आत्मनिर्भर भारत अभियान से बढ़ रहे हैं रोजगार, विकसित हो रहे हैं तरक्की के विभिन्न आयाम

आत्मनिर्भर भारत अभियान से बढ़ रहे हैं रोजगार, विकसित हो रहे हैं तरक्की के विभिन्न आयाम

राष्ट्रीय लॉकडाउन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने इसी वर्ष गत 12 मई को राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक राहत पैकेज, आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत की है, जो कोविड-19 महामारी संकट से लड़ने में निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और एक आधुनिक भारत की पहचान बनेगा।

आपदा को अवसर में बदलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तब से ही जाने जाते हैं, जब वह इससे पहले गुजरात के यशस्वी मुख्यमंत्री हुआ करते थे। वहां आये भूकंप और फिर हुए निर्माण इसकी गवाही देते हैं। अब वह अकेले भी नहीं हैं। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके नक्शेकदम पर चलते हुए एक और बड़ी रेखा जो खींचने की कोशिश की है, उससे बीजेपी और मजबूत होगी ही, अन्य राज्यों को भी अब विकास के लिए गुजरात मॉडल के साथ यूपी मॉडल मिल जाएगा। विकास के आंध्रप्रदेश मॉडल, पंजाब मॉडल, बिहार मॉडल की अनदेखी करना भी यहां उचित नहीं होगा, क्योंकि बात छिड़ी है आत्मनिर्भर भारत अभियान की। 

दरअसल, कोरोना वायरस कोविड 19 के प्रकोप से उपजी वैश्विक परिस्थितियों के बीच यदि किसी चीज की सबसे बड़ी कमी महसूस की गई तो वह है लोकल प्रोडक्ट्स की। क्योंकि अचानक यातायात के थम जाने से ग्लोबल विलेज के अरमान बिखर गए। शुक्र है कि नेतृत्व नरेंद्र मोदी जैसे फौरी निर्णय लेने वाले नेता के हाथ में है, जिससे देश एक बहुत बड़ी नीतिगत त्रासदी से उबरते हुए लोकल, वोकल, ग्लोबल की थ्योरी पर कदमताल भरने लगा। यह सबकुछ अनायास नहीं हुआ, बल्कि टीम मोदी के वृहद और व्यापक सोच का नतीजा है जो आने वाले महीनों में जब फर्राटे भरेगा, तो दुनिया जान जाएगी कि आत्मनिर्भर भारत योजना में ही मानवता का कल्याण निहित है। देर सबेर शेष दुनिया भी इसी रास्ते पर चलेगी और चीनी उत्पाद पर खुद की निर्भरता को कमतर करेगी।

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राष्ट्रीय लॉकडाउन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने इसी वर्ष गत 12 मई को राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक राहत पैकेज, आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत की है, जो कोविड-19 महामारी संकट से लड़ने में निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और एक आधुनिक भारत की पहचान बनेगा। क्योंकि इसके तहत पीएम मोदी ने जिस राहत पैकेज के अंतर्गत 20 लाख करोड़ रुपए दिए वह देश की जीडीपी का लगभग 10 प्रतिशत है। इसकी खास बात यह है कि उन्होंने किसी को भी नगद नारायण बहुत कम दिया, लेकिन अर्थव्यवस्था के सम्यक संचालन का जो अभूतपूर्व दृष्टिकोण दिया, उससे न तो देश घाटे में रहेगा, न ही किसी को आगे वित्तीय मनमानी करने की छूट मिलेगी, जैसा कि अब तक बताया जाता रहा है।

अमूमन, आत्मनिर्भर भारत अभियान राहत पैकेज के तहत पीएम द्वारा  एमएसएमई के कल्याण के तहत कुल 16-घोषणाएं की गईं, तो गरीबों, श्रमिकों और किसानों के लिए भी कतिपय मुख्य घोषणाएं की गईं, जिनमें किसानों की आय दोगुनी करने के लिए की गई 11 घोषणाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा, चौथा और पाँचवाँ ट्रान्च को लेकर भी कुछ ठोस उपाय किये।

बहरहाल, आत्मनिर्भर भारत अभियान के संकल्प, इसके लाभार्थी और पीएम मोदी राहत पैकेज के लाभ की जब हम समीक्षा करते हैं तो यह स्पष्ट होता है कि इस योजना अथवा अभियान का उद्देश्य 137 करोड़ भारतवासियों को आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि देश का हर नागरिक संकट की इस घड़ी में कदम से कदम मिलाकर चल सके और कोविड-19 की महामारी को हराने में अपना अहम योगदान दे सके। 

# समृद्ध और सम्पन्न भारत के निर्माण के लिए मिलाइए हाथ, बढ़िए साथ साथ

कहना न होगा कि एक समृद्ध और संपन्न भारत के निर्माण में आत्मनिर्भर भारत अभियान निश्चित ही अपना महत्वपूर्ण योगदान देगा। प्रधानमंत्री आर्थिक राहत पैकेज के मिलने से सभी सेक्टरों की दक्षता बढ़ेगी और गुणवत्ता भी सुनिश्चित होगी। सच कहा जाए तो इस योजना के ज़रिये देश की अर्थ व्यवस्था को 20 लाख करोड़ रूपये का संबल मिलेगा। दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत देश को योजना के माध्यम से और मजबूत बनाने के लिए जो एक नयी पहल की है, उससे कोरोना वायरस की वजह से देश की जो अर्थव्यवस्था बिगड़ गयी है, उन्हें सुधारा जा सकेगा और देश के लोगो को आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत दिनों भारतीय उद्योग परिसंघ के सालाना बैठक को संबोधित किया था, जिसमें पीएम मोदी ने कहा है कि हमारी सरकार प्राइवेट सेक्टर को देश की विकास यात्रा में साझीदार मानती है। लिहाजा, भारत को फिर से तेज़ विकास के पथ पर लाने के लिए, आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए जो पांच चीजें बहुत ज़रूरी हैं, उनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती है। इसलिए अब हमें अपने सामूहिक इरादे को एक लक्ष्य की ओर फोकस करते हुए इंटेंट यानी इरादा, इन्क्लूजन यानी समावेशन, इन्वेस्टमेंट यानी निवेश, इन्फ्रास्ट्रक्चर यानी बुनियादी ढांचा और इनोवेशन यानी नवोन्मेष की दिशा में कुछ बेहतर करना है।

पीएम ने स्पष्ट कर दिया है कि अब तो गांव के पास ही लोकल एग्रो प्रोडक्ट्स के क्लस्टर्स के लिए ज़रूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। इसमें सीआईआई के तमाम मेंबर्स के लिए बहुत अवसर छिपे हुए हैं। पिछले तीन चार महीने में ही पीपीई की करोड़ों की इंडस्ट्री भारतीय उद्यमियों ने ही खड़ी की है। प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा दिया कि देश में मेक इन इंडिया को रोजगार का बड़ा माध्यम बनाने के लिए कई प्राथमिक सेक्टर्स की पहचान की गई है। जिनमें अब तक तीन सेक्टर पर काम शुरू भी हो चुका है। इसलिये अब जरूरत है कि देश में ऐसे उत्पाद बनें, जो मेड इन इंडिया हो और मेड फॉर द वर्ल्ड हो। आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़े हितधारकों की हर जरूरत का ध्यान रखा जाएगा।

वास्तव में, देश में कोरोना महामारी से लॉकडाउन के कारण नाई की दुकानें, मोची, पान की दूकानें व कपड़े धोने की दूकानें, रेहड़ी-पटरी वालों की आजीविका पर सबसे ज्‍यादा असर पड़ा है। इस समस्या को ख़त्म करने के लिए प्रधानमंत्री के द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत एक नई योजना की घोषणा की है जिसका नाम है पीएम स्वनिधि योजना। इस योजना के अंतर्गत रेहड़ी पटरी वालों को सरकार द्वारा 10,000 रूपये का लोन मुहैया कराया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत दी जा रही अल्पकालिक सहायता 10,000 रुपया छोटे सड़क विक्रेताओं को अपना काम फिर से शुरू करने में सक्षम बनाएंगे। इस योजना के ज़रिये भी आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति मिलेगी।

# आत्मनिर्भर भारत अभियान की सम्पूर्ण जानकारी ऐसे मिलेगी आपको

बता दें कि आत्मनिर्भर भारत अभियान से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी देश के प्रत्येक पात्र नागरिक को ऑफिशियल वेबसाइट https://www.pmindia.gov.in/en/ पर मिलेगी।

क्योंकि कोरोना वायरस के कारण पूरे देश के लॉकडाउन की स्थिति का सबसे ज्यादा बुरा असर देश के सुक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योगों, श्रमिकों, मजदूरों और किसानों पर पड़ा है। इन सभी नागरिकों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री ने देश के सुक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योगों, श्रमिकों, मजदूरों और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी आर्थिक पैकेज का ऐलान कर दिया है। इस योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा चुने गए इन सभी लाभार्थियों को सबसे बड़ी सहायता राशी आर्थिक पैकेज के रूप प्रदान की जाएगी। केंद्र सरकार की इस मदद से भारत देश एक नई ऊंचाई की तरफ जायेगा।

# आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत एमएसएमई के लिए की गई 16-घोषणाएं

कोविड-19 ने देश और दुनिया के सामने बहुत से संकट खड़े किए हैं और इस चुनौती के समय में देश को अग्रसारित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा सूक्ष्म लघु मध्यम वर्गीय गृह उद्योग (एमएसएमईज) के लिए विभिन्न 16 घोषणाएं की हैं। क्योंकि एमएसएमई सेक्टर देश में 12 हजार करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है और देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।  सरकार द्वारा इनके लिए जो अहम घोषणाएं की गई हैं, उनमें- पहला, एमएसएमईज सहित व्यापार के लिए रुपये 3 लाख करोड़ संपार्श्विक नि: शुल्क स्वचालित ऋण है। दूसरा, एमएसएमईज के लिए रु 20000 करोड़ का अधीनस्थ ऋण है। तीसरा, एमएसएमईज के फंड के माध्यम से रुपए 50000 करोड़ की इक्विटी इन्फ्यूशन है। चौथा, एमएसएमईज की नई परिभाषा गढ़ी दी गई है। पांचवां, एमएसएमईज के लिए ग्लोबल टेंडर की सीमा बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये तक कर दी गई है ताकि अन्य निवेश भी इस ओर आकर्षित हों। छठा, एसएमई के लिए अन्य हस्तक्षेप भी किये गए हैं। सातवां, 3 और महीनों के लिए व्यापार और श्रमिकों के लिए 2500 करोड़ रुपये का ईपीएफ समर्थन दिया गया है। आठवां, ईपीएफ अंशदान 3 महीने के लिए व्यापार और श्रमिकों के लिए कम हो गया है। नौवां, एनबीएफसीएस, एचसी, एमएफआई के लिए 30000 करोड़ रुपये की तरलता सुविधा प्रदान की गई है। दसवां, एनबीएफसी के लिए 45000 करोड़ रुपये की आंशिक क्रेडिट गारंटी योजना दी गई है। ग्यारहवां, डीआईएससीओएम के लिए 30000 करोड़ रुपये की तरलता इंजेक्शन दिया गया है। बारहवां, ठेकेदारों को राहत दी गई है। तेरहवां, ईआरए के तहत रियल एस्टेट परियोजनाओं के पंजीकरण और पूर्णता तिथि का विस्तार किया गया है। चौदहवां, डीएस-टीसीएस कटौती के माध्यम से 50000 करोड़ रुपये की तरलता प्रदान की गई है। पन्द्रहवां, अन्य कर उपाय किये गए हैं, आदि।

# गरीबों, श्रमिकों और किसानों के लिए की गई मुख्य घोषणा

गत 14 मई 2020 को घोषित आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत मुख्यतः गरीब, श्रमिक और किसानों के लिए जो घोषणाएं की गई हैं, वह निम्न प्रकार की हैं- पहला, किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष सहायता प्रदान करने की पोस्ट कोविड-19 योजना है। दूसरा, पिछले 2 महीनों के दौरान प्रवासी और शहरी गरीबों के लिए सहायता योजना है। तीसरा, प्रवासियों को वापस करने के लिए एमजीएनआरईजीएस सहायता योजना है। चतुर्थ, श्रम संहिता में बदलाव करके श्रमिकों के लिए लाभ सुनिश्चित की जानी है। पंचम, 2 महीने के लिए प्रवासियों को मुफ्त भोजन की आपूर्ति हो रही है। षष्ठम, 2021 तक वन नेशन वन राशन कार्ड द्वारा भारत में किसी भी उचित मूल्य की दुकान से सार्वजनिक वितरण प्रणाली का उपयोग करने के लिए प्रवासियों को सक्षम करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्रौद्योगिकी प्रणाली को बढ़ावा दिया जाना तय हुआ है। सप्तम, प्रवासी श्रमिकों, शहरी गरीबों के लिए किफायती किराये के आवास परिसर बनाने की पहल हो रही है। अष्टम, मुद्रा शिशु ऋण के लिए 1500 करोड़ रुपये दिए गए हैं। नवम, स्ट्रीट वेंडर्स के लिए 5000 करोड़ रुपये की विशेष क्रेडिट सुविधा दी जा रही है। दशम, सीएलएसएस के विस्तार के माध्यम से आवास क्षेत्र और मध्यम आय वर्ग को बढ़ावा देने के लिए 70000 करोड़ रु निर्धारित है। ग्यारह, सीएएमपीए फंड का उपयोग कर 6000 करोड़ रोजगार पक्का किया जा रहा है। बारह, नाबार्ड के माध्यम से किसानों के लिए 30000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आपातकालीन कार्यशील पूंजीगत निधि सुनिश्चित की गई है। तेरह, किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से 2.5 करोड़ किसानों को बढ़ावा देने के लिए 2 लाख रु रखे गए हैं।

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# किसानों की आय दोगुनी करने के लिए की गई ग्यारह घोषणाएं

आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा देश के किसानों की आय को दोगुना करने के लिए मुख्यत: ग्यारह प्रकार की घोषणा की गई है। यह घोषणाएं कोरोना वायरस कोविड-19 की आपदा के मद्देनजर किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए की गई है। जिनमें पहला, कृषि अवसंरचना की स्थापना के लिए 11 लाख करोड़ रुपये का कोष है। दूसरा, सूक्ष्म खाद्य उद्यमों के एक औपचारिककरण के उद्देश्य से एक नई योजना के लायक रु 10000 करोड़ दिए जा रहे हैं। तीसरा, प्रधानमंत्री मातृ संपदा योजना के तहत मछुआरों के लिए 2000 करोड़ रुपये आवंटित हैं। चतुर्थ, पशुपालन के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 15000 करोड़ रुपये का सेटअप किया जाएगा। पंचम, केंद्र सरकार हर्बल खेती के लिए 4000 करोड़ रुपये आवंटित करेगी। षष्ठम, मधुमक्खी पालन की पहल के लिए 500 करोड़ रुपये अलग रखे गए हैं। सप्तम, 500 करोड़ रुपये के सभी फलों और सब्जियों को कवर करने के लिए ऑपरेशन ग्रीन का विस्तार किया जाएगा। अष्टम, अनाज, खाद्य तेल, तिलहन, दालें, प्याज और आलू जैसे आवश्यक भोजन में संशोधन लाया जाएगा। नवम, कृषि विपणन सुधारों को एक नए कानून के माध्यम से लागू किया जाएगा जो अंतरराज्यीय व्यापार के लिए बाधाओं को दूर करेगा। दशम, किसान को सुविधात्मक कृषि उपज के माध्यम से मूल्य और गुणवत्ता आश्वासन दिया जाएगा। और ग्यारह, चौथा और पाँचवाँ ट्रान्च ज्यादातर संरचनात्मक सुधारों से जुड़ा था, जो कुल मिलाकर 48,100 करोड़ का था, जिसमें वायबिलिटी गैप फंडिंग ₹ 8,100 करोड़ है। इसके अतिरिक्त मनरेगा के लिए 40,000 करोड़ रखे गए हैं।

# संकल्पशक्ति के सहारे रोग-व्याधियों से हमेशा लड़ता आया है भारत, बदलने होंगे सम्पूर्ण इरादे

इस बात में कोई दो राय नहीं कि भारत निरंतर ही बहुत ही बड़ी बड़ी जानलेवा बीमारियों जैसे टीबी, पोलियो, एड्स, कुपोषण, कैंसर आदि से लड़ता आया है। इसलिये पूर्व की भांति इस बार भी हमारा संकल्प कोरोना वायरस आपदा कोविड-19 को हराना है और विश्व कल्याण में पुनः अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है। इस नजरिए से उठ खड़े हुए किसी भी देश के विकास में और उसे आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यतः 5 चीजों की आवश्यकता होती है, जिसमें पहला- अर्थव्यवस्था, दूसरा- आधारिक संरचना, तीसरा- प्रणाली, चतुर्थ- जनसांख्यिकी, और पांचवां- मांग और आपूर्ति है।

बहरहाल, आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत देश की जो महिलाएं उज्ज्वला योजना के तहत फ्री सिलेंडर का लाभ प्राप्त कर रही हैं, उन महिलाओं से पेट्रोलियम और इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बात की। बता दें कि देश के लॉक डाउन के चलते केंद्र सरकार ने 6 करोड़ 28 हजार उज्ज्वला सिलेंडर बांटे हैं और 8432 करोड़ की राशि हितग्राहियों के खाते में सीधे डाली गई है। उज्ज्वला योजना के तहत लाभ प्राप्त कर रही महिलाओं को अब लोकल प्रोडक्ट्स की ब्रांड एंबेसडर बनाया जायेगा। दरअसल, मोदी सरकार देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए स्वदेशी पर जोर दे रही है, इसलिए देश में ही बने उत्पादों के लिए बड़े पैमाने पर माहौल तैयार किया जा रहा है। इस कॉन्फ्रेंस बैठक के दौरान उज्ज्वला स्कीम का फायदा लेने वाली महिलाओं के जागरूकता अभियान को भी सराहा गया।

वहीं, कोरोना वायरस संकट का सामना करते हुए नए संकल्प के साथ देश को विकास के नए दौर में ले जाने के लिए देश के विभिन्न वर्गों को एक साथ जोड़ा जाएगा और देश को विकास यात्रा की एक नई गति प्रदान की जाएगी।

इस अभियान के अंतर्गत देश के मजदूर, श्रमिक, किसान, लघु उद्योग, कुटीर उद्योग, मध्यमवर्गीय उद्योग, आदि सभी पर विशेष ध्यान अथवा बल दिया जाएगा। यह पैकेज इन सभी उद्योगों को 20 लाख करोड़ की सहायता प्रदान करेगा, जो कि भारत के एक गरीब नागरिक की आजीविका का साधन है।

यह पीएम मोदी राहत पैकेज, देश के उत्तरी श्रमिक व्यक्ति के लिए है जो हर स्थिति में देशवासियों के लिए परीक्षण करता है और देश को बुलंदी की ओर अग्रसर करता है।

# आत्मनिर्भर भारत अभियान से इंडिया के साथ साथ भारत की भी होगी बल्ले बल्ले

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के लाभार्थी में देश का गरीब नागरिक, श्रमिक, प्रवासी मजदूर, पशुपालक, मछुआरे, किसान, संगठित क्षेत्र व असंगठित क्षेत्र के व्यक्ति, काश्तकार, कुटीर उद्योग, लघु उद्योग, मध्यमवर्गीय उद्योग को पीएम मोदी राहत पैकेज के लाभ मिलेंगे। जिससे 10 करोड़ मजदूरों को लाभ होगा, एमएसएमई से जुड़े 11 करोड़ कर्मचारियों को फायदा होगा, इंडस्ट्री से जुड़े 3.8 करोड़ लोगों को लाभ पहुंचेगा और टेक्सटाइल इंडस्ट्री से जुड़े 4.5 करोड़ कर्मचारियों को लाभ पहुंचेगा। ये आर्थिक पैकेज हमारे कुटीर उद्योग, गृह उद्योग, हमारे लघु-मंझोले उद्योग, हमारे एमएसएमई के लिए है, जो करोड़ों लोगों की आजीविका का साधन है। इस आर्थिक पैकेज से गरीब मजदूरों, कर्मचारियों के साथ ही होटल तथा टेक्सटाइल जैसी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को फायदा होगा।

बता दें कि आत्मनिर्भर भारत अभियान राहत पैकेज के अंतर्गत कतिपय महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं जिनके तहत कृषि आपूर्ति श्रृंखला व प्रणाली में सुधार, सरल और स्पष्ट नियम कानून, उत्तम आधारिक संरचना, समर्थ और संकल्पित मानवाधिकार, बेहतर वित्तीय सेवा, नए व्यवसाय को प्रेरित करना, निवेश को प्रेरित करना और मेक इन इंडिया मिशन पर विशेष बल दिया जा रहा है। वास्तव में, आत्मनिर्भरता आत्मबल और आत्मविश्वास से ही संभव है। इसलिये हम सभी परस्पर मिलकर देश के विकास में योगदान दें और वैश्विक आपूर्ति चयन में अपनी भूमिका निभाएं। क्योंकि आज भारत के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती इस आपदा के रूप में खड़ी है। भले ही हमारे पड़ोसी हमसे जलते भुनते हैं, लेकिन भारत की संस्कृति और भारत के संस्कार हमें संसार के सुख सहयोग और शांति की चिंता सिखाती है। इसलिए हमलोगों को एक दूसरे से मिलकर अपनी पूरी संकल्प शक्ति के साथ इस महामारी का सामना भी करना है और भारत को विकास की दिशा में अग्रसर करने के लिए अपना अपना अहम योगदान भी देना है।

कमलेश पांडेय, 

वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार