Mukesh Ambani का एक फैसला और बाजार में हरियाली, Reliance की तेजी ने निवेशकों को किया खुश।

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को तेजी का मुख्य कारण रिलायंस इंडस्ट्रीज रही, जिसके शेयरों में मेटा के साथ डेटा सेंटर स्थापित करने की घोषणा के बाद लगभग 2.5% का उछाल आया। इस घरेलू सकारात्मकता ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों जैसे वैश्विक नकारात्मक संकेतों को बेअसर कर दिया, हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में दबाव देखा गया।
वैश्विक बाजारों में दबाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। देश के प्रमुख शेयर सूचकांकों ने शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज की, जिसमें सबसे बड़ा योगदान मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों का रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार कारोबार शुरू होने के कुछ ही समय बाद संवेदनशील सूचकांक 436 अंकों तक चढ़ गया, जबकि राष्ट्रीय सूचकांक 23,350 के स्तर तक पहुंच गया। सुबह करीब 9 बजकर 27 मिनट पर संवेदनशील सूचकांक 358 अंकों की बढ़त के साथ 74,272 पर कारोबार कर रहा था, जबकि राष्ट्रीय सूचकांक 89 अंकों की तेजी के साथ 23,330 के आसपास बना हुआ था।
गौरतलब है कि भारतीय बाजार की यह मजबूती ऐसे समय में देखने को मिली है जब अधिकांश एशियाई बाजार गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य कार्रवाई होने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच चल रही वार्ताओं के बावजूद शांति समझौते की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं होने से निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई है।
इसी तनाव का असर ऊर्जा बाजार पर भी देखने को मिला है। बता दें कि कच्चे तेल की कीमतें बुधवार को बढ़कर 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। एक दिन पहले अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चा तेल करीब 89 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल गया था, लेकिन बाद में इसमें तेज उछाल आया और कीमतें 93 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय मानी जाती हैं।
हालांकि इन वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय निवेशकों का रुख सकारात्मक बना रहा। राष्ट्रीय शेयर विनिमय के प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांकों में से अधिकांश बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। विशेष रूप से उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र से जुड़ा सूचकांक सबसे अधिक मजबूत रहा और इसमें करीब 1.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा बैंकिंग, निजी बैंक, वित्तीय सेवाएं, तेल एवं गैस तथा उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं से जुड़े क्षेत्र भी मजबूत बने रहे हैं।
दूसरी ओर मेटल, वाहन, औषधि और कुछ सरकारी बैंकिंग कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला है। मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी अपेक्षाकृत कमजोरी रही। मध्यम आकार की कंपनियों का सूचकांक हल्की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि छोटी कंपनियों का सूचकांक भी लाल निशान में रहा है।
बाजार की सबसे बड़ी चर्चा रिलायंस इंडस्ट्रीज रही। कंपनी के शेयरों में करीब 2.5 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई और भाव 1,300 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। इसकी वजह मेटा और रिलायंस के बीच घोषित नई साझेदारी रही है।
गौरतलब है कि मेटा, जिसकी स्थापना मार्क जुकरबर्ग ने की थी, भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विशाल डाटा केंद्र स्थापित करने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ मिलकर काम करेगी। मौजूद जानकारी के अनुसार गुजरात के जामनगर में 168 मेगावाट क्षमता वाला डाटा केंद्र बनाया जाएगा। इस परियोजना का निर्माण रिलायंस करेगी और मेटा इसका उपयोग करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
रिलायंस के अलावा नेस्ले इंडिया, हिंदुस्तान यूनिलीवर, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, एशियन पेंट्स, ट्रेंट, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक और अपोलो हॉस्पिटल्स के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली है। वहीं हिंडाल्को, अदाणी एंटरप्राइजेज, कोल इंडिया, टाटा स्टील, अदाणी पोर्ट्स, टाटा मोटर्स और श्रीराम फाइनेंस के शेयर दबाव में रहे हैं।
मौजूद आंकड़ों के अनुसार बाजार का समग्र रुख सकारात्मक रहा। राष्ट्रीय शेयर विनिमय पर 1,474 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, जबकि 1,276 शेयरों में गिरावट देखने को मिली है। इससे स्पष्ट है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू निवेशकों का भरोसा फिलहाल भारतीय बाजार में बना हुआ है।
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