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हिप्नोथेरेपी में आप इस तरह बना सकते है कॅरियर, नहीं है कोई टोना-टोटका

By वरूण क्वात्रा | Publish Date: Jun 27 2018 12:45PM

हिप्नोथेरेपी में आप इस तरह बना सकते है कॅरियर, नहीं है कोई टोना-टोटका
Image Source: Google

गांवों में अगर सम्मोहन की बात हो तो लोग इस शब्द का नाम सुनते ही इसे तंत्र−मंत्र और जादू से जोड़ देते हैं। लेकिन शहरी जीवन में लोगों की सोच हिप्नोसिस को लेकर काफी बदली है। यह कोई टोना−टोटका नहीं है, बल्कि मानव मन−मस्तिष्क में झांकने का एक आसान और वैज्ञानिक जरिया है। इसकी अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग इसके जरिए अपनी बहुत सी छोटी−बड़ी परेशानियों का हल इसके जरिए ढूंढ रहे हैं। इसकी पॉपुलैरिटी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों प्रिंस विलियम की पत्नी केड मिडलटन ने भी हिप्नो बर्थिंग के जरिए बच्चे को जन्म दिया था। अगर आप भी लोगों को शारीरिक व मानसिक शांति प्रदान करना चाहते हैं तो बतौर हिप्नोथेरेपिस्ट ऐसा कर सकते हैं। इस क्षेत्र में एक उज्ज्वल भविष्य की खोज की जा सकती है−

ऐसे करता है काम
हिप्नोसिस भी एक्यूपंचर, योग या आयुर्वेद की तरह ही एक वैकल्प्क हिलिंग तकनीक है। हिप्नोसिस एक ऐसी अवस्था होती है जहां पर आपका कॉन्शियस माइंड की सोचने−समझने और तर्क करने की क्षमता कुछ क्षणों के लिए सुप्त अवस्था में चली जाती है तथा आपका सब−कॉन्शियस माइंड मुख्य रूप से काम करने लगता है। कॉन्शियस माइंड और सब−कॉन्शियस माइंड दोनों ही हमेशा जागृत रहते हैं और काम करते हैं। लेकिन नॉर्मल अवस्था में जब आपका कॉन्शियस माइंड काम करता है, तब आप किसी भी काम को करने या उसे मानने से पहले तर्क−वितर्क करते हैं और अगर आपका कॉन्शियस माइंड उस काम से सहमत नहीं होता तो आप भी उसे अपनी स्वीकृति नहीं देते, जबकि हिप्नोसिस की अवस्था में आपका सब−कॉन्शियस माइंड मुख्य रूप से काम कर रहा होता है। सब−कॉन्शियस माइंड कभी भी तर्क नहीं करता। उसे जो भी बात कही जाती है, वह उसे सहज ही रूप से स्वीकार कर लेता है। सब−कॉन्शियस माइंड की इसी तर्क न करने के चलते हिप्नोसिस के जरिए बहुत सी बीमारियों का इलाज बिना दवाईयों के ही किया जाता है। इतना ही नहीं, हिप्नोसिस की अवस्था में आप अपने पुराने समय में यहां तक कि पिछले जन्म को भी देखने में भी सफल हो जाते हैं।
 
दैनिक जीवन में भी है हिप्नोसिस
बहुत से लोगों को शायद आश्चर्य हो लेकिन हम अपने दैनिक जीवन में भी कई बार सेल्फ हिप्नोसिस की अवस्था में पहुंच जाते हैं। मसलन, अगर आप थियेटर में बहुत ध्यान से कोई फिल्म देख रहे होते हैं तो आप पूरी तरह उसमें खो जाते हैं। आपको आस−पास होने वाली घटनाओं का कोई आभास नहीं होता, इतना ही नहीं, आप फिल्माए गए दृश्यों को सच मानते हैं। इसी तरह एक शब्द जिससे हर व्यक्ति हिप्नोसिस होता है, वह है आपका नाम। आप चाहें कितनी भी गहरी नींद में हो, लेकिन अगर कोई आपका नाम पुकारता है तो अक्सर आपकी आंख खुल जाती है या फिर आप नींद में ही जवाब देते हैं। 
 
स्किल्स
एक बेहतरीन हिप्नोथेरेपिस्ट बनने के लिए जरूरी है कि सबसे पहले आपके कम्युनिकेशन स्किल्स व लिसनिंग स्किल्स बेहतर हो। ताकि जब क्लाइंट आपके पास आए और आपसे अपनी समस्या बताए तो आप उसे सही तरह से समझकर उसकी समस्या को सुलझाने में उसकी मदद कर सके। इसके अतिरिक्त हिप्नोथेरेपी के दौरान आपके कम्युनिकेशन स्किल्स काफी काम आते हैं। आप जो भी निर्देश सम्मोहित व्यक्ति को दे रहे हैं, वह उसे समझ में आने चाहिए ताकि वह उसका पालन कर सके। चूंकि यह मानव मस्तिष्क से जुड़ा विज्ञान है, इसलिए आपको मनुष्य का मस्तिष्क पढ़ना भी आना चाहिए। याद रखिए कि आपकी छोटी सी गलती भी आपके क्लाइंट पर काफी भारी पड़ सकती है।
 
कोर्स
इस क्षेत्र में कॅरियर बनाने के लिए किसी विशेष योग्यता की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन फिर भी आप ग्रेजुएशन के बाद हिप्नोसिस का कोर्स कर सकते हैं। ऐसे बहुत से संस्थान हैं, जो यह कोर्स करवाते हैं। कोर्स की अवधि दो दिन से लेकर दो महीने तक की हो सकती है। 
 
जॉब्स
हिप्नोथेरेपी का कोर्स करने के बाद आप विभिन्न अस्पतालों व मेडिकल सेंटर्स में जॉब्स कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त अगर आप चाहें तो खुद का वेलनेस क्लीनिक सेंटर भी खोल सकते हैं। वहीं अगर आप चाहें तो दूसरों को भी हिप्नोथेरेपी की तकनीक सिखा सकते हैं और इसके लिए इंस्टीटयूट खोल सकते हैं।
 
आमदनी
इस क्षेत्र में आमदनी काफी अच्छी हो जाती है। आमतौर पर एक हिप्नोथेरेपी के सेशन की फीस 500 रूपए से शुरू होती है। इसके अतिरिक्त समय के साथ जब आप प्रसिद्धि पा लेते हैं या फिर आपका क्लाइंट बेस अच्छा हो जाता है तो हिप्नोथेरेपिस्ट हर सेशन के 4000 से 5000 रूपए तक भी चार्ज करते हैं।
 
प्रमुख संस्थान
लाइफ रिसर्च एकेडमी, हैदराबाद
इंस्टीटयूट ऑफ क्लीनिकल हिप्नोसिस एंड रिलेटिड साइंस, मुंबई
इंडियन हिप्नोसिस एकेडमी, अहमदाबाद
द हिप्नोथेरेपी स्कूल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली
 
वरूण क्वात्रा

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