतीय विमानन क्षेत्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहा है। उन्होंने कहा कि एयरलाइंस सुरक्षा मानकों में किसी तरह की ढील नहीं चाहती हैं लेकिन पायलट के उड़ान ड्यूटी संबंधी नियम वैश्विक सर्वोत्तम व्यवहार के अनुरूप होने चाहिए।
इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी को लेकर उठ रही चिंताओं पर भाटिया ने कहा कि यह धारणा गलत है कि एयरलाइन बहुत बड़ी हो गई है। उन्होंने बताया कि एयरलाइन की लगभग 34 प्रतिशत क्षमता 250 ऐसे शहरों के बीच लगाई गई है, जहां उसने नए बाजार विकसित किए हैं। प्रतिस्पर्धी बाजारों में इसकी हिस्सेदारी करीब 40-44 प्रतिशत के बीच है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह करीब 20 प्रतिशत है।
इंडिगो रोजाना 2,100 से अधिक उड़ानें संचालित करती है और उसके बेड़े में 400 से ज्यादा विमान हैं। उन्होंने कहा कि विमानन उद्योग कम मार्जिन वाला कारोबार है, जहां लागत में मामूली बदलाव भी बड़ा असर डालता है। उन्होंने कहा कि सरकार, एयरलाइंस और हवाई अड्डा संचालकों के संयुक्त प्रयास से ही भारत के तेजी से बढ़ते विमानन बाजार की संभावनाओं को पूरी तरह साकार किया जा सकता है।
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