जानना चाहेंगे सूर्य और चन्द्रमा को क्यों लगता है ग्रहण?

By अमृता गोस्वामी | Publish Date: Sep 23 2017 3:43PM
जानना चाहेंगे सूर्य और चन्द्रमा को क्यों लगता है ग्रहण?

सूर्यग्रहण और चन्द्रग्रहण ऐसी खगोलीय घटनाएं हैं जो पृथ्वी से जुड़ी हुई हैं, इन घटनाओं के नजारे पृथ्वी से देखे जा सकते हैं। हाल ही में 21 अगस्त 2017 को अमावस्या के दिन अमेरिकी महाद्वीप से पूर्ण सूर्यग्रहण देखा गया।

सूर्यग्रहण और चन्द्रग्रहण ऐसी खगोलीय घटनाएं हैं जो पृथ्वी से जुड़ी हुई हैं, इन घटनाओं के नजारे पृथ्वी से देखे जा सकते हैं। हाल ही में 21 अगस्त 2017 को अमावस्या के दिन अमेरिकी महाद्वीप से पूर्ण सूर्यग्रहण देखा गया। वैज्ञानिकों के अनुसार पूर्ण सूर्यग्रहण का यह खास संयोग यहां 100 साल बाद देखने को मिला। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक 1918 के बाद पहली बार 100 साल बाद सूर्यग्रहण पूरे अमेरिकी महाद्वीप में पूर्ण देखा गया।

बच्चों, आपने भी अमेरिका में घटित पूर्ण सूर्यग्रहण की इस घटना को किसी खास उपकरण के जरिए अथवा अपने टीवी या कम्यूटर पर देखा होगा। यह तो आप सभी जान ही चुके होंगे कि सूर्यग्रहण और चन्द्रग्रहण जैसी घटनाओं के वैज्ञानिक कारण हैं। दरअसल हमारी पृथ्वी अपनी कक्षा में घूमते हुए सूर्य के चारों ओर लगातार चक्कर लगा रही है वहीं चन्द्रमा जो पृथ्वी का उपग्रह है पृथ्वी के चक्कर लगा रहा है। जब पृथ्वी चन्द्रमा और सूर्य एक सीधी रेखा में आ जाते हैं तो सूर्यग्रहण अथवा चन्द्रग्रहण जैसी घटनाएं घटती हैं। सूर्यग्रहण तब पड़ता है जब चन्द्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाता। वहीं चन्द्रग्रहण के समय पृथ्वी सूर्य और चन्द्रमा के बीच आ जाती है जिससे चन्द्रमा पर सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंच पाता। सूर्यग्रहण हमेशा अमावस्या को और चन्द्रग्रहण पूर्णिमा को होता है।
 
सूर्यग्रहण तीन प्रकार के होते हैं आंशिक, पूर्ण और वलयाकार। आंशिक सूर्यग्रहण के समय चन्द्रमा की छाया सूर्य के केवल कुछ ही भाग को ढक पाती है और पूर्ण सूर्यग्रहण के समय पूरा सूर्य चन्द्रमा की छाया से ढका नजर आता है वहीं वलयाकार सूर्यग्रहण होने पर सूर्य एक कंगन की तरह दिखाई देता है जिसमें सूर्य का मात्र बीच का हिस्सा ढका दिखाई देता है और बाकी हिस्सा प्रकाशित दिखता है।
 


चन्द्रग्रहण दो प्रकार के होते हैं सर्वग्रास चन्द्रग्रहण और खण्डग्रास चन्द्रग्रहण। पृथ्वी द्वारा चन्द्रमा का पूरी तरह ढका दिखाई देना सर्वग्रास चन्द्रग्रहण और आंशिक रूप से ढका दिखाई देना खण्डग्रास चन्द्रग्रहण कहा जाता है।
 
दोस्तों, सूर्यग्रहण और चन्द्रग्रहण जैसी खगोलीय घटनाओं को वैज्ञानिक जहां शोध व अध्ययन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानते हैं और उत्साहित होकर देखते हैं वहीं कुछ जगहों पर लोग इन घटनाओं को धार्मिक आस्थाओं अथवा डर-भय या दैत्यों से जुड़ा भी देखते हैं। ये लोग आज भी उन कल्पनाओं को सही मानते हैं जो तब की गईं थीं जब लोगों को इनके वैज्ञानिक कारणों का पता नहीं था।
 
हां, सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए जिन्हें वैज्ञानिक भी मानते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक ग्रहण को हमेशा खास किस्म के चश्मे जो अल्ट्रावायलेट किरणों को रोक पाएं, को पहनकर ही देखना चाहिए। नंगी आंखों से ग्रहण देखने से आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। ग्रहण के समय या उसके आगे-पीछे के दिनों में भूकंप जैसी घटनाओं के प्रति भी एहतियात बरतनी चाहिए क्योंकि गुरूत्वार्षण घटने या बढ़ने से धरती पर भूकंप आने की संभावना रहती है। ग्रहण के दौरान खाने-पीने की चीजें खुली न रखें, जीवाणुओं और विषाणुओं के कारण ये दूषित हो सकती हैं।
 


- अमृता गोस्वामी

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