TVS Motor Q1 Results: कंपनी का Profit 65% उछलकर ₹1,057 करोड़ के पार, Revenue में भी रिकॉर्ड बढ़त

टीवीएस मोटर ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 65 प्रतिशत की शानदार लाभ वृद्धि दर्ज करते हुए अपनी मजबूत बाजार स्थिति को प्रमाणित किया है। परिचालन आय और रिकॉर्ड बिक्री के साथ कंपनी ने प्रतिकूल जिंस कीमतों के बावजूद कुशल लागत प्रबंधन के माध्यम से अपनी लाभप्रदता बनाए रखी है। टीवीएस मोटर वित्तीय परिणाम और ईवी बिक्री वृद्धि इस रिपोर्ट के मुख्य विश्लेषण बिंदु हैं।
टीवीएस मोटर कंपनी लिमिटेड का चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 65 प्रतिशत बढ़कर 1,057.61 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली (अप्रैल-जून) तिमाही में उसका एकीकृत शुद्ध लाभ 642.86 करोड़ रुपये रहा था। मोटर वाहन कंपनी ने मंगलवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि समीक्षाधीन तिमाही में उसकी परिचालन आय बढ़कर 16,295.52 करोड़ रुपये हो गई जो एक वर्ष पहले की समान अवधि में 12,210.05 करोड़ रुपये थी। समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी का कुल खर्च सालाना आधार पर 11,261.60 करोड़ रुपये से बढ़कर 14,894.22 करोड़ रुपये हो गया।
टीवीएस मोटर के अनुसार, पहली तिमाही में उसने अब तक की सर्वाधिक तिमाही बिक्री दर्ज की। इस दौरान दोपहिया और तिपहिया वाहनों की कुल बिक्री 28 प्रतिशत बढ़कर 16.3 लाख इकाई हो गई जो एक वर्ष पहले की समान अवधि में 12.8 लाख इकाई थी। समीक्षाधीन तिमाही में मोटरसाइकिल की बिक्री 19 प्रतिशत बढ़कर 7.4 लाख इकाई रही जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 6.2 लाख इकाई थी। स्कूटर की बिक्री पांच लाख इकाई से सालाना आधार पर 36 प्रतिशत बढ़कर 6.8 लाख इकाई हो गई।
अंतरराष्ट्रीय कारोबार 33 प्रतिशत बढ़कर 4.7 लाख इकाई पर पहुंच गया जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 3.5 लाख इकाई था। कंपनी ने कहा कि 2026-27 की पहली तिमाही में उसके इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री 86 प्रतिशत बढ़कर 1,29,940 इकाई हो गई, जो एक वर्ष पहले की समान अवधि में 70,060 इकाई थी।
कंपनी के अब 10 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन ग्राहक हैं। समीक्षाधीन तिमाही में तिपहिया वाहनों की बिक्री 48 प्रतिशत बढ़कर 66,697 इकाई हो गई जबकि एक वर्ष पहले की समान अवधि में यह 44,978 इकाई थी। कंपनी ने बयान में कहा कि पहली तिमाही में वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण जिंस कीमतों में तेज वृद्धि का रुख रहा जिससे कच्चे माल आदि की लागत बढ़ी। हालांकि, कीमतों में आंशिक समायोजन तथा लागत अनुकूलन की पहल के जरिये इस बढ़ी हुई लागत के असर को कुछ हद तक कम किया गया।
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