चीन पर चढ़ा Made In India का खुमार, 5 महीने में 9.36 अरब की शॉपिंग

अप्रैल से अगस्त के दौरान भारत से चीन को होने वाला निर्यात 39 प्रतिशत बढ़कर 9.6 अरब डॉलर पहुंच गया है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामानों की मांग में भारी वृद्धि का बड़ा योगदान रहा। हालांकि, चीन से भारी मात्रा में होने वाले आयात के कारण दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
जिस चीन के साथ भारत का व्यापार लंबे समय से एकतरफा नजर आता रहा है। अब भारतीय सामान की डिमांड तेजी से यहां बढ़ रही है। सिर्फ 5 महीने में चीन ने भारत से करीब ₹9.6 अरब डॉलर यानी लगभग ₹80,000 करोड़ का सामान खरीदा है। लेकिन इसको लेकर सबसे बड़ी बात यह है कि यह आंकड़ा पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले करीब 39% ज्यादा है। यानी दुनिया के सबसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग देशों में शामिल चीन अब भारत से भी ज्यादा सामान मंगवाने लगा है। लेकिन आखिर ऐसा क्यों बदल रहा है? चीन के बाजार में मेड इन इंडिया की पकड़ बढ़ती कैसे दिखाई दे रही है? क्या यह भारत चीन की व्यापारिक किशस्तों में किसी बड़े बदलाव का संकेत है? ताजा कॉमर्स मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से अगस्त तक 2026 के दौरान भारत का चीन को निर्यात कुल 39% बढ़कर यहां पर 9.6 अरब डॉलर पहुंच गया है। ये आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस अवधि में भारत के पुराने ब्रिक्स सम साझेदार चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका को कुल भारतीय निर्यात 34% बढ़कर यहां पर 19.9 अरब डॉलर हो गया है। यानी इन चार देशों के बीच चीन भारत के निर्यात का सबसे बड़ा बाजार रहा। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब भारत अपने मैन्युफैक्चरिंग बेस को बढ़ाना चाहता है और ग्लोबल सप्लाई चेन में बड़ी भूमिका निभाना चाहता है। इस कोशिश में इलेक्ट्रॉनिक्स एक अहम सेक्टर बनकर उभरा है। सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल-अगस्त की अवधि में चीन को इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट पिछले साल के मुकाबले 15 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ा। इससे पहले पिछले फाइनेंशियल ईयर के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स शिपमेंट में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई थी।
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चीन भारत से खरीद क्यों रहा है?
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स इस बढ़ोतरी के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल है। भारत से चीन जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स सामान जो हैं इसमें प्रिंटेड सर्किट बोर्ड्स हैं, स्मार्टफोनस हैं, डिस्प्ले मॉड्यूल्स और टेलीकॉम इक्विपमेंट जैसी तमाम चीजें शामिल हैं। ऐसे में वैश्विक स्तर पर एआई डाटा सेंटर्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की जो मांग है इससे बढ़ रही है जिससे इलेक्ट्रॉनिक सप्लाई चेन में भी ज्यादा बदलाव देखने को मिल रहा है और भारत इस बढ़ती मांग का एक हिस्सा पकड़ने की कोशिश कर रहा है। इसका मतलब यही है कि चीन ने भारतीय सामान के लिए अपना पूरा बाजार खोल दिया है। या फिर यह इसको आप ऐसे नहीं देख सकते कि भारत चीन का व्यापार संतुलित अभी धीरे-धीरे होता नजर आएगा। उदाहरण के लिए अगर आपको समझाएं तो अप्रैल और अगस्त 2026 27 के दौरान भारत ने चीन से करीब 65.49 अरब डॉलर का सामान आयत किया। यानी भारत का चीन से आयत अभी भी चीन को किए जाने वाले निर्यात से कई गुना ज्यादा है। इस 5 महीने की अवधि में चीन भारत का सबसे बड़ा इंपोर्ट सोर्स रहा है। इसलिए 9 6 अरब डॉलर का आंकड़ा एक सकारात्मक एक्सपोर्ट डेवलपमेंट जरूर है। लेकिन इसे भारत चीन के व्यापार घाटी के खत्म होने के तौर पर देखना सही नहीं होगा।
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AI की मांग से इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी
मार्च में खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में चीन को भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट तीन गुना बढ़कर $3.18 बिलियन हो गया, हालांकि यह बढ़ोतरी एक कम शुरुआती स्तर से हुई थी। इन शिपमेंट्स में प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली, स्मार्टफोन, डिस्प्ले मॉड्यूल और टेलीकॉम इक्विपमेंट शामिल थे। इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि AI और डेटा सेंटर्स के ग्लोबल विस्तार से भारतीय मैन्युफैक्चरर्स के इक्विपमेंट और कंपोनेंट्स की मांग बढ़ रही है। यह बढ़ोतरी भारत के मैन्युफैक्चरिंग लक्ष्यों के लिए अहम है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स उन सेक्टर्स में से एक है जिसे नई दिल्ली बढ़ाना चाहती है, क्योंकि कंपनियां अपनी सप्लाई चेन में विविधता ला रही हैं।
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इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट में भी बढ़ोतरी
चीन को होने वाले एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी सिर्फ़ इलेक्ट्रॉनिक्स तक ही सीमित नहीं है। ब्लूमबर्ग न्यूज़ के अनुसार, अप्रैल-अगस्त की अवधि में इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट पिछले साल के मुकाबले लगभग 21 प्रतिशत बढ़ा। इस बढ़ोतरी में मशीनरी और उसके पार्ट्स, ऑटो कंपोनेंट्स और हैंड टूल्स शामिल थे। इस व्यापक बढ़ोतरी से पता चलता है कि भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को चीनी बाज़ार में नए मौके मिल रहे हैं। लेकिन एक्सपोर्टर्स को इस रफ़्तार को बनाए रखना होगा और ज़्यादा तरह के प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट करना होगा, ताकि इन फ़ायदों का दोनों देशों के बीच व्यापार पर कोई ठोस असर पड़ सके।
भारतीय एक्सपोर्ट के लिए चीन अभी भी एक छोटा बाज़ार है
हाल की बढ़ोतरी के बावजूद, भारतीय सामान के लिए चीन अभी भी एक छोटा बाज़ार बना हुआ है। मार्च में खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में भारत के कुल एक्सपोर्ट में चीन की हिस्सेदारी लगभग 4.4 प्रतिशत रही, जो एक साल पहले 3 प्रतिशत से थोड़ी ज़्यादा थी। अमेरिका, जो भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट बाज़ार है, भारत के कुल एक्सपोर्ट का लगभग पांचवां हिस्सा है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए चीन में अपने कारोबार को बढ़ाने, खासकर मैन्युफैक्चर्ड सामान के मामले में, काफी गुंजाइश बनती है। लेकिन भारत जो सामान चीन को बेचता है और जो वहां से खरीदता है, उसके बीच भी काफी बड़ा अंतर है।
ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) एक बड़ी समस्या बनी हुई है
ब्लूमबर्ग न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में खत्म हुए साल में भारत ने 131.6 अरब डॉलर का चीनी सामान आयात किया। भारत के कुल आयात में चीनी सामान की हिस्सेदारी लगभग 17 प्रतिशत थी। इसलिए, चीन से भारत के इंपोर्ट की वैल्यू, चीन को भारत के एक्सपोर्ट की तुलना में कई गुना ज़्यादा थी। इस वजह से, हाल ही में एक्सपोर्ट बढ़ने के बावजूद दोनों देशों के बीच ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) में कोई खास बदलाव नहीं आया। इस बढ़ोतरी के स्वरूप को लेकर भी कुछ अनिश्चितता है। चीन के कस्टम्स डेटा में भारत से प्रिंटेड सर्किट बोर्ड के इंपोर्ट में ऐसी कोई बढ़ोतरी नहीं दिखती है। इसके बजाय, ज़्यादातर बढ़ोतरी स्मार्टफ़ोन और दूसरे टेलीकॉम प्रोडक्ट्स के मामले में दिखती है। इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि दोनों देशों के सामानों को क्लासिफ़ाई करने के तरीकों में अंतर की वजह से यह ठीक-ठीक पता लगाना मुश्किल है कि इस बढ़ोतरी की असल वजह क्या है।
दिशा में बदलाव, लेकिन अभी पूरी तरह उलटाव नहीं
हाल के वर्षों में रिश्ते काफी खराब होने के बाद, भारत और चीन अपने आर्थिक संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं, और इसी वजह से एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी हुई है। ग्लोबल ट्रेड के तौर-तरीकों में बदलाव के साथ-साथ, दोनों पक्ष ट्रेड और सप्लाई-चेन से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान दे रहे हैं। भारत के लिए, चीन को एक्सपोर्ट बढ़ने से उसकी मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं बढ़ाने और ग्लोबल वैल्यू चेन में बड़ी भूमिका निभाने की कोशिशों को मदद मिल सकती है। लेकिन हाल के आंकड़े अभी कुल ट्रेड संबंधों में किसी बड़े बदलाव का संकेत नहीं देते हैं। भारत चीन को ज़्यादा इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग का सामान और दूसरे मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट बेच रहा है। साथ ही, भारत के ट्रेड में चीनी सामान का हिस्सा अभी भी बहुत बड़ा है। भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए तुरंत चुनौती यह है कि वे हाल की ग्रोथ को बनाए रखें और इसे कंपोनेंट्स, सब-असेंबली और तैयार प्रोडक्ट्स तक फैलाएं।
बहरहाल, भारत और चीन के बीच पिछले कुछ सालों से सीमा और रणनीतिक मुद्दों को लेकर तनाव रहा है। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार जारी है। अब अगर राजनीतिक स्तर पर संबंध और आर्थिक संपर्क में सुधार आता है तो व्यापार के कुछ क्षेत्रों में इसका असर साफ दिखाई दे सकता है। लेकिन व्यापार के आंकड़ों से अभी यह निष्कर्ष निकाला नहीं जा सकता कि दोनों देशों के रिश्तों में व्यापक बदलाव हो चुका है।
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