पेटीएम का पहली तिमाही में मुनाफा 79 प्रतिशत बढ़कर 220 करोड़ हुआ, बोनस शेयर का प्रस्ताव फिलहाल टला

Indian Officials Announce Economic Growth
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पेटीएम की मूल कंपनी वन 97 कम्युनिकेशंस ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 220 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है। कंपनी की कर पूर्व आय में भी भारी उछाल आया है, हालांकि बोर्ड ने अभी बोनस शेयर न देने का फैसला लिया है।

डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाओं के प्रमुख मंच पेटीएम की मूल कंपनी वन 97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय परिणाम जारी कर दिए हैं। इस तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 79 प्रतिशत की बढ़त के साथ 220 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इसके साथ ही कंपनी ने 203 करोड़ रुपये की अब तक की सबसे अधिक कर पूर्व आय (ईबीआईटीडीए) भी दर्ज की है, जो कंपनी के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन को दर्शाता है।

सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में पेटीएम ने बताया कि अप्रैल-जून तिमाही में उसका परिचालन राजस्व सालाना आधार पर 28 प्रतिशत बढ़कर 2,448 करोड़ रुपये हो गया है। कंपनी की कर पूर्व आय (ईबीआईटीडीए) में 182 प्रतिशत का भारी उछाल आया और यह रिकॉर्ड 203 करोड़ रुपये रही, जिससे कंपनी का ईबीआईटीडीए मार्जिन बढ़कर आठ प्रतिशत हो गया। कंपनी ने इस सफलता का श्रेय व्यापारियों और उपभोक्ता कारोबार में हुई तेज वृद्धि तथा कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित परिचालन दक्षता को दिया है।

यूपीआई बाजार में भी पेटीएम का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है। कंपनी का उपभोक्ता यूपीआई सकल लेनदेन मूल्य (जीटीवी) 45 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 5.9 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो कि पूरे उद्योग की औसत वृद्धि दर से 2.2 गुना अधिक है। इस दौरान मासिक आधार पर लेनदेन करने वाले सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या में भी 60 लाख का इजाफा हुआ, जिससे अब यह आंकड़ा आठ करोड़ के पार पहुंच गया है। जून 2026 के अंत तक कंपनी के पास 13,529 करोड़ रुपये का नकद शेष उपलब्ध था।

हालांकि, इस शानदार प्रदर्शन के बीच वन 97 कम्युनिकेशंस के निदेशक मंडल ने बोनस शेयर जारी करने के प्रस्ताव पर फिलहाल आगे नहीं बढ़ने का निर्णय लिया है। कंपनी का मानना है कि इस समय पूरा ध्यान विकास और लाभप्रदता को और अधिक मजबूत करने पर होना चाहिए ताकि शेयरधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजन किया जा सके। शेयर बाजार को दी गई सूचना में कंपनी ने स्पष्ट किया कि बोर्ड ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही विकास की निरंतरता को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया है।

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