Office Job में घंटों बैठना पड़ रहा भारी? Expert से जानें क्यों दब रही है पैर की नस

 Pinched Nerve Pain
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खराब जीवनशैली और गलत पोश्चर के कारण युवाओं में भी पैर की नस दबने की समस्या बढ़ रही है, जिसके मुख्य कारणों में स्लिप डिस्क, स्पाइनल स्टेनोसिस और चोट शामिल हैं।

भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी सेहत का ध्यान रखना तो भूल ही गए। ऊपर से लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करना, मोबाइल या लैपटॉप पर झुककर रहना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी आम हो गई है। जिसका सीधा असर हमारी रीढ़ और नसों पर जरुर पड़ता है। जब कमर या पैर की नसों पर लगातार दबाव बना रहता है, तो दिमाग और मांसपेशियों के बीच सिग्नल सही तरीके से नहीं पहुंच पाते। इस समस्या का परिणाम दर्द, सुन्नता और कमजोरी के रूप में सामने आता है। कई मामलों में दर्द कमर से शुरू होकर धीरे-धीरे पैर तक फैल जाता है। हैरानी की बात यह है कि पैर की नस दबने की दिक्कत अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही। आज के समय में युवा, ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोग और यहां तक कि खिलाड़ी भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। अक्सर इसके लक्षण धीरे-धीरे उभरते हैं, जिस वजह से लोग समय रहते डॉक्टर से सलाह नहीं ले पाते। इस लेख में हम आपको पैर की नस दबने के क्या कारण होते हैं बताते हैं-

पैर की नस दबने के क्या कारण होते हैं?

स्लिप डिस्क या हर्नियेटेड डिस्क

आमतौर पर पैर में नर्व दबने की सबसे बड़ी वजह स्लिप डिस्क होती है। जब कमर की रीढ़ की हड्डी के बीच मौजूद डिस्क अपनी जगह से खिसक जाती है, तो वह आसपास की नसों को दबाने लगती है। इससे दर्द कमर से शुरु होकर पैर तक फैल सकता है, जिसको साइटिका कहा जाता है।

स्पाइनल स्टेनोसिस और बोन स्पर की भूमिका

जब उम्र बढ़ने लगती हैं तो कई लोगों में रीढ़ की नलिका सिकुड़ने लगती हैं, जिसे स्पाइनल स्टेनोसिस कहा जाता है। इसके अलावा हड्डियो पर अतिरिक्त बढ़ोतरी यानी बोन स्पर भी बन सकते हैं। इन दोनों स्थितियों में नसों के लिए जगह कम कर देती हैं, जिससे पैर की नसों पर दबाव पड़ता है और चलने में दर्द या सुन्नपन महसूस होने लगता है।

चोट या एक्सीडेंट के बाद बढ़ सकता है खतरा

गिरने, सड़क हादसे या खेल गतिविधियों के दौरान लगी चोट के कारण शरीर में सूजन या आंतरिक क्षति हो सकती है। यह सूजन आसपास की नसों पर दबाव डालती है। कई मामलों में, बाहरी चोट ठीक हो जाने के बाद भी नसों पर पड़ा दबाव बना रहता है, जिससे पैरों में लंबे समय तक दर्द, झनझनाहट या कमजोरी महसूस हो सकती है।

टाइट मसल्स

केवल हड्डियां ही नहीं, बल्कि टाइट मसल्स भी नसों को दबा सकती हैं। आमतौर पर हिप और जांग की मांसपेशियां यदि सख्त हो जाए, तो वे नसों को फंसा लेती है। इसे पिरिफॉर्मिस सिंड्रोम जैसी स्थितियों में देखा जाता है, जहां दर्द पैर तक फैलता है।

गलत पोश्चर और लंबे समय तक बैठना

ऑफिस में लगातार गलत ढंग से बैठकर काम करना, आगे झुककर बैठना या लंबे समय तक बिना आराम किए बैठे रहना पैरों की नसों पर बुरा असर डाल सकता है। खराब बैठने की पोश्चर से रीढ़ की हड्डी पर अधिक दबाव पड़ता है, जिससे समय के साथ नसें दबने लगती हैं और दर्द या कमजोरी की समस्या पैदा हो सकती है।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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