Punjab Power Crisis: कोयला संकट से पंजाब में 1500 MW उत्पादन ठप, बत्ती गुल

पंजाब में कोयले की भीषण कमी के कारण बिजली उत्पादन में 1500 मेगावाट की गिरावट आई है, जिससे घरेलू और औद्योगिक क्षेत्रों में कटौती जारी है। मानसून के कारण खदानों में पानी भरने से कोयला सप्लाइ प्रभावित हुई है, जिससे केंद्र और राज्यों के बीच संकट गहरा गया है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार देश के कई थर्मल पावर प्लांट गंभीर स्टॉक की समस्या से जूझ रहे हैं।
पंजाब में बिजली की स्थिति इन दिनों चिंता बढ़ाने वाली हो गई है। राज्य में कोयले की कमी के कारण बिजली उत्पादन में करीब 1500 मेगावाट की गिरावट आने का दावा किया गया है। इसका सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ उद्योगों पर भी पड़ रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि प्रमुख थर्मल पावर प्लांट को पर्याप्त कोयला नहीं मिल पाने से उन्हें अपनी पूरी क्षमता से कम उत्पादन करना पड़ रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार देशभर में घरेलू कोयले से बिजली बनाने वाले कई संयंत्रों के पास कोयले का भंडार बेहद कम रह गया है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की 4 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 57 कोयला आधारित बिजली प्लांट गंभीर रूप से कम भंडार की स्थिति में चल रहे थे। इन प्लांटों में उपलब्ध कुल कोयला करीब 2.71 करोड़ टन था, जबकि तय मानक के अनुसार करीब 5.77 करोड़ टन का भंडार होना चाहिए।
इन 57 संयंत्रों में 52 घरेलू कोयले पर, चार आयातित कोयले पर और एक धुले हुए कोयले पर निर्भर है। उत्तर भारत में राजस्थान के सभी सात और उत्तर प्रदेश के चार थर्मल पावर प्लांट भी कम कोयला भंडार वाले प्लांटो में शामिल हैं। राष्ट्रीय थर्मल पावर निगम और उससे जुड़े संयुक्त उपक्रमों के सात प्लांट भी इस सूची में बताए गए हैं।
पंजाब की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। राज्य में सरकारी और निजी क्षेत्र के थर्मल पावर प्लांटो के कोयला भंडार में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। लेहरा मोहब्बत प्लांट के पास करीब 13 दिन, रोपड़ संयंत्र के पास 29 दिन और गोइंदवाल प्लांट के पास लगभग 14 दिन का कोयला बचा है। वहीं निजी क्षेत्र के तलवंडी साबो संयंत्र में करीब पांच दिन और राजपुरा थर्मल पावर प्लांट में लगभग छह दिन का भंडार बताया गया है।
गौरतलब है कि इन थर्मल पावर प्लांटो के पास आदर्श स्थिति में करीब 20 दिन का कोयला भंडार होना चाहिए। पंजाब में निजी क्षेत्र के राजपुरा और तलवंडी साबो प्लांटो की कुल उत्पादन क्षमता करीब 3380 मेगावाट है। कोयले की कमी के चलते दोनों संयंत्रों को कम क्षमता पर चलाना पड़ रहा है।
पंजाब के बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड ने कहा है कि देश में गंभीर कोयला संकट के कारण राज्य का बिजली उत्पादन करीब 1500 मेगावाट घट गया है। उनके मुताबिक पिछले दो-तीन दिनों से पंजाब में बिजली की कमी महसूस की जा रही है और मजबूरी में घरेलू तथा औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती करनी पड़ रही है।
सोंड का दावा है कि कोयले की कमी से देशभर में करीब 63 गीगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल कदम उठाकर कोयले की आपूर्ति सामान्य करने की मांग की है। उनका कहना है कि पंजाब के निजी ताप विद्युत प्लांट भी लगभग आधी क्षमता पर काम करने को मजबूर हैं।
उधर, कोयला मंत्रालय के मुताबिक लंबे मानसून ने कोल इंडिया की खदानों में खनन गतिविधियों को प्रभावित किया है। कई कोयला परतें पानी के कारण गीली और चिपचिपी हो गईं, जबकि कुछ निचले हिस्सों में पानी भर गया। प्रभावित क्षेत्रों में पानी निकालने का काम चल रहा है और खदानों के भीतर परिवहन मार्गों की मरम्मत भी की जा रही है।
ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों में भारी बारिश ने खनन के साथ-साथ कोयले को बिजली संयंत्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ाया है। बारिश का असमान वितरण बिजली की मांग को भी प्रभावित कर रहा है। ऐसे में अगर कोयले की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं होती है तो पंजाब समेत कई राज्यों में बिजली व्यवस्था पर दबाव बना रह सकता है। फिलहाल केंद्र और राज्य के बीच कोयला आपूर्ति को लेकर खींचतान के बीच उपभोक्ताओं और उद्योगों की नजर इस बात पर टिकी है कि हालात कब सामान्य होते हैं।
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