US-Iran टेंशन से Gold Market में उथल-पुथल, एक्सपर्ट्स ने बताया कब आएगी कीमतों में नई तेजी?

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Ankit Jaiswal । Mar 8 2026 9:11PM

वैश्विक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच सोने की मांग बढ़ी है, लेकिन अमेरिकी डॉलर की मजबूती इसकी कीमतों पर दबाव डाल रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि सोना 1,37,000 से 1,65,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर सकता है, और भविष्य की दिशा वैश्विक राजनीति तय करेगी।

पिछले कुछ समय से वैश्विक तनाव के बीच सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों की नजर लगातार सोने पर बनी हुई है। मौजूद जानकारी के अनुसार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने की कीमत पिछले सप्ताह लगभग 1,61,675 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बंद हुई है, जो इसके अब तक के उच्चतम स्तर से करीब 19 हजार रुपये नीचे है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो वैश्विक कमोडिटी बाजार में सोने की कीमत लगभग 5,158 डॉलर प्रति औंस के आसपास दर्ज की गई है, जो अपने रिकॉर्ड स्तर से कुछ नीचे बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में सोने की कीमतों में तेजी और स्थिरता दोनों के संकेत दिखाई दे रहे हैं।

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और वैश्विक अनिश्चितता के कारण सोना पारंपरिक सुरक्षित निवेश के रूप में फिर चर्चा में आ गया है। हाल के दिनों में अमेरिका, ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया है, जिससे सोने की मांग बढ़ी है।

हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण सोने की तेजी फिलहाल सीमित बनी हुई है। मौजूद जानकारी के अनुसार डॉलर सूचकांक 100 के स्तर की ओर बढ़ रहा है, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव भी देखा जा रहा है।

बता दें कि सोने की कीमतों पर वैश्विक राजनीति का भी बड़ा असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों और विदेश नीति से जुड़े संकेतों के कारण बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। यही कारण है कि निवेशक सुरक्षित संपत्ति के रूप में सोना और चांदी खरीदने की ओर झुक रहे हैं।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के खत्म होने के बाद भी वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी रह सकती है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन की नजर अब क्यूबा जैसे क्षेत्रों पर भी है, जहां पहले से आर्थिक संकट और ईंधन की कमी की स्थिति बनी हुई है। ऐसे हालात में क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ सकती है।

मौजूद जानकारी के अनुसार ऐसी भू-राजनीतिक परिस्थितियां आमतौर पर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की मांग को बढ़ावा देती हैं। निवेशकों के लिए यह धातुएं आर्थिक और राजनीतिक संकट के समय सुरक्षित विकल्प मानी जाती हैं।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सोने की कीमतें व्यापक दायरे में कारोबार कर रही हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि सोना लगभग 1,37,000 रुपये से 1,65,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में रह सकता है। अगर कीमतें 1,65,000 रुपये के स्तर से ऊपर स्थिर हो जाती हैं तो वैश्विक बाजार में एक नई तेजी देखने को मिल सकती है।

कुल मिलाकर मौजूदा हालात में सोने की कीमतों पर वैश्विक राजनीति, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों का संयुक्त प्रभाव देखने को मिल रहा है, जिसके कारण बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

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