देश में बिजली उत्पादन क्षमता 2030 तक 8,20,000 मेगावॉट होगी: आर के सिंह

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केंद्रीय बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने बुधवार को कहा कि देश की बिजली उत्पादन क्षमता 2030 तक 8,20,000 मेगावॉट पर पहुंच जाएगी। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 5,00,000 मेगावॉट होगी। द एनर्जी रिसोर्स इंस्टिट्यूट (टेरी) की रिपोर्ट जारी होने के मौके पर अपने संदेश में सिंह ने कहा, ‘‘वर्ष 2030 तक कुल बिजली उत्पादन क्षमता 8,20,000 मेगावॉट पर पहुंच जाएगी।

नयी दिल्ली, 27 जुलाई। केंद्रीय बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने बुधवार को कहा कि देश की बिजली उत्पादन क्षमता 2030 तक 8,20,000 मेगावॉट पर पहुंच जाएगी। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 5,00,000 मेगावॉट होगी। द एनर्जी रिसोर्स इंस्टिट्यूट (टेरी) की रिपोर्ट जारी होने के मौके पर अपने संदेश में सिंह ने कहा, ‘‘वर्ष 2030 तक कुल बिजली उत्पादन क्षमता 8,20,000 मेगावॉट पर पहुंच जाएगी।

इसमें गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली की हिस्सेदारी 5,00,000 मेगावॉट होगी।’’ मंत्री ने कहा कि देश ने नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण क्षमता को जोड़ना शुरू कर दिया है। सरकार भंडारण पर सबसे बड़ी बोली लेकर आई है और बड़ी मात्रा के साथ भंडारण लागत को कम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि हालांकि देश में प्रति व्यक्ति उत्सर्जन सबसे कम है। इसके बावजूद ऊर्जा बदलाव लक्ष्यों के प्रति भारत पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।

टेरी ने रिपोर्ट में कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिये व्यावहारिक रूपरेखा का जिक्र किया है। रिपोर्ट में 2030 तक के लक्ष्य को हासिल करने के लिये नीतियों के साथ-साथ प्रौद्योगिकी के स्तर पर हस्तक्षेप का सुझाव दिया गया है। साथ ही राज्यों के स्तर पर पंप्ड स्टोरेज सयंत्रों के साथ सौर उत्पादन के लिये ‘फीड-इन-टैरिफ’ व्यवस्था का आह्वान किया गया है। ‘फीड-इन-टैरिफ’ ऊर्जा नीति है, जिसका मकसद नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देना है।

इस योजना में सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से बिजली उपलब्ध कराने वाले को उत्पादन लागत के आधार पर कीमत प्राप्त होती है। टेरी की महानिदेशक विभा धवन ने बयान में कहा, ‘‘भारत में नीतियों के स्तर पर व्यवस्था उपयुक्त है। लेकिन हमें नये ऊर्जा भंडारण समाधान और प्रौद्योगिकी को अपनाने की जरूरत है जो ग्रिड में स्थिरता और मजबूती लाते हैं। हमें अनुसंधान और नई प्रौद्योगिकी के विकास में निवेश के लिये सहयोग की आवश्यकता है।

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