Insomnia से हैं परेशान तो अपनाएं Military Method, 120 सेकेंड में मिलेगी गहरी नींद

Military Method
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तनाव और अनिद्रा की समस्या से राहत पाने के लिए मिलिट्री मेथड बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। द्वितीय विश्व युद्ध में विकसित यह तकनीक तंत्रिका तंत्र को शांत कर 120 सेकंड में नींद लाने में मदद करती है। भारतीय योग के शवासन जैसी इस विधि में शरीर के अंगों को शिथिल कर सांसों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

आजकल युवाओं में देर रात तक फोन की स्कीन पर चिपके रहना एक आदत बन गई है। लगातार फोन चलाने से तनाव, चिंता और अवसाद के कारण लोग अनिद्रा या इंसोम्निया जैसी समस्या से जूझ सकते हैं। अब नींद के लिए मिलिट्री मेथड को फायदेमंद कहा जा रहा है। क्या आप जानते हैं इस तकनीक के बारे में, आइए आपको एक्सपर्ट से समझें नींद लाने के लिए कितनी कारगर है यह तकनीक।

अनिद्रा के लिए 'Military Method'

जब रात को नींद नहीं आती, तो लोग काफी उपाय करते हैं कि जल्दी नींद आ जाए। हालांकि, उन्हें 8 घंटे की सुखद निद्रा उन्हें नसीब नहीं होती है। ऐसे में मिलिट्री मेथड उनके के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। दरअसल, यह एक ऐसी तकनीक है, जो शोरगुल और तनाव के बीच भी आपको नींद आने में मदद करती है। लेकिन एक्सपर्ट के अनुसार, इसे पूरी तरह से जादुई नहीं मानते, उनके मुताबिक इसके नियमित अभ्यास से दिमाग और शरीर शांत होता है, जिससे नींद आने में मदद मिलेगी।

कहां से आई तकनीक?

खासतौर पर यह तकनीक द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी द्वारा विकसित की गई थी। उस दौरान तनावपूर्ण माहौल और युद्ध के बीच सैनिक और पायलटों को नींद की परेशानी होती थी, इस दौरान उन्होंने यह तरीका अपनाया और उन्हें फायदा प्राप्त हुआ। असल में यह तकनीक शरीर के नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) को शांत करती है और दिमाग की तरह है यह संकेत देता है कि अब खतरा टल चुका है और विश्राम का समय है। ठीक ऐसे ही सामान्य मनुष्य भी रोजाना इस तकनीक का अभ्यास कर सकते हैं।

भारतीय योग से संबंध

एक्सपर्ट के अनुसार, भारतीय योग ऐसी तकनीक सालों से अपना रहे हैं, जिसे शवासन कहा जाता है। मिलिट्री मेथड और श्वासन में काफी हद तक समानता है। इसलिए भारतीय इस तकनीक को काफी आसानी और प्राकृतिक रुप से अपनाने में सक्षम हो सकते हैं।

कैसे काम करता है यह तरीका

असल में इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कुल 120 सेकेंड लगते हैं, जिसमें शरीर के हर हिस्से को क्रमानुसार ढीला छोड़ा जाता है और उसके बाद सांसों पर नियंत्रण से कुछ ही समय में नींद आने लगती हैं और आपको पता भी नहीं चलेगा।

- चेहरा रिलैक्स करें- सबसे पहले आंखें बंद करें और धीरे-धीरे सांस लीजिए और अपने माथे, गाल, जबड़े और जीभ की मसल्स को पूरी तरह ढीला छोड़ दें।

- कंधे और हाथ ढीले करें- अपने दोनों कंधों को नीचे की तरफ गिराएं और तनाव मुक्त करें। इसके बाद एक-एक करके अपने दोनों हाथों, बाजुओं और हथेलियों को पूरी तरह ढीला छोड़ दें।

- सांस पर ध्यान दें- एक गहरी सांस लें और धीरे-धीरे छोड़ें। इससे आपकी चेस्ट और पेट की मसल्स शांत हो जाएगी।

- पैरों को रिलैक्स करें- पैरों को पहले खूब खींचें और फिर धीरे-धीरे बिस्तर पर ढीला छोड़ दें।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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