अमेरिका में H-1B Visa के लिए Salary बढ़ाने की तैयारी, Indian IT Professionals के भविष्य पर पड़ेगा सीधा असर

अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा एच-1बी वीजा के न्यूनतम वेतन मानकों में प्रस्तावित भारी वृद्धि भारतीय आईटी क्षेत्र और युवा पेशेवरों के लिए एक नई आर्थिक चुनौती पेश कर सकती है। यह विश्लेषणात्मक कदम निम्न-वेतन वाली नौकरियों के स्थान पर केवल उच्च कौशल और प्रतिस्पर्धी वेतन वाली भूमिकाओं को ही प्राथमिकता देने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा है। कीवर्ड्स: एच-1बी वीजा सैलरी, अमेरिकी श्रम विभाग, भारतीय आईटी पेशेवर, वर्क वीजा नियम बदलाव
अमेरिका में काम करने का सपना देखने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए एच-1बी वीजा से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। अमेरिकी श्रम विभाग ने विदेशी कर्मचारियों के वेतन तय करने की मौजूदा व्यवस्था में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप लेता है तो एच-1बी कर्मचारियों के लिए तय न्यूनतम वेतन मानक मौजूदा व्यवस्था की तुलना में काफी ऊपर जा सकते हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार प्रस्ताव में चारों वेतन स्तरों को बढ़ाने की बात कही गई है। शुरुआती स्तर यानी स्तर एक में करीब 33.4 प्रतिशत की सबसे बड़ी बढ़ोतरी प्रस्तावित है। स्तर दो में लगभग 24.5 प्रतिशत, स्तर तीन में 20.8 प्रतिशत और स्तर चार में करीब 21.7 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। इसी वजह से इसे करीब 30 प्रतिशत तक की वेतन बढ़ोतरी वाला प्रस्ताव बताया जा रहा है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर एच-1बी कर्मचारी की सैलरी सीधे 30 प्रतिशत बढ़ जाएगी। वास्तविक असर नौकरी, अनुभव और स्थान के आधार पर अलग-अलग होगा।
बता दें कि एच-1बी अमेरिका का अस्थायी कामकाजी वीजा है, जिसके जरिए वहां की कंपनियां विशेष योग्यता वाले विदेशी पेशेवरों को नौकरी पर रख सकती हैं। तकनीक, अभियांत्रिकी, वित्त और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। हर साल 65 हजार एच-1बी वीजा सामान्य श्रेणी में और अमेरिका से उच्च शिक्षा प्राप्त विदेशी नागरिकों के लिए अतिरिक्त 20 हजार स्थान उपलब्ध होते हैं।
गौरतलब है कि भारतीय पेशेवर लंबे समय से इस व्यवस्था के सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल रहे हैं। खासकर सूचना तकनीक क्षेत्र की कंपनियों और युवा भारतीय कर्मचारियों के लिए एच-1बी वीजा अमेरिका में करियर बनाने का महत्वपूर्ण रास्ता रहा है।
मौजूदा व्यवस्था में अमेरिकी श्रम विभाग अलग-अलग व्यवसाय और क्षेत्र के हिसाब से चार वेतन स्तर तय करता है। ये स्तर शुरुआती कर्मचारी से लेकर अत्यधिक अनुभवी कर्मचारी तक की योग्यता को दर्शाते हैं। वर्तमान पद्धति में वेतन मानक करीब 17वें, 34वें, 50वें और 67वें प्रतिशतक के आधार पर तय होते हैं।
प्रस्तावित बदलाव में इन सीमाओं को काफी ऊपर ले जाने की तैयारी है। अमेरिकी श्रम विभाग का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था विदेशी कर्मचारियों और समान काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों के बीच वेतन अंतर को पर्याप्त रूप से नहीं रोकती। विभाग के अनुसार एच-1बी कर्मचारियों को समान स्थिति वाले अमेरिकी कर्मचारियों की तुलना में औसतन करीब 10 हजार डॉलर कम वेतन मिलने का अंतर सामने आया है।
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर शुरुआती स्तर की नौकरियों पर पड़ सकता है। कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारी को प्रायोजित करना महंगा होने पर वे स्थानीय कर्मचारियों की नियुक्ति, स्वचालन या दूसरे देशों में काम स्थानांतरित करने जैसे विकल्पों पर विचार कर सकती हैं।
इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन एच-1बी व्यवस्था में अधिक वेतन और अधिक कौशल वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की दिशा में पहले ही कदम बढ़ा चुका है। फरवरी 2026 में लागू हुई नई चयन व्यवस्था में ज्यादा सैलरी वाली नौकरियों को चयन की प्रक्रिया में अधिक अवसर मिलता है। वहीं, एच-1बी आवेदन पर 1,03,265 डॉलर शुल्क का एक अलग प्रस्ताव भी चर्चा में है।
ऐसे में भारतीय युवाओं के लिए अमेरिका में नौकरी का रास्ता आगे और अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकता है। हालांकि अंतिम तस्वीर प्रस्तावित वेतन नियमों और दूसरे बदलावों के अंतिम रूप लेने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल संकेत यही हैं कि अमेरिका एच-1बी व्यवस्था को कम वेतन वाली नौकरियों के बजाय ज्यादा कौशल और बेहतर वेतन वाली नौकरियों की ओर ले जाना चाहता हैं।
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