PM Modi Video Block Controversy: टेक्निकल ग्लिच या एल्गोरिदम की आड़ में Meta कर रहा मनमानी?

मेटा की ओर से साफ किया गया कि ये किसी सरकारी आदेश या कानूनी कार्रवाई का मामला नहीं था बल्कि टेक्निकल ग्लिच की वजह से ऐसा हुआ था। कंपनी ने इस गलती के लिए सरकार से माफी भी मांगी। मामला सामने आने के बाद भाजपा ने मेटा पर निशाना साधा। केंद्र सरकार ने इस घटना को बहुत गंभीरता से लिया है और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा और इंस्टाग्राम के ग्लोबल प्रमुखों को समन जारी किया है।
पीएम मोदी का जेन-जी वाला वीडियो फेसबुक से गायब हो गया था। कुछ घंटों तक यूजर्स को सिर्फ ये मैसेज दिख रहा था कि लीगल रिक्वेस्ट के कारण ये वीडियो अब आपके एरिया में उपलब्ध नहीं है। इसके बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि क्या भारत में ही प्रधानमंत्री का वीडियो ब्लॉक कर दिया गया है? मामला बढ़ने के बाद मेटा की ओर से सफाई आई और उसके बाद वीडियो भी वापस आया और कहा गया कि टेक्निकल ग्लिच था और मेटा की तरफ से माफी भी मांगी गई। हुआ ये था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपना सेल्फी जेन-जी वीडियो फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया था। इस वीडियो में उन्होंने युवाओं से संवाद किया और नीट समेत जो बाकी कंपटेटिव एग्जाम और पेपर लीक की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार इसके खिलाफ सख्त कदम उठाने जा रही है। उन्होंने ये भी कहा कि अगले कैबिनेट में इस विषय पर महत्वपूर्ण फैसले भी हमारी कैबिनेट लेगी। लेकिन मंगलवार तड़के 1:25 मिनट के करीब कई यूजर्स जब ये वीडियो देख रहे थे तो स्क्रीन पर नजर आ रहा था कि लीगल रिक्वेस्ट के कारण ये वीडियो अब उपलब्ध नहीं है। वीडियो के साथ एक ऑप्शन See Why का आता है यानी क्यों ये वीडियो उपलब्ध नहीं है? उस पर क्लिक करने पर यही जानकारी दिखाई दे रही थी। हालांकि नोटिस में ये नहीं बताया गया था कि किस कानून या किस सरकारी एजेंसी के रिक्वेस्ट पर वीडियो को ब्लॉक किया गया था। कुछ ही घंटों में फेसबुक पर वीडियो दोबारा से लौट आया। मेटा की ओर से साफ किया गया कि ये किसी सरकारी आदेश या कानूनी कार्रवाई का मामला नहीं था बल्कि टेक्निकल ग्लिच की वजह से ऐसा हुआ था। कंपनी ने इस गलती के लिए सरकार से माफी भी मांगी। मामला सामने आने के बाद भाजपा ने मेटा पर निशाना साधा। केंद्र सरकार ने इस घटना को बहुत गंभीरता से लिया है और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा और इंस्टाग्राम के ग्लोबल प्रमुखों को समन जारी किया है।
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बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों के मामले में मेटा को किया गया था तलब
जुलाई की शुरुआत में मेटा सरकार की नज़र में आ गया। BBC की एक जांच में पता चला कि Instagram यूज़र्स को ऐसे विज्ञापन और कंटेंट दिखा रहा था जो बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा देते थे। बीबीसी-आई की एक पड़ताल में पाया गया है कि इंस्टाग्राम भारत में पैसे लेकर ऐसे विज्ञापन चला रहा है, जिनके ज़रिए बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का प्रसार हो रहा है। इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को मेटा से स्पष्टीकरण मांगने और उसे तलब करने का निर्देश दिया।
WhatsApp के Username फीचर पर रोक
जुलाई में भारत ने WhatsApp के उस नए फ़ीचर को रोल आउट करने पर रोक लगाने का आदेश दिया था, जिससे यूज़र्स यूनीक यूज़रनेम का इस्तेमाल करके चैट कर सकते थे। इसकी वजह यह थी कि इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी और फ़िशिंग स्कैम बढ़ सकते थे। ऐसा इसलिए था क्योंकि WhatsApp का यूज़रनेम फ़ीचर लोगों को अपना फ़ोन नंबर बताए बिना चैट करने की सुविधा देता। भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एक नोटिस में WhatsApp से पूछा है कि साइबर अपराध बढ़ाने वाले फ़ीचर को लॉन्च करने के लिए भारतीय क़ानून के तहत उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई क्यों न की जाए। मंत्रालय ने यह भी कहा कि उसे लगता है कि यह फ़ीचर "ऑनलाइन धोखाधड़ी, फ़िशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और किसी और का रूप धरकर किए जाने वाले हमलों" की घटनाओं को काफ़ी बढ़ा सकता है, क्योंकि इससे अपराधी अपना फ़ोन नंबर बताए बिना संभावित पीड़ितों से संपर्क कर सकते हैं। इसके जवाब में WhatsApp ने एक बयान में कहा कि यह फ़ीचर अभी लाइव नहीं हुआ है और इसमें सुरक्षा के उपाय किए गए हैं, जैसे कि हाई-प्रोफ़ाइल यूज़रनेम को सुरक्षित रखना और किसी और का रूप धरने या धोखाधड़ी का पता लगाने के तरीक़े शामिल करना।
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जुकरबर्ग ने 2024 के चुनाव में किया बीजेपी की हार का दावा! मेटा ने मांगी माफी
पिछले साल जनवरी में मेटा ने भारत से भी माफ़ी मांगी थी। यह माफ़ी तब मांगी गई जब CEO मार्क ज़करबर्ग ने जो रोगन के पॉडकास्ट पर 2024 के भारतीय चुनावों के नतीजों को लेकर टिप्पणी की, जिससे विवाद खड़ा हो गया था। ज़करबर्ग ने दावा किया था कि भारत समेत कई देशों में कोविड के बाद हुए चुनावों में मौजूदा सरकारों को सत्ता गंवानी पड़ी। भारतीय सरकारी अधिकारियों ने तुरंत इस दावे का खंडन किया। ज़करबर्ग की टिप्पणियों पर ध्यान देते हुए, IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत के 2024 के चुनाव मौजूदा सरकार के लिए बहुत बड़ी कामयाबी रहे, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) ने निर्णायक रूप से तीसरा कार्यकाल हासिल किया। वैष्णव ने 64 करोड़ से ज़्यादा लोगों के भारी मतदान का ज़िक्र किया और ज़करबर्ग की बातों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया। इस टिप्पणी के बाद, मेटा इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट शिवनाथ ठुकराल ने एक्स पर लिखा कि मार्क की यह बात कि 2024 के चुनावों में कई मौजूदा सरकारें दोबारा नहीं चुनी गईं, कई देशों के लिए तो सही है, लेकिन भारत के लिए नहीं। ठुकराल ने इस टिप्पणी को अनजाने में हुई गलती बताते हुए खेद जताया और दोहराया कि भारत मेटा के लिए एक अहम बाज़ार बना हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि हम इस अनजाने में हुई गलती के लिए माफ़ी मांगना चाहते हैं। भारत मेटा के लिए बेहद महत्वपूर्ण देश है और हम इसके इनोवेटिव भविष्य का अहम हिस्सा बनने के लिए उत्सुक हैं। मेटा के लिए, भारत सरकार और न्यायपालिका के साथ ये टकराव अच्छे संकेत नहीं हैं। स्टेटिस्टा के डेटा के अनुसार, 2025 तक भारत में इंस्टाग्राम के सबसे ज़्यादा यूज़र्स (480 मिलियन से ज़्यादा) हैं, जो अमेरिका के मुक़ाबले दोगुने से भी ज़्यादा हैं। यहाँ फ़ेसबुक के भी 400 मिलियन से ज़्यादा यूज़र्स हैं, जो दुनिया में सबसे ज़्यादा हैं। देश में WhatsApp की भी मज़बूत मौजूदगी है, जिसके लगभग 853 मिलियन यूज़र्स हैं।
WhatsApp को भारत छोड़ने की 'सुप्रीम' चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp और उसकी पेरेंट कंपनी Meta को साफ चेतावनी दी। अदालत ने कहा कि नागरिकों की प्राइवेसी के अधिकार के साथ कोई कंपनी खेल नहीं सकती। यहां तक कहा गया कि अगर नियम नहीं मान सकते, तो भारत छोड़ने का विकल्प भी खुला है। इस विवाद की जड़ WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी थी। WhatsApp सालों से यह कहता आ रहा है कि उसके मैसेज End-To-End Encrypted (E2EE) हैं और कोई तीसरा शख्स उन्हें नहीं पढ़ सकता। लेकिन समस्या मैसेज के कंटेंट की नहीं, बल्कि यूज़र डेटा की है। इसी साल फरवरी के महीने में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान जजों ने WhatsApp के रवैये पर सीधी आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि WhatsApp यूज़र्स को यह नहीं कह सकता कि पॉलिसी मानो या ऐप छोड़ दो। इस मामले की सुनवाई के दौरान, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि WhatsApp की मोनोपॉली (एकाधिकार) के कारण यूज़र्स के पास कोई वास्तविक विकल्प नहीं बचता है और उन्होंने इसके डेटा से जुड़े तौर-तरीकों की तुलना "निजी जानकारी की चोरी" से की। सीजेआई ने आगे कहा था कि आप इस देश के संवैधानिक मूल्यों का मज़ाक उड़ा रहे हैं। हम इसे तुरंत खारिज कर देंगे। आप लोगों के निजता के अधिकार के साथ इस तरह कैसे खिलवाड़ कर सकते हैं? कंज्यूमर के पास कोई विकल्प नहीं है। आपने एकाधिकार बना लिया।
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