ITR Refund 2025 नहीं मिला? अपनाएं ये तरीका झटपट परेशानी होगी दूर

FY 2024-25 (AY 2025-26) के लिए पॉलिसी और ऑपरेशनल कारणों से रिफंड में देरी में साफ़ बढ़ोतरी देखी जा रही है। टैक्स अधिकारियों ने सबके सामने कहा है कि “ज़्यादा वैल्यू” और “रेड फ्लैग्ड” रिफंड क्लेम को ज़्यादा जांच के लिए रोका जा रहा है, खासकर जहां खास डिडक्शन या छूट गलत या बहुत ज़्यादा लग रही हों।
बहुत से लोग अभी भी सोच रहे हैं कि AY 2025-26 के लिए ITR फाइल करने और ई-वेरिफाई करने के बाद भी उनका पैसा क्यों नहीं आया है। अगर आपका इनकम टैक्स रिटर्न नहीं मिला है या उसमें अमाउंट नहीं मिला है तो चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है। इस साल कई मामलों में इनकम टैक्स रिफंड में देरी हो रही है क्योंकि डिपार्टमेंट ने डेटा मैचिंग और वेरिफिकेशन को सख्त कर दिया है।
ITR रिफंड प्रोसेस क्या है?
जब साल के दौरान आपकी टैक्स देनदारी से ज़्यादा पैसे कटते या जमा होते हैं तो सरकार उस ज़्यादा रकम को रिफंड कर देती है। इसे इनकम टैक्स रिफंड कहते हैं। यह पूरा प्रोसेस इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) देखता है और आखिर में पैसा सीधे आपके बैंक अकाउंट में जमा हो जाता है।
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इस साल ITR रिफंड में देरी क्यों हो रही है?
FY 2024-25 (AY 2025-26) के लिए पॉलिसी और ऑपरेशनल कारणों से रिफंड में देरी में साफ़ बढ़ोतरी देखी जा रही है। टैक्स अधिकारियों ने सबके सामने कहा है कि “ज़्यादा वैल्यू” और “रेड फ्लैग्ड” रिफंड क्लेम को ज़्यादा जांच के लिए रोका जा रहा है, खासकर जहां खास डिडक्शन या छूट गलत या बहुत ज़्यादा लग रही हों।
कैसे पता करें कि आपका रिफंड सच में डिले हुआ है या नहीं?
रिफंड को “डिले हुआ” तभी माना जाता है जब प्रोसेसिंग और पेमेंट स्टेटस दोनों चेक कर लिए जाते हैं। कई टैक्सपेयर्स “ITR फाइल्ड” या “ई-वेरिफाइड” को “रिफंड ड्यू” समझ लेते हैं, जबकि डिपार्टमेंट सेक्शन 143(1) के तहत प्रोसेसिंग के बाद ही पैसा रिलीज़ करता है।
सच में डिले होने के रेड फ्लैग में ये शामिल हैं:
- 60–90 दिन से ज़्यादा पहले ITR ई-वेरिफाइड हो गया हो और सीधे-सादे मामले में कोई जानकारी या रिफंड क्रेडिट न हो।
- पोर्टल पर कई हफ़्तों तक “रिफंड तय हुआ लेकिन जारी नहीं हुआ” या “रिफंड फेलियर” जैसा स्टेटस बिना किसी हलचल के दिख रहा हो।
- आपके डिटेल्स अपडेट करने के बावजूद बैंक अकाउंट वैलिडेशन की दिक्कतों की वजह से रिफंड क्रेडिट का बार-बार फेल होना।
- सेक्शन 143(1) के तहत रिफंड कन्फर्म करने वाली जानकारी मिली, लेकिन बिना किसी नोटिस या वजह के सही समय (30–45 दिन) में असली क्रेडिट नहीं मिला।
अगर आपके ITR रिफंड में देरी हो रही है तो क्या करें?
एक बार जब आप कन्फर्म कर लें कि रिफंड मिलना है और स्टेटस बहुत लंबे समय से अटका हुआ है, तो आप कुछ खास कदम उठा सकते हैं। जल्दी एक्शन लेने से केस के गहरी जांच में जाने या CPC में बेकार पड़े रहने का रिस्क कम हो जाता है।
प्राथमिकता वाले एक्शन में शामिल हैं:
- अपना रिटर्न और AIS/26AS दोबारा चेक करें: पक्का करें कि सभी इनकम, TDS और TCS डिटेल्स मैच करती हैं; अगर कोई साफ गलती है या रिपोर्टिंग छूट गई है तो जल्द से जल्द रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने के बारे में सोचें।
- बैंक डिटेल्स को वैलिडेट और दोबारा कन्फर्म करें: ई-फाइलिंग पोर्टल पर “प्रोफाइल” → “माई बैंक अकाउंट्स” पर जाएं, पक्का करें कि रिफंड अकाउंट “ECS रिफंड” के लिए वैलिडेट है और एक्टिव है।
- किसी भी नोटिस का तुरंत जवाब दें: अपना रजिस्टर्ड ईमेल, SMS, और “ई-प्रोसीडिंग्स” या “पेंडिंग एक्शन्स” टैब चेक करें; अगर कोई क्लैरिफिकेशन या डॉक्यूमेंट अपलोड करने के लिए कहा गया है तो दिए गए टाइमलाइन के अंदर जवाब दें।
- शिकायत / टिकट करें: अगर 143(1) की साफ़ जानकारी और कोई बकाया मांग न होने के बावजूद रिफंड में देरी हो रही है तो पोर्टल पर “शिकायतें” या “ई-निवारण” सुविधा का इस्तेमाल करें; आप असेसमेंट ईयर, CPC रेफरेंस नंबर बता सकते हैं और स्क्रीनशॉट अटैच कर सकते हैं।
- कुछ खास मामलों में अपने अधिकार क्षेत्र वाले AO से संपर्क करें: जहां CPC प्रोसेसिंग के बाद भी नॉर्मल टाइमलाइन से ज़्यादा देरी होती है, तो कुछ टैक्सपेयर्स इस मुद्दे को अधिकार क्षेत्र वाले असेसिंग ऑफिसर या प्रोफेशनल रिप्रेजेंटेशन के ज़रिए उठाते हैं।
भविष्य में रिफंड में देरी से बचने के टिप्स
1. अपना रिटर्न देर से फाइल न करें: ज़्यादातर लोग डेडलाइन का इंतज़ार करते हैं और फिर पोर्टल पर भीड़ हो जाती है। इससे छोटी-मोटी गलतियाँ हो जाती हैं। अपना रिटर्न समय पर फाइल करने की कोशिश करें, लेकिन इतनी जल्दी नहीं कि AIS और TDS अपडेट न हों।
2. PAN और आधार सही तरीके से लिंक होना चाहिए : आजकल PAN-आधार लिंकिंग ज़रूरी है। अगर यह लिंक नहीं है तो PAN इनएक्टिव हो जाएगा और रिफंड अपने आप रुक जाएगा।
3. अपना बैंक अकाउंट चेक करना ज़रूरी है : रिफंड हमेशा उसी अकाउंट में आता है जो एक्टिव और प्री-वैलिडेटेड हो। कभी-कभी, लोग पुराने या बंद अकाउंट डाल देते हैं, जिससे रिफंड फेल हो जाता है। अपना ITR फाइल करने से पहले अकाउंट नंबर और IFSC कोड ज़रूर चेक कर लें।
4. नोटिस को इग्नोर न करें : अगर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट कोई नोटिस भेजता है तो उसे देर करने से रिफंड में देरी हो सकती है। चाहे वह डिफेक्टिव रिटर्न हो या क्लैरिफिकेशन, तुरंत जवाब देना ज़रूरी है।
5. पहले पुराने ड्यूज़ क्लियर करें : अगर पिछले सालों के ITRs या टैक्स ड्यूज़ पेंडिंग हैं तो नया रिफंड एडजस्ट किया जाएगा। इसलिए, पुरानी फाइलें क्लियर करना उतना ही ज़रूरी है जितना कि नए रिटर्न फाइल करना।
- जे. पी. शुक्ला
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