Mohammed Siraj को क्यों दिया गया आराम, आंकड़ों ने बताई भारतीय टीम की बड़ी रणनीति

Mohammed Siraj
प्रतिरूप फोटो
ANI
Ankit Jaiswal । Jun 11 2026 10:28PM

आंकड़ों के अनुसार, मोहम्मद सिराज का सीमित ओवरों से बाहर होना उनके घटते महत्व का नहीं, बल्कि टेस्ट क्रिकेट में उनकी बढ़ती भूमिका का संकेत है। लंबे प्रारूप में उनके भारी कार्यभार को देखते हुए टीम प्रबंधन ने उन्हें आराम दिया है, जिससे साफ है कि अब सिराज भी वर्कलोड मैनेजमेंट रणनीति का एक अहम हिस्सा हैं।

भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज को हाल ही में आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ शार्ट फार्मेट वाले मुकाबलों की सीरीज के लिए टीम में चुना गया था। हालांकि टीम घोषणा के कुछ ही दिनों बाद उन्हें आराम देने का फैसला किया गया और उनकी जगह प्रसिद्ध कृष्णा को शामिल कर लिया गया। पहली नजर में यह फैसला कई लोगों के लिए हैरान करने वाला था, क्योंकि पिछले कुछ समय से सिराज सीमित ओवरों के प्रारूप में नियमित रूप से नहीं खेल रहे थे।

गौरतलब है कि वर्ष 2024 में विश्व कप जीतने के बाद से मोहम्मद सिराज का छोटी अवधि वाले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में योगदान काफी सीमित रहा है। उन्होंने इस दौरान केवल एक द्विपक्षीय श्रृंखला खेली थी। वहीं वर्ष 2026 के विश्व कप में भी उन्हें केवल एक मुकाबले में मौका मिला था, जब जसप्रीत बुमराह को आराम दिया गया था। इतना ही नहीं, उस प्रतियोगिता की टीम में उनकी जगह भी हर्षित राणा के चोटिल होने के बाद बनी थी।

मौजूद जानकारी के अनुसार एकदिवसीय प्रारूप में भी सिराज की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रही है। वर्ष 2023 के विश्व कप के बाद भारत ने 23 एकदिवसीय मुकाबले खेले, जिनमें सिराज केवल नौ मैचों में दिखाई दिए। उन्हें चैंपियंस ट्रॉफी की टीम में भी जगह नहीं मिली थी। 

हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू कहीं अधिक दिलचस्प है। जहां सीमित ओवरों के क्रिकेट में सिराज के अवसर कम हुए हैं, वहीं लंबे प्रारूप में वह भारतीय टीम के सबसे भरोसेमंद गेंदबाज बनकर उभरे हैं। पिछले तीन वर्षों में उन्होंने जितना क्रिकेट खेला है, वह दुनिया के किसी भी अन्य तेज गेंदबाज से अधिक माना जा रहा है।

बता दें कि जनवरी 2023 से अब तक मोहम्मद सिराज ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और घरेलू पेशेवर प्रतियोगिताओं को मिलाकर कुल 1231 ओवर गेंदबाजी की है। इस दौरान केवल रविंद्र जडेजा ने उनसे अधिक ओवर डाले हैं। तेज गेंदबाजों की सूची में सिराज सबसे ऊपर हैं।

गौरतलब है कि उनके कुल कार्यभार का बड़ा हिस्सा लंबे प्रारूप से आया है। उन्होंने इस अवधि में 30 टेस्ट मुकाबलों में 744 ओवर फेंके हैं। औसतन हर मुकाबले में करीब 25 ओवर गेंदबाजी करना किसी भी तेज गेंदबाज के लिए बड़ी चुनौती माना जाता है। यही वजह है कि उनके कुल कार्यभार का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा लंबे प्रारूप से जुड़ा हुआ है।

मौजूद जानकारी के अनुसार भारत ने वर्ष 2023 के बाद 33 लंबे मुकाबले खेले हैं, जिनमें सिराज 30 मैचों में मैदान पर उतरे। यह लगभग 91 प्रतिशत मुकाबलों में उनकी मौजूदगी को दर्शाता है। दूसरी ओर जसप्रीत बुमराह के कार्यभार को लगातार नियंत्रित किया गया और उन्हें कई श्रृंखलाओं में आराम दिया गया।

इंग्लैंड दौरे पर भी सिराज ने सभी पांच मुकाबले खेले थे और 185 ओवर गेंदबाजी करते हुए टीम के सबसे सफल गेंदबाज बने थे। ऐसे में क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ छोटी अवधि वाले मुकाबलों से बाहर रखने का फैसला केवल मौजूदा श्रृंखला को ध्यान में रखकर नहीं लिया गया है।

बता दें कि भारतीय टीम के सामने आने वाले महीनों में व्यस्त कार्यक्रम है। टीम को 17 एकदिवसीय और 10 लंबे मुकाबले खेलने हैं। इसके अलावा वर्ष 2027 के विश्व कप की तैयारियां भी जारी हैं। ऐसे में टीम प्रबंधन नहीं चाहता कि सिराज पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़े।

दरअसल पिछले कुछ समय से चर्चा होती रही कि मोहम्मद सिराज केवल एक प्रारूप के खिलाड़ी बनकर रह गए हैं। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि उनकी अहमियत कम नहीं हुई, बल्कि बढ़ी है। भारतीय टीम के लिए वह अब ऐसे गेंदबाज बन चुके हैं जिन पर लगातार भरोसा किया जाता है। यही कारण है कि अब कार्यभार प्रबंधन की नीति केवल जसप्रीत बुमराह तक सीमित नहीं रही, बल्कि मोहम्मद सिराज भी उसका अहम हिस्सा बन चुके हैं।

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