डेल्टा क्या कम था जो अब ओमिक्रान दहशत मचाने के लिए आ गया

डेल्टा क्या कम था जो अब ओमिक्रान दहशत मचाने के लिए आ गया

ओमिक्रान की गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है कि शुक्रवार को देश में शेयर बाजार धड़ाम से गिर गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात में चिंता व्यक्त की तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उच्चस्तरीय बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए।

कोरोना के दो साल होने के बावजूद यह नए नए अवतार लेकर सामने आ रहा है। अब अफ्रीका से यह नया अवतार ओमिक्रान के रूप में दुनिया को हिलाने आ गया है। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रान को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 'वैरिएंट ऑफ कंसर्न' घोषित करने से ही इसकी गंभीरता को समझा जा सकता है। विषेषज्ञों द्वारा माना जा रहा है कि कोरोना के डेल्टा अवतार से भी यह सात गुणा तेजी से फैलने वाला वैरिएंट है। यह भी साफ हो जाना चाहिए कि वैरिएंट की गंभीरता को देखते हुए उसे कंसर्न ऑफ वैरिएंट घोषित किया गया है वरना अन्य स्थिति में तो सामान्यतः वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट की श्रेणी में ही रखा जाता है। कंसर्न की श्रेणी में गंभीरता को देखते हुए ही डाला जाता है।

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विषेषज्ञों द्वारा माना जा रहा है कि यह वैरिएंट डेल्टा से भी ज्यादा तेजी से फैलने वाला वैरिएंट है। एक अनुमान के अनुसार डेल्टा से सात गुणा अधिक तेजी से यह फैलता है। गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है कि न्यूयार्क में 15 जनवरी, 2022 तक के लिए आपातकाल की घोषणा कर दी गयी है तो दुनिया के देश दक्षिण अफ्रीका की यात्रा पर रोक लगा रहे हैं। गौरतलब है कि कोरोना के ही वैरिएंट डेल्टा ने अक्टूबर 2020 में भारत में प्रवेश किया और जबरदस्त तरीके से प्रभावित करने के साथ ही जानलेवा साबित हुआ। ओमिक्रान को गंभीरता से लेने का एक कारण यह भी है कि जहां एक और यह वैरिएंट तेजी से फैल रहा है वहीं यह भी माना जा रहा है कि वैक्सीन इस पर अधिक असरकारक नहीं है। अफ्रीका में करीब दो माह से प्रभावित कर रहा यह वैरिएंट ओमिक्रान पिछले चार से पांच दिनों में ही दक्षिण अफ्रीका के साथ ही हांगकांग, बोत्सवाना, बेल्जियम, जर्मनी, चेक गणराज्य, इजराइल और ब्रिटेन पहुंच गया है। भारत में भी बैंगलोर उतरे अफ्रीका से आए दो मरीज कोरोना संक्रमित हैं, इस खबर से हड़कंप मच गया है पर अभी यह पुष्ट नहीं हो पाया है कि वे ओमिक्रान से ही संक्रमित हैं या अन्य किसी वैरिएंट से। इसी तरह से पुष्कर में तीन फ्रांसिसी महिला पर्यटकों का कोरोना संक्रमित मिलना चिंता का सबब बन गया है।

ओमिक्रान की गंभीरता को इसी से समझा जा सकता है कि शुक्रवार को देश में शेयर बाजार धड़ाम से गिर गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मन की बात में चिंता व्यक्त की तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उच्चस्तरीय बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए और बूस्टर डोज की तैयारी करने को कहा। हालांकि देश में कोरोना की चिंता के बीच ही 15 दिसंबर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने की घोषणा की गई है पर इसकी नए सिरे से समीक्षा की आवश्यकता हो गई है। यूरोपीय संघ सहित दुनिया के देश अफ्रीका से हवाई उड़ानों पर रोक लगा रहे हैं। अब तक 1200 से अधिक संक्रमित मिलने से दुनिया दहशत में आ गई है। भारत सहित दुनिया के देश स्थितियों पर गंभीरता से नजर रखे हुए हैं और आवश्यक एहतियाती तैयारी में जुट गए हैं।

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दरअसल यह माना जा रहा था कि कोरोना का अभिशाप अधिक दिन नहीं चलेगा पर देखते देखते दो सालों में ही दुनिया के देश इसके पांच वैरिएंट से रूबरू हो चुके हैं। सितंबर 2020 में इंग्लैण्ड में अल्फा, मई 2020 में दक्षिण अफ्रीका में बीटा, नवंबर 2020 में ब्राजील में गामा, अक्टूबर 2020 में भारत में डेल्टा और अब ओमिक्रान ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। दरअसल वायरस की जीनोमिक संरचना में बदलाव होकर के यह नए वैरियंट का रूप ले लेता है। कोरोना ने वैसे तो पूरी दुनिया में अपना असर दिखाया है पर अमेरिका, ब्राजील और भारत संक्रमण और मौत के मामलों में सबसे अधिक प्रभावित देश रहे हैं।

दरअसल कोरोना जैसी महामारी से जूझने का दुनिया के देशों के सामने यह पहला अवसर आया है। इससे पहले प्लेग, कोलेरा, फ्लू, काला ज्वर, तपेदिक, पोलियो, एड्स, खसरा, चेचक जैसी कई महामारियों से जूझ चुका है। समय के साथ इनका ईलाज भी खोजा गया। चौंकाने वाली बात यह है कि कोरोना के चलते तपेदिक वापिस अपना असर दिखाने लगी है और पिछले दिनों में तपेदिक के कारण मौत के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सवाल यह है कि कोरोना प्रोटोकॉल के बावजूद जिस तरह से कोरोना का थोड़ा असर कम दिखते ही प्रतिबंधों में छूट और शिथिलता बरती जाने लगी तो कोरोना नए अवतार में सामने आने लगा। नो मास्क नो एंट्री और दो गज की दूरी के संदेश के बावजूद धीरे-धीरे इनका असर कागजी रहने से तबाही का मंजर जारी है। लापरवाही के चलते कोरोना है कि थोड़ी राहत देकर वापस पूरी तेजी से आक्रामक हो रहा है। अभी वैक्सीनेशन भी पूरी तरह से नहीं हो पाया है। वैक्सीनेशन के कम असर के आए दिन आने वाले समाचारों से लोग हतोत्साहित हो रहे हैं सो अलग। दरअसल लोगों में निराशा अधिक व्याप्त होने लगी है। ऐसे में इस सबके साथ ही आशा और विश्वास की बूस्टर डोज ज्यादा जरूरी हो जाती है।

-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा